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बेटियों के खेल से माध्यमिक स्कूलों का खिलवाड़
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बेटियों के खेल से माध्यमिक स्कूलों का खिलवाड़
विवेक सिंह
गोरखपुर। माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से संचालित विद्यालयों में बेटियों के खेल से भी जमकर खिलवाड़ हो रहा है। विभाग की ओर से अंडर-14, अंडर-17 और अंडर-19 वर्ग में प्रतिवर्ष 22 खेलों में जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। मगर बमुश्किल 19 विद्यालय ही जैसे तैसे टीम बनाकर इनमें हिस्सा लेते हैं। कबड्डी, एथलेटिक्स और कुश्ती को छोड़ दें तो ज्यादातर खेलों में दो से तीन टीमें ही हिस्सा लेने पहुंचती हैं। साल दर साल आंकड़े और भयावह होते जा रहे हैं, मगर जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। तहसील स्तर से ही प्रतियोगिताओं को लेकर विद्यालयों की ओर से कोई रूचि नहीं दिखाई जाती है। आठ तहसीलों में से महानगर और सदर पूर्वी को छोड़ दे तो शेष बची छह तहसीलों में बालिकाओं के लिए खेल की वर्तमान स्थिति मरणासन्न है। जिम्मेदार इसे सुधारने की दिशा में भी कोई ठोस पहल नहीं की जाती है। यही वजह है कि दिनों दिन खेल के हालत बिगड़ते जा रहे हैं।
::: 300 विद्यालयों में अध्ययन करती हैं छात्राएं
जिले में यूं तो 491 सरकारी, अनुदानित और सेल्फ फाइनेंस माध्यमिक स्कूलों की संख्या है। इनमें से करीब 300 से अधिक विद्यालयों में छात्राएं पढ़ाई करती हैं। इनमें सहशिक्षा, लड़कियों के राजकीय, अनुदानित और सेल्फ फाइनेंस विद्यालय मौजूद हैं।
::: शहरी क्षेत्र के विद्यालयों ने बचाई लाज
बालिकाओं की जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में शहर के विद्यालयों ने माध्यमिक विद्यालयों की लाज कुछ हद तक बचाई है। 19 विद्यालयों में से 10 विद्यालय एमपी बालिका इंटर कॉलेज, मंगला देवी, इमामबाड़ा, कार्मल गर्ल्स इंटर कॉलेज, एडी गर्ल्स इंटर कॉलेज, रामदेई इंटर कॉलेज, मंगला देवी इंटर कॉलेज, मैनादेवी इंटर कॉलेज, दयानंद इंटर कॉलेज शहरी क्षेत्र में आते हैं। ज्यादातर प्रतिभागिता इन्हीं विद्यालयों से होती है।
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::: ग्रामीण क्षेत्र से रूचि लेने वालेे विद्यालय
भोलाराम मस्करा इंटर कॉलेज, बापू इंटर कॉलेज पीपीगंज, मलांव, खजनी, भटौली, महुआपार, नेशनल इंटर कॉलेज, बरही, पिपराइच और ज्योति इंटर कॉलेज नाहरपुर
::: कोट
माध्यमिक विद्यालयों में खेलों की स्थिति सुधारने के लिए समय समय पर खेल प्रशिक्षकों के साथ बैठक कर व्यवस्था को सुधारने के लिए निर्देशित किया जाता है। इसे और बेहतर बनाने के लिए ठोस रणनीति बनाई जाएगी।
ज्ञानेंद्र सिंह भदौरिया, डीआईओएस
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विवेक सिंह
गोरखपुर। माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से संचालित विद्यालयों में बेटियों के खेल से भी जमकर खिलवाड़ हो रहा है। विभाग की ओर से अंडर-14, अंडर-17 और अंडर-19 वर्ग में प्रतिवर्ष 22 खेलों में जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। मगर बमुश्किल 19 विद्यालय ही जैसे तैसे टीम बनाकर इनमें हिस्सा लेते हैं। कबड्डी, एथलेटिक्स और कुश्ती को छोड़ दें तो ज्यादातर खेलों में दो से तीन टीमें ही हिस्सा लेने पहुंचती हैं। साल दर साल आंकड़े और भयावह होते जा रहे हैं, मगर जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। तहसील स्तर से ही प्रतियोगिताओं को लेकर विद्यालयों की ओर से कोई रूचि नहीं दिखाई जाती है। आठ तहसीलों में से महानगर और सदर पूर्वी को छोड़ दे तो शेष बची छह तहसीलों में बालिकाओं के लिए खेल की वर्तमान स्थिति मरणासन्न है। जिम्मेदार इसे सुधारने की दिशा में भी कोई ठोस पहल नहीं की जाती है। यही वजह है कि दिनों दिन खेल के हालत बिगड़ते जा रहे हैं।
::: 300 विद्यालयों में अध्ययन करती हैं छात्राएं
जिले में यूं तो 491 सरकारी, अनुदानित और सेल्फ फाइनेंस माध्यमिक स्कूलों की संख्या है। इनमें से करीब 300 से अधिक विद्यालयों में छात्राएं पढ़ाई करती हैं। इनमें सहशिक्षा, लड़कियों के राजकीय, अनुदानित और सेल्फ फाइनेंस विद्यालय मौजूद हैं।
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::: शहरी क्षेत्र के विद्यालयों ने बचाई लाज
बालिकाओं की जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में शहर के विद्यालयों ने माध्यमिक विद्यालयों की लाज कुछ हद तक बचाई है। 19 विद्यालयों में से 10 विद्यालय एमपी बालिका इंटर कॉलेज, मंगला देवी, इमामबाड़ा, कार्मल गर्ल्स इंटर कॉलेज, एडी गर्ल्स इंटर कॉलेज, रामदेई इंटर कॉलेज, मंगला देवी इंटर कॉलेज, मैनादेवी इंटर कॉलेज, दयानंद इंटर कॉलेज शहरी क्षेत्र में आते हैं। ज्यादातर प्रतिभागिता इन्हीं विद्यालयों से होती है।
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::: ग्रामीण क्षेत्र से रूचि लेने वालेे विद्यालय
भोलाराम मस्करा इंटर कॉलेज, बापू इंटर कॉलेज पीपीगंज, मलांव, खजनी, भटौली, महुआपार, नेशनल इंटर कॉलेज, बरही, पिपराइच और ज्योति इंटर कॉलेज नाहरपुर
::: कोट
माध्यमिक विद्यालयों में खेलों की स्थिति सुधारने के लिए समय समय पर खेल प्रशिक्षकों के साथ बैठक कर व्यवस्था को सुधारने के लिए निर्देशित किया जाता है। इसे और बेहतर बनाने के लिए ठोस रणनीति बनाई जाएगी।
ज्ञानेंद्र सिंह भदौरिया, डीआईओएस