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वन माफियाओं का चारागाह बन गया कुसुम्ही जंगल

Mon, 17 Oct 2016 12:28 AM IST
टीपी शाही, अमर उजाला, गोरखपुर।
टीपी शाही, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Mon, 17 Oct 2016 12:28 AM IST
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Smuglar cut the tree in Kusumhi farest
कुसम्ही जंगल - फोटो : Shivharsh Dwivedi
महानगर की सरहद से सटा कुसम्ही जंगल वन माफियाओं के लिए चरागाह बन गया है। बेहद आकर्षक ढंग से बसाए गए इस जंगल के अंदर से तस्कर कई स्थानों से बड़े-बड़े पेड़ काटकर उठा ले गए। जो पेड़ काटे गए हैं उनकी जड़ों में मिट्टी डालकर पाट दिया गया है ताकि किसी को इसकी भनक न लगे।
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इस जंगल की रखवाली के लिए वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी भरकम टीम है। इसकी मानीटरिंग के लिए रेंजर से लेकर संभागीय वन अधिकारी तक यहां बैठते हैं। इस मद में शासन हर महीने लाखों रुपये खर्च करता है। इनकी जिम्मेदारी सिर्फ पेड़ों का संरक्षण ही नहीं है बल्कि टीम को इस पर भी विशेष ध्यान देना होता है कि पेड़ की अवैध कटान न होने पाए, पर सच्चाई इससे इतर है। आसपास के लोगों की मानें तो यहां विभाग के लोग वनों की रखवाली छोड़ बाकी वो सभी काम करते हैं जिसमें उनका हित होता है। उनकी जानकारी में ही आए दिन पेड़ों की कटान होती है। आरोप तो यहां तक लगाया जाता है कि सागौन के बड़े-बड़े पेड़ों को काटकर लकड़ियां पहले वन विभाग की चौकियों पर लाई जाती हैं फिर वहां से कारोबारियों तक पहुंच जाती हैं।
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पेड़ों के कटान की जमीनी हकीकत जानने के लिए ‘अमर उजाला’ की टीम जब रजही बीट के जंगल में पहुंची तो वहां के हालात देख दंग रह गई। जंगल के आसपास के रहने वाले लोगों ने ऐेसे कई स्थान दिखाए जहां हालिया दिनों में पेड़ों की कटाई हुई है। पेड़ों को काटकर जड़ को मिट्टी से ढक दिया गया है। कई स्थानों पर घास-फूस से ढंका गया है ताकि किसी को इसकी भनक न लगे। नेशनल हाइवे से मात्र डेढ़ सौ मीटर की दूरी पर पेड़ों के काटने के निशान मौजूद हैं, मगर यह सब कुछ वन विभाग को नहीं दिख रहा। सूत्रों का तो दावा है कि जंगल में पेड़ों की कटाई वन विभाग के एक दरोगा की मिलीभगत से हो रही है। 
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अभी दस दिन पूर्व आया हूं। किस जगह कटान हो रही है, उसकी जानकारी जुटाकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा।
- अरुण कुमार, डीफओ
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