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सीलिंग की जमीन से जुड़ी सभी फाइलों की जांच-पड़ताल शुरू
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सीलिंग की जमीन से जुड़ी सभी फाइलों की जांच-पड़ताल शुरू
गोरखपुर । बशारतपुर में अर्बन सीलिंग की बेशकीमती जमीन से जुड़ी मूल फाइलें ही गायब हो जाने की घटना सामने आने के बाद जांच कमेटी ने इस मामले के साथ ही साथ अब तक की अधिगृहीत की गई सीलिंग की सभी जमीनों के मामले और उनकी मूल फाइलों की पड़ताल शुरू कर दी है। शहर में सीलिंग की जमीनों की बड़ी संख्या बताई जा रही है। इनमें से कई को लेकर कोर्ट में केस चल रहे हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि कोर्ट से जुड़े मामलों को छोड़ अगर प्रशासन ने बाकी मामलों की सख्ती से जांच की तो करोड़ों का घोटाला सामने आ सकता है।
बशारतपुर की करीब 11 हजार वर्ग मीटर जमीन को लेकर 2008 में हाईकोर्ट में दाखिल एक याचिका विजय नाथ यादव व अन्य बनाम उप्र राज्य के मामले में जमीन से जुड़ी मूल फाइलें गायब होने पर जिला प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। प्रशासन की तरफ से इस मामले में शुक्रवार को कैंट थाने में अर्बन सीलिंग कार्यालय के सेवानिवृत्त कर्मचारी भूपेंद्र सहाय, सेवानिवृत्त नोडल अधिकारी पीयूष पांडेय, अर्बन सीलिंग कार्यालय में तत्कालीन टाइपिस्ट व पेशकार बच्छलाल, तत्कालीन जिला शासकीय अधिवक्ता समरजीत सिंह समेत कई अज्ञात के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई। फाइलें गायब होने की जानकारी प्रशासन को तब हुई जब हाई कोर्ट ने सीलिंग की संबंधित जमीन के मूल दस्तावेजों के साथ डीएम को शनिवार को कोर्ट बुलाया था।
इसके बाद से ही प्रशासन हरकत में आया। डीएम के. विजयेेंद्र पांडियन ने एडीएम प्रशासन, एसडीएम सदर व ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की। कमेटी की प्रारंभिक जांच में ही संबंधित कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज हुआ। अब कमेटी सभी मामलों की जांच कर रही।
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1999 से पहले की हैं जमीनें, कई और की फंसेगी गर्दन
अर्बन सीलिंग की जितनी भी जमीनें अधिगृहीत हुईं वह सब 1999 के पहले की हैं। करीब 25 से 30 साल के बीच बड़े पैमाने पर प्रशासन ने ऐसी जमीनों का अधिग्रहण किया। वर्तमान में उनकी कीमत अरबों की है। अब ऐसे सभी मामलों से जुड़ी मूल फाइलें तलाशी जाएंगी। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक कुछ और जमीनों की मूल फाइलें बहुत पहले ही गायब कर दी गईं हैं। ऐसे में उस समय अर्बन सीलिंग में तैनात कुछ और कर्मचारियों की गर्दन भी फंस सकती है।
पहले ही झटके में फंस गए बड़े खिलाड़ी
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक 2005 में तैनात तत्कालीन शासकीय अधिवक्ता के अलावा जिन तीन कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज हुआ है, वे सभी सीलिंग की जमीनों से जुड़े खेल के बड़े खिलाड़ी बताए जा रहे हैं। अगर इनसे कायदे से पूछताछ हुई तो कई और बड़े खेल से पर्दा उठ सकता है।
जंगल मातादीन, तुलसीराम, शाहपुर में ज्यादा जमीनें
शहर में सीलिंग की सर्वाधिक जमीनें जंगल मातादीन, जंगल तुलसीराम, शाहपुर, बशारतपुर और शहरी सीमा वाले इलाकों में ही ज्यादा हैं। दरअसल शहर का जैसे-जैसे विस्तार हुआ, ग्रामीण क्षेत्र की तमाम ऐसी जमीनें मिली जो अतिरिक्त थी यानी उनपर किसी का दावा नहीं था।
कोट---
जांच कमेटी की प्रारंभिक जांच में दोषी पाए जाने पर अभी चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। विस्तृत जांच अभी जारी है। करीब 30 साल में अधिगृहीत हुई सभी अर्बन सीलिंग से जुड़ी जमीनों की मूल फाइलों और मामलों की जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
- राकेश श्रीवास्तव, एडीएम सिटी व प्रभारी अर्बन सीलिंग
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गोरखपुर । बशारतपुर में अर्बन सीलिंग की बेशकीमती जमीन से जुड़ी मूल फाइलें ही गायब हो जाने की घटना सामने आने के बाद जांच कमेटी ने इस मामले के साथ ही साथ अब तक की अधिगृहीत की गई सीलिंग की सभी जमीनों के मामले और उनकी मूल फाइलों की पड़ताल शुरू कर दी है। शहर में सीलिंग की जमीनों की बड़ी संख्या बताई जा रही है। इनमें से कई को लेकर कोर्ट में केस चल रहे हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि कोर्ट से जुड़े मामलों को छोड़ अगर प्रशासन ने बाकी मामलों की सख्ती से जांच की तो करोड़ों का घोटाला सामने आ सकता है।
बशारतपुर की करीब 11 हजार वर्ग मीटर जमीन को लेकर 2008 में हाईकोर्ट में दाखिल एक याचिका विजय नाथ यादव व अन्य बनाम उप्र राज्य के मामले में जमीन से जुड़ी मूल फाइलें गायब होने पर जिला प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। प्रशासन की तरफ से इस मामले में शुक्रवार को कैंट थाने में अर्बन सीलिंग कार्यालय के सेवानिवृत्त कर्मचारी भूपेंद्र सहाय, सेवानिवृत्त नोडल अधिकारी पीयूष पांडेय, अर्बन सीलिंग कार्यालय में तत्कालीन टाइपिस्ट व पेशकार बच्छलाल, तत्कालीन जिला शासकीय अधिवक्ता समरजीत सिंह समेत कई अज्ञात के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई। फाइलें गायब होने की जानकारी प्रशासन को तब हुई जब हाई कोर्ट ने सीलिंग की संबंधित जमीन के मूल दस्तावेजों के साथ डीएम को शनिवार को कोर्ट बुलाया था।
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इसके बाद से ही प्रशासन हरकत में आया। डीएम के. विजयेेंद्र पांडियन ने एडीएम प्रशासन, एसडीएम सदर व ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की। कमेटी की प्रारंभिक जांच में ही संबंधित कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज हुआ। अब कमेटी सभी मामलों की जांच कर रही।
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1999 से पहले की हैं जमीनें, कई और की फंसेगी गर्दन
अर्बन सीलिंग की जितनी भी जमीनें अधिगृहीत हुईं वह सब 1999 के पहले की हैं। करीब 25 से 30 साल के बीच बड़े पैमाने पर प्रशासन ने ऐसी जमीनों का अधिग्रहण किया। वर्तमान में उनकी कीमत अरबों की है। अब ऐसे सभी मामलों से जुड़ी मूल फाइलें तलाशी जाएंगी। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक कुछ और जमीनों की मूल फाइलें बहुत पहले ही गायब कर दी गईं हैं। ऐसे में उस समय अर्बन सीलिंग में तैनात कुछ और कर्मचारियों की गर्दन भी फंस सकती है।
पहले ही झटके में फंस गए बड़े खिलाड़ी
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक 2005 में तैनात तत्कालीन शासकीय अधिवक्ता के अलावा जिन तीन कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज हुआ है, वे सभी सीलिंग की जमीनों से जुड़े खेल के बड़े खिलाड़ी बताए जा रहे हैं। अगर इनसे कायदे से पूछताछ हुई तो कई और बड़े खेल से पर्दा उठ सकता है।
जंगल मातादीन, तुलसीराम, शाहपुर में ज्यादा जमीनें
शहर में सीलिंग की सर्वाधिक जमीनें जंगल मातादीन, जंगल तुलसीराम, शाहपुर, बशारतपुर और शहरी सीमा वाले इलाकों में ही ज्यादा हैं। दरअसल शहर का जैसे-जैसे विस्तार हुआ, ग्रामीण क्षेत्र की तमाम ऐसी जमीनें मिली जो अतिरिक्त थी यानी उनपर किसी का दावा नहीं था।
कोट---
जांच कमेटी की प्रारंभिक जांच में दोषी पाए जाने पर अभी चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। विस्तृत जांच अभी जारी है। करीब 30 साल में अधिगृहीत हुई सभी अर्बन सीलिंग से जुड़ी जमीनों की मूल फाइलों और मामलों की जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
- राकेश श्रीवास्तव, एडीएम सिटी व प्रभारी अर्बन सीलिंग