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ग्रामीण क्लब बनाकर बढ़ाएंगे वैज्ञानिक सोच
डॉ. राकेश राय, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Fri, 26 Aug 2016 12:55 AM IST
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महादेव पांडेय
- फोटो : amar ujala
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विज्ञान की नई उपलब्धियां और नीतियां जन-जन तक पहुंचे, इसके लिए प्रदेश के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने एक अभिनव पहल की है। विभाग ने गांव-गांव में ‘ग्रामीण विज्ञान क्लब’ बनाने की योजना बनाई है, जो वैज्ञानिक उपलब्धियों से ग्रामीणों को उनकी भाषा और संस्कृति से जोड़कर रूबरू कराएगा। यह कार्य सहजता से हो सके, इसके लिए गांव के ही जागरूक और सक्रिय लोगाें को क्लब में शामिल किया जाएगा।
योजना शुरू करने के पीछे विभाग का तर्क है कि वैज्ञानिक अभिरुचि से जुड़े बहुत से ऐसे तथ्य हैं, जो अगर लोगों तक पहुंचे तो न केवल उनमें वैज्ञानिक सोच विकसित होगी बल्कि वे उसका लाभ उठाकर रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकते हैं। लेकिन समस्या इन तथ्यों को लोगों तक पहुंचाने की है। यह तभी संभव है जब उनके बीच से ही बातों को रखा जाए। ग्रामीण विज्ञान क्लब में गांव के ही जागरूक लोगों को शामिल कर यह कार्य आसानी से किया जा सकता है।
योजना के मुताबिक, क्लब में गांव के ही 12 लोगों को शामिल किया जाएगा। इनमें शिक्षित बेरोजगारों, वैज्ञानिक खेती करने वाले किसानों, विज्ञान शिक्षक और जागरूक महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। समय के साथ सदस्यों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर होगा। ग्राम प्रधानों को क्लब से जोड़ने की अनिवार्य कोशिश होगी। क्लब के सदस्य अपनी क्षमता से समय-समय पर गांव वालों को किसी स्थान पर इकट्ठा करेंगे और उनमें विज्ञान के प्रति जागरूकता और लोकप्रियता पैदा करने के लिए संवाद कायम करेंगे। इस कार्य में मदद के लिए खंड विकास अधिकारी की भी जिम्मेदारी तय की गई है।
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गांवों में विज्ञान क्लब बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 650 से अधिक ग्राम सभाओं में कार्य चल रहा है। सदस्यों के पंजीकरण के दौरान उनसे गांव के वैज्ञानिक विकास का फीडबैक भी लिया जा रहा है, जिससे उनमें वैज्ञानिक सोच की स्थिति की जानकारी मिल सके। इससे ग्रामीणों में अभिरुचि पैदा करने की दिशा में आसानी से कार्य हो सकेगा।
- महादेव पांडेय, वैज्ञानिक अधिकारी, क्षेत्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र
अंधविश्वास कम होगा, प्रतिभाएं सामने आएंगी
कई ऐसे वैज्ञानिक चमत्कार, जिन्हें गांवों में अंधविश्वास के तौर पर लिया जाता है। इससे इन चमत्कारों का ग्रामीण सही इस्तेमाल नहीं कर पाते। क्लब इन अंधविश्वासों से उबार कर उन्हें विज्ञान की ताकत से रूबरू कराएगा। साथ ही गांव में छिपी उन वैज्ञानिक प्रतिभाओं को आगे आने का अवसर मिलेगा, जिनकी प्रतिभाएं मंच न मिल पाने के चलते दबी रह जाती हैं।
- प्रो. वीबी उपाध्याय, वैज्ञानिक
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योजना शुरू करने के पीछे विभाग का तर्क है कि वैज्ञानिक अभिरुचि से जुड़े बहुत से ऐसे तथ्य हैं, जो अगर लोगों तक पहुंचे तो न केवल उनमें वैज्ञानिक सोच विकसित होगी बल्कि वे उसका लाभ उठाकर रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकते हैं। लेकिन समस्या इन तथ्यों को लोगों तक पहुंचाने की है। यह तभी संभव है जब उनके बीच से ही बातों को रखा जाए। ग्रामीण विज्ञान क्लब में गांव के ही जागरूक लोगों को शामिल कर यह कार्य आसानी से किया जा सकता है।
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योजना के मुताबिक, क्लब में गांव के ही 12 लोगों को शामिल किया जाएगा। इनमें शिक्षित बेरोजगारों, वैज्ञानिक खेती करने वाले किसानों, विज्ञान शिक्षक और जागरूक महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। समय के साथ सदस्यों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर होगा। ग्राम प्रधानों को क्लब से जोड़ने की अनिवार्य कोशिश होगी। क्लब के सदस्य अपनी क्षमता से समय-समय पर गांव वालों को किसी स्थान पर इकट्ठा करेंगे और उनमें विज्ञान के प्रति जागरूकता और लोकप्रियता पैदा करने के लिए संवाद कायम करेंगे। इस कार्य में मदद के लिए खंड विकास अधिकारी की भी जिम्मेदारी तय की गई है।
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गांवों में विज्ञान क्लब बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 650 से अधिक ग्राम सभाओं में कार्य चल रहा है। सदस्यों के पंजीकरण के दौरान उनसे गांव के वैज्ञानिक विकास का फीडबैक भी लिया जा रहा है, जिससे उनमें वैज्ञानिक सोच की स्थिति की जानकारी मिल सके। इससे ग्रामीणों में अभिरुचि पैदा करने की दिशा में आसानी से कार्य हो सकेगा।
- महादेव पांडेय, वैज्ञानिक अधिकारी, क्षेत्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र
अंधविश्वास कम होगा, प्रतिभाएं सामने आएंगी
कई ऐसे वैज्ञानिक चमत्कार, जिन्हें गांवों में अंधविश्वास के तौर पर लिया जाता है। इससे इन चमत्कारों का ग्रामीण सही इस्तेमाल नहीं कर पाते। क्लब इन अंधविश्वासों से उबार कर उन्हें विज्ञान की ताकत से रूबरू कराएगा। साथ ही गांव में छिपी उन वैज्ञानिक प्रतिभाओं को आगे आने का अवसर मिलेगा, जिनकी प्रतिभाएं मंच न मिल पाने के चलते दबी रह जाती हैं।
- प्रो. वीबी उपाध्याय, वैज्ञानिक