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एक छोटी-सी प्रेम कहानी: जो वादा किया था, निभाया भी
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कुसम्ही में खुद की जमीन पर शव दफनाता पति और लड़की के कुछ मजहबी लोग।
एक छोटी-सी प्रेम कहानी: जो वादा किया था, निभाया भी
विश्व प्रकाश शुक्ला
कुसम्ही बाजार (गोरखपुर)। यह एक कहानी है, मोहब्बत करने, बीबी की जज्बात की कद्र करने और वायदे को निभाने की। सोमवार को खोराबार इलाके में एक महिला के शव को कब्रिस्तान मेें दफनाने के विवाद के कोख से निकलकर एक ऐसी ही कहानी क्षेत्र में खुशबू की तरह फैल गई है। बीबी की ख्वाहिश थी कि जब वह इस दुनिया से रुखसत करे तो इस्लाम के मुताबिक उसकी देह दफन की जाए, पति ने उसे निभाया भी। गैर मुस्लिम से विवाह करने की सजा के तौर पर कब्रिस्तान में उसे दो गज जगह नहीं मिली तो पति ने उसे अपने खेत में दफना कर उसकी आखिरी ख्वाहिश पूरी की।
यह कहानी बहरामपुर गांव के दीना यादव और रुखसाना की है। दीना की मुलाकात करीब चार साल पहले रुखसाना से हो गई। मजहब अलग था पर मोहब्बत में दोनों ने साथ चलने की कसमें खा लीं। घरवालों को बताया तो वह विरोध में उतर गए। फिर क्या था दोनों ने एक साथ जीने का फैसला किया और शहर ही छोड़ दिया। करीब एक साल पहले दोनों ने शादी रचा ली। लेकिन, रुखसाना को धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर नहीं किया। विवाद बहुत थे, लिहाज शादी के बाद पत्नी रुखसाना को लेकर दीना मुंबई चला गया। दोनों की जिंदगी ठीक चल रही थी। दोनों की दो महीने पहले एक बच्ची पैदा हुई ,लेकिन दस दिन पहले अचानक रुखसाना की तबीयत खराब हो गई। वह उसे लेकर गोरखपुर आ गया। प्राइवेट अस्पताल में इलाज भी कराया। रुखसाना को बचाने की उसने भरपूर कोशिश की। दुर्भाग्य से इस जोड़े को किसी की नजर लग गई और छोटी-सी इस प्रेम कहानी का सोमवार को अंत हो गया। बीमारी से लड़ते-लड़ते रुखसाना ने दम तोड़ दिया। रुखसाना की आखिरी ख्वाहिश पूरी करने के लिए दीना चाहता था कि उसके मजहब के हिसाब से ही शव को दफना दिया जाए। सोमवार को कब्रिस्तान में जाकर गड्ढा खोदने लगा फिर क्या था, विरोध में पूरी भीड़ आ गई। विरोध शुरू हुआ और हिंदू से शादी होने की वजह से रुखसाना को कब्रिस्तान में दफनाने से मना कर दिया। दीना को पता था, उसने ज्यादा विरोध किया तो बात बिगड़ सकती है। इलाके का माहौल बिगड़ेगा।
उसने रुखसाना को अपनी खुद की जमीन में दफनाकर पूरे मामले को खूबसूरत मोड़ दे दिया. बीबी की आखिरी ख्वाहिश भी पूरी हो गई, इलाके में अमन चैन भी कायम रहा।
कभी मजहब आड़े नहीं आया
दीना ने बताया कि उसकी पत्नी रही तो एक साल ही साथ थी, लेकिन होली मेरे साथ मनाई और ईद मैंने उसके साथ। उसकी इच्छा यही थी कि मौत पर दफनाया जाए इस वजह से उसकी इस इच्छा को पूरा किया।
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कब्रिस्तान में लाश दफन करने को लेकर सोमवार को कुछ विवाद हो गया था। दरअसल, जिस लड़की का इंतकाल हुआ था, उसकी शादी हिंदू लड़के से हुई थी। उसे अपने धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार करना चाहिए था। लोगों का इसी बात को लेकर विरोध था। मैंने, किसी को रोका नहीं। मेरे ऊपर आरोप लगाना गलत है। गांव के कुछ लोगों ने विरोध किया था। मैं, तो सोमवार को कचहरी गया था।
मुस्ताक खान, स्थानीय निवासी
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विश्व प्रकाश शुक्ला
कुसम्ही बाजार (गोरखपुर)। यह एक कहानी है, मोहब्बत करने, बीबी की जज्बात की कद्र करने और वायदे को निभाने की। सोमवार को खोराबार इलाके में एक महिला के शव को कब्रिस्तान मेें दफनाने के विवाद के कोख से निकलकर एक ऐसी ही कहानी क्षेत्र में खुशबू की तरह फैल गई है। बीबी की ख्वाहिश थी कि जब वह इस दुनिया से रुखसत करे तो इस्लाम के मुताबिक उसकी देह दफन की जाए, पति ने उसे निभाया भी। गैर मुस्लिम से विवाह करने की सजा के तौर पर कब्रिस्तान में उसे दो गज जगह नहीं मिली तो पति ने उसे अपने खेत में दफना कर उसकी आखिरी ख्वाहिश पूरी की।
यह कहानी बहरामपुर गांव के दीना यादव और रुखसाना की है। दीना की मुलाकात करीब चार साल पहले रुखसाना से हो गई। मजहब अलग था पर मोहब्बत में दोनों ने साथ चलने की कसमें खा लीं। घरवालों को बताया तो वह विरोध में उतर गए। फिर क्या था दोनों ने एक साथ जीने का फैसला किया और शहर ही छोड़ दिया। करीब एक साल पहले दोनों ने शादी रचा ली। लेकिन, रुखसाना को धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर नहीं किया। विवाद बहुत थे, लिहाज शादी के बाद पत्नी रुखसाना को लेकर दीना मुंबई चला गया। दोनों की जिंदगी ठीक चल रही थी। दोनों की दो महीने पहले एक बच्ची पैदा हुई ,लेकिन दस दिन पहले अचानक रुखसाना की तबीयत खराब हो गई। वह उसे लेकर गोरखपुर आ गया। प्राइवेट अस्पताल में इलाज भी कराया। रुखसाना को बचाने की उसने भरपूर कोशिश की। दुर्भाग्य से इस जोड़े को किसी की नजर लग गई और छोटी-सी इस प्रेम कहानी का सोमवार को अंत हो गया। बीमारी से लड़ते-लड़ते रुखसाना ने दम तोड़ दिया। रुखसाना की आखिरी ख्वाहिश पूरी करने के लिए दीना चाहता था कि उसके मजहब के हिसाब से ही शव को दफना दिया जाए। सोमवार को कब्रिस्तान में जाकर गड्ढा खोदने लगा फिर क्या था, विरोध में पूरी भीड़ आ गई। विरोध शुरू हुआ और हिंदू से शादी होने की वजह से रुखसाना को कब्रिस्तान में दफनाने से मना कर दिया। दीना को पता था, उसने ज्यादा विरोध किया तो बात बिगड़ सकती है। इलाके का माहौल बिगड़ेगा।
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उसने रुखसाना को अपनी खुद की जमीन में दफनाकर पूरे मामले को खूबसूरत मोड़ दे दिया. बीबी की आखिरी ख्वाहिश भी पूरी हो गई, इलाके में अमन चैन भी कायम रहा।
कभी मजहब आड़े नहीं आया
दीना ने बताया कि उसकी पत्नी रही तो एक साल ही साथ थी, लेकिन होली मेरे साथ मनाई और ईद मैंने उसके साथ। उसकी इच्छा यही थी कि मौत पर दफनाया जाए इस वजह से उसकी इस इच्छा को पूरा किया।
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कब्रिस्तान में लाश दफन करने को लेकर सोमवार को कुछ विवाद हो गया था। दरअसल, जिस लड़की का इंतकाल हुआ था, उसकी शादी हिंदू लड़के से हुई थी। उसे अपने धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार करना चाहिए था। लोगों का इसी बात को लेकर विरोध था। मैंने, किसी को रोका नहीं। मेरे ऊपर आरोप लगाना गलत है। गांव के कुछ लोगों ने विरोध किया था। मैं, तो सोमवार को कचहरी गया था।
मुस्ताक खान, स्थानीय निवासी