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बरहज विधायक और बरहज विधायक और डीएम में नोकझोंकडीएम में नोंकझोंक
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बरहज विधायक और डीएम में नोकझोंक
गोरखपुर। अंडरग्राउंड केबलिंग में भ्रष्टाचार के मामले में कार्यदायी संस्था एसटी इलेक्ट्रिकल्स को काली सूची में डालने को लेकर बरहज से भाजपा विधायक सुरेश तिवारी और डीएम के. विजयेंद्र पांडियन में बुधवार को नोकझोंक हो गई। विधायक कार्यदायी संस्था को काली सूची में डालने पर नाराज थे। उन्होंने इसपर आपत्ति दर्ज कराई जबकि डीएम का कहना था कि शासन से निर्देश के बाद जांच कराई गई थी। जांच में खामी मिलने पर शासन स्तर से ही कार्रवाई हुई। उन्हें अगर कोई आपत्ति है तो वे निगम के चेयरमैन और शासन स्तर पर बात कर सकते हैं।
विधायक का कहना था कि बिना कार्य पूरा हुए ही फर्म पर कैसे कार्रवाई हो सकती है। बताया जा रहा है कि जिस फर्म पर कार्रवाई हुई है वह विधायक के नजदीकी रिश्तेदार की है। इस मामले में विधायक से संपर्क साधने की कोशिश की गई मगर उनका फोन नहीं उठा। उनका पक्ष आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा। वहीं डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि विधायक सुरेश तिवारी कार्यालय में मिलने आए थे। विधायक दोबारा जांच कराने की बात कहते हुए जांच पर सवाल खड़े कर रहे थे। उन्हें बताया गया कि जांच में कार्य की गुणवत्ता बहुत खराब थी जिसपर कार्रवाई र्हुई। इसपर वह नाराज हो गए।
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गोरखपुर। अंडरग्राउंड केबलिंग में भ्रष्टाचार के मामले में कार्यदायी संस्था एसटी इलेक्ट्रिकल्स को काली सूची में डालने को लेकर बरहज से भाजपा विधायक सुरेश तिवारी और डीएम के. विजयेंद्र पांडियन में बुधवार को नोकझोंक हो गई। विधायक कार्यदायी संस्था को काली सूची में डालने पर नाराज थे। उन्होंने इसपर आपत्ति दर्ज कराई जबकि डीएम का कहना था कि शासन से निर्देश के बाद जांच कराई गई थी। जांच में खामी मिलने पर शासन स्तर से ही कार्रवाई हुई। उन्हें अगर कोई आपत्ति है तो वे निगम के चेयरमैन और शासन स्तर पर बात कर सकते हैं।
विधायक का कहना था कि बिना कार्य पूरा हुए ही फर्म पर कैसे कार्रवाई हो सकती है। बताया जा रहा है कि जिस फर्म पर कार्रवाई हुई है वह विधायक के नजदीकी रिश्तेदार की है। इस मामले में विधायक से संपर्क साधने की कोशिश की गई मगर उनका फोन नहीं उठा। उनका पक्ष आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा। वहीं डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि विधायक सुरेश तिवारी कार्यालय में मिलने आए थे। विधायक दोबारा जांच कराने की बात कहते हुए जांच पर सवाल खड़े कर रहे थे। उन्हें बताया गया कि जांच में कार्य की गुणवत्ता बहुत खराब थी जिसपर कार्रवाई र्हुई। इसपर वह नाराज हो गए।
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