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महराजगंज लाया गया शहीद पंकज त्रिपाठी का पार्थिव शरीर, अंतिम दर्शन करने उमड़ा जन सैलाब
Sat, 16 Feb 2019 02:30 PM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महाराजगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महाराजगंज
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 16 Feb 2019 02:30 PM IST
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शहीद पंकज त्रिपाठी का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा
- फोटो : अमर उजाला
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पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए पंकज त्रिपाठी का पार्थिव शरीर महराजगंज लाया गया। इस दौरान उनके गांव में जनसैलाब उमड़ पड़ा। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है।
शहीद पंकज त्रिपाठी के बूढ़े पिता ओमप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि कलेजे का टुकड़ा हमें छोड़ गया इस बात का गम है, लेकिन जाते-जाते हमारा मस्तक फख्र से ऊंचा कर गया। उसकी यादें हमें हमेशा रुलाती रहेंगी, लेकिन इस बात का संतोष रहेगा कि बेटा देश के काम आया। इतना कहते ही वो फफक कर रो पड़े।
रुंधे गले से बस इतना कहा कि अब तो पंकज के बच्चे की चिंता सता रही है। न जाने उनकी पढ़ाई-लिखाई अब कैसे होगी। जिले के हरपुर निवासी ओमप्रकाश त्रिपाठी के बड़े बेटे पंकज त्रिपाठी की शादी 2010 में सोहरवलिया कला में हुई थी।
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उनका चार साल का बेटा प्रतीक है। पंकज 2012 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। छोटा भाई शुभम त्रिपाठी स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं। पंकज भाई को सिविल सेवा में भेजने का सपना देखते थे।
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शहीद पंकज त्रिपाठी के बूढ़े पिता ओमप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि कलेजे का टुकड़ा हमें छोड़ गया इस बात का गम है, लेकिन जाते-जाते हमारा मस्तक फख्र से ऊंचा कर गया। उसकी यादें हमें हमेशा रुलाती रहेंगी, लेकिन इस बात का संतोष रहेगा कि बेटा देश के काम आया। इतना कहते ही वो फफक कर रो पड़े।
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रुंधे गले से बस इतना कहा कि अब तो पंकज के बच्चे की चिंता सता रही है। न जाने उनकी पढ़ाई-लिखाई अब कैसे होगी। जिले के हरपुर निवासी ओमप्रकाश त्रिपाठी के बड़े बेटे पंकज त्रिपाठी की शादी 2010 में सोहरवलिया कला में हुई थी।
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उनका चार साल का बेटा प्रतीक है। पंकज 2012 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। छोटा भाई शुभम त्रिपाठी स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं। पंकज भाई को सिविल सेवा में भेजने का सपना देखते थे।
वे शहर में एक छोटा सा मकान बनवाना चाहते थे, जिससे कि परिवार वहां रह सके और बेटे प्रतीक को अच्छी शिक्षा मिल सके। कुछ दिन पूर्व वह छुट्टी पर घर आए थे। रविवार की रात 10 बजे वह ड्यूटी ज्वाइंन करने के लिए घर से निकले थे। शुक्रवार सुबह जब पिता को बेटे के शहीद होने की सूचना मिली तो परिवार पर विपत्ति का पहाड़ टूट गया।
पापा को फोन करने की जिद कर रहा प्रतीक
चार साल के मासूम प्रतीक कुछ समझ नहीं पा रहा। वह बार-बार अपने दादा से पूछ रहा है कि क्या हो गया। प्रतीक को जब कहीं से कोई जवाब नहीं मिला तो वह दादा से जिद करने लगा कि उसके पिता से फोन पर बात कराएं। अब दादा उसे कैसे समझाएं कि वह जिससे बातें करने की जिद कर रहा वह अब कभी नहीं बोलेगा।
बार-बार बेसुध हो रही है मां
मां सुशीला देवी बेटे के बिछुड़ने का गम सहन नहीं कर पा रहीं। वह बार-बार बेहोश हो रही हैं। पास-पड़ोस की महिलाएं उन्हें संभालने में लगी हुई हैं। उन्हें जब भी होश आता है तो बस एक ही बात पूछती हैं, कब आएगा मेरा लाल।
पति को याद कर फफक रही रोहिनी
रोहिनी को जैसे ही पति पंकज के शहीद होने की सूचना मिली वह बेहोश हो गई। होश में आने के बाद से उसका रो-रोकर बुरा हाल है। वह बेटे प्रतीक को गोद में लेकर पति की बातों को याद कर रही है। आंखों से आंसू की धारा बह रही है। गांव की महिलाएं उन्हें सांत्वना दे रही हैं।
पापा को फोन करने की जिद कर रहा प्रतीक
चार साल के मासूम प्रतीक कुछ समझ नहीं पा रहा। वह बार-बार अपने दादा से पूछ रहा है कि क्या हो गया। प्रतीक को जब कहीं से कोई जवाब नहीं मिला तो वह दादा से जिद करने लगा कि उसके पिता से फोन पर बात कराएं। अब दादा उसे कैसे समझाएं कि वह जिससे बातें करने की जिद कर रहा वह अब कभी नहीं बोलेगा।
बार-बार बेसुध हो रही है मां
मां सुशीला देवी बेटे के बिछुड़ने का गम सहन नहीं कर पा रहीं। वह बार-बार बेहोश हो रही हैं। पास-पड़ोस की महिलाएं उन्हें संभालने में लगी हुई हैं। उन्हें जब भी होश आता है तो बस एक ही बात पूछती हैं, कब आएगा मेरा लाल।
पति को याद कर फफक रही रोहिनी
रोहिनी को जैसे ही पति पंकज के शहीद होने की सूचना मिली वह बेहोश हो गई। होश में आने के बाद से उसका रो-रोकर बुरा हाल है। वह बेटे प्रतीक को गोद में लेकर पति की बातों को याद कर रही है। आंखों से आंसू की धारा बह रही है। गांव की महिलाएं उन्हें सांत्वना दे रही हैं।