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विनियमितीकरण न करने पर भड़के सफाई कर्मी
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 15 Feb 2017 12:37 AM IST
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नगर आयुक्त के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करते सफाइकर्मी।
- फोटो : Amar Ujala
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नगर निगम के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को पक्का न करने के विरोध में स्वायत्त शासन कर्मचारी महासंघ के बैनर तले सफाई कर्मचारियों ने मंगलवार को नगर आयुक्त के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की ओर से 3 जनवरी 2017 के शासनादेश को लागू करने की मांग की गई। पदाधिकारियों का आरोप है कि नगर निगम कर्मचारियों को पक्का न करके वित्तीय विभाग से आए पैसे का दुरुपयोग किया जा सकता है। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि आखिरकार सवा माह से टालमटोल की नीति क्यों अपनाई जा रही है?
सफाई कर्मचारी महासंघ के प्रांतीय प्रधान मोहम्मद आरिफ सिद्दीकी के नेतृत्व में सैकड़ों कर्मचारी नगर आयुक्त के दफ्तर बाहर जमा हुए। एक प्रतिनिधिमंडल नगर आयुक्त से मिला और उन्हें शासनादेश कार्रवाई करने को कहा। लेकिन सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आने पर कर्मचारी भड़क गए और बाहर आकर प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान जोरदार नारेबाजी भी की। सिद्दीकी ने बताया कि नगर निगम में 317 डेलीवेज कर्मी हैं जोकि पिछले 20-22 वर्ष से सफाई का काम कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि धरना, प्रदर्शन और कई हड़ताल जैसे संघर्ष करने के बाद शासन ने डेलीवेज कर्मियों का विनियमितीकरण करने का आदेश जारी किया है, बावजूद नगर आयुक्त की ओर से टालमटोल की नीति अपनाई जा रही है। सफाई कर्मचारी बहुत कम वेतन में गुजारा करने को मजबूर हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर आदेश को लागू नहीं किया गया तो भविष्य में संघर्ष का रुख अपनाने के लिए मजबूर होंगे।
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सफाई कर्मचारी महासंघ के प्रांतीय प्रधान मोहम्मद आरिफ सिद्दीकी के नेतृत्व में सैकड़ों कर्मचारी नगर आयुक्त के दफ्तर बाहर जमा हुए। एक प्रतिनिधिमंडल नगर आयुक्त से मिला और उन्हें शासनादेश कार्रवाई करने को कहा। लेकिन सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आने पर कर्मचारी भड़क गए और बाहर आकर प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान जोरदार नारेबाजी भी की। सिद्दीकी ने बताया कि नगर निगम में 317 डेलीवेज कर्मी हैं जोकि पिछले 20-22 वर्ष से सफाई का काम कर रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि धरना, प्रदर्शन और कई हड़ताल जैसे संघर्ष करने के बाद शासन ने डेलीवेज कर्मियों का विनियमितीकरण करने का आदेश जारी किया है, बावजूद नगर आयुक्त की ओर से टालमटोल की नीति अपनाई जा रही है। सफाई कर्मचारी बहुत कम वेतन में गुजारा करने को मजबूर हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर आदेश को लागू नहीं किया गया तो भविष्य में संघर्ष का रुख अपनाने के लिए मजबूर होंगे।
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