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दफ्तरों में ताला, कामकाज ठप
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कलेक्ट्रेट और तहसील के दफ्तरों में जड़ा ताला
गोरखपुर। पुरानी पेंशन बहाली, पदोन्नति समेत 24 मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश मिनिस्ट्रीयल कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ के आह्वान पर कलेक्ट्रेट व सभी तहसीलों के कर्मचारियों ने बुधवार को ताला बंद कर विरोध जताया। सभी कर्मचारी दिन भर दफ्तर से बाहर रहे और काम-काज पूरी तरह ठप रखा। दोपहर में कलेक्ट्रेट स्थित संघ कार्यालय भवन पर कर्मचारियों ने गेट मीटिंग की, फिर संघ के जिला मंत्री विश्वेश शुक्ला की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम के. विजयेंद्र पांडियन को सौंपा।
उत्तर प्रदेश मिनिस्ट्रियल कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ के आह्वान पर यह तीसरे चरण का आंदोलन है। संघ के पदाधिकारियों के मुताबिक 19 से 23 जुलाई तक कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर काम किया था। 23 जुलाई को ही मुख्यमंत्री को जवाबी पोस्टकार्ड भेजे गए थे। आंदोलन के तीसरे चरण में बुधवार को काम काज ठप कर विरोध जताया गया। जिसमें कलेक्ट्रेट के अलावा सदर, कैंपियरगंज, चौरीचौरा, सहजनवां, खजनी, बांसगांव और गोला तहसील के भी सभी दफ्तरों में ताला बंद कर विरोध जताया गया। इस दौरान सभी जगहों पर बैठक हुई और ज्ञापन भी दिया गया। दाधिकारियों के मुताबिक मांगें नहीं पूरी होने पर प्रदेश भर के कर्मचारी 16 सितंबर को लखनऊ में धरना-प्रदर्शन करेंगे।
कोर्ट भी बंद रहे, सैकड़ों वादकारी निराश लौटे
आंदोलन के तहत कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट में डीएम और सभी एडीएम जबकि तहसीलों में एसडीएम और तहसीलदार व नायब तहसील, सभी के कोर्ट पर भी ताला जड़ दिया। इससे सैकड़ों की संख्या में वादकारी भी निराश लौटे। डीएम के. विजयेंद्र पांडियन समेत संबंधित अफसर अपने दफ्तरों में बैठे रहे मगर कर्मचारियों के हड़ताल पर होने की वजह से वहां भी फरियादी बहुत कम पहुंचे।
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जाति-आय प्रमाण पत्र नहीं जारी हो सका
कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन की वजह से तहसीलों से जाति, आय और निवास समेत तमाम तरह के प्रमाण पत्र जारी नहीं हो सके। कई आवेदक परेशान घूमते रहे। जब दिन भर काम नहीं होने की जानकारी मिली तब वे घर लौटै। इसी तरह कोर्ट के साथ ही अभिलेखागार भी बंद होने से तमाम अधिवक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा।
क्या कहते हैं पदाधिकारी
कलेक्ट्रेट को मिनी सचिवालय घोषित करने, नायब तहसीलदार के दस फीसदी पदों पर कलेक्ट्रेट कर्मचारियों की प्रोन्नति समेत कई मांगें वित्त विभाग एवं शासन की ओर से स्वीकृत की जा चुकी हैं अब सिर्फ कैबिनेट में उनकी मंजूरी होनी है। मगर सरकार अनदेखी कर रही है।- अशोक गुप्ता, प्रांतीय संप्रेक्षक व मंडलीय अध्यक्ष उप्र मिनिस्ट्रीयल कर्मचारी संघ
लंबित मांगों को लेकर लंबे समय से लड़ाई चल रही है। इसी क्रम में बुधवार को तालाबंदी की गई। इसके बाद भी अगर सरकार हमारी मांगे नहीं मानती है तो 16 सितंबर को जीपीओ लखनऊ में विशाल धरना प्रदर्शन होगा। हम पीछे हटने वाले नहीं, अपना हक लेकर रहेंगे।- विश्वेश शुक्ल, जिला मंत्री, उप्र मिनिस्ट्रीयल कर्मचारी संघ
अपनी हक की लड़ाई को लेकर कर्मचारी एकजुट हैं। यही वजह है कि तालाबंदी का कार्यक्रम कलेक्ट्रेट से लेकर सभी तहसीलों में सफल रहा। सरकार जिन कर्मचारियों से काम लेती है, उन्हीं की समस्याओं की अनदेखी कर रही। पेंशन बंद कर नए कर्मचारियों का भविष्य असुरक्षित कर दिया गया।- विनय सिंह, कोषाध्यक्ष कचहरी क्लब, कलेक्ट्रेट
वादा करने के बाद भी शासन कर्मचारियों की मांग पूरी नहीं कर रहा। मजबूर होकर हमें आंदोलन की राह पकड़नी पड़ी। हमारी सभी मांगे जायज हैं। प्रोन्नति और वेतन विसंगति के अलावा पुरानी पेंशन बंद हो जाने से कर्मचारी बहुत परेशान हैं। मांगे पूरी होने तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी। - पुरूषोत्तम यादव, सामान्य सदस्य कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ
कोट-
कर्मचारियों की ज्यादातर मांगों का निस्तारण शासन स्तर से ही हो सकता है। स्थानीय स्तर की उनकी जो भी मांगे हैं उनका जल्द निस्तारण करा दिया जाएगा। वे समस्याओं को लेकर 24 घंटे कभी भी मुझसे मुलाकात कर सकते हैं। कर्मचारियों ने मांगों से संबंधित जो ज्ञापन दिया है उसे प्राथमिकता के आधार पर मुख्यमंत्री कार्यालय तक भेज दिया जाएगा। उनकी समस्याओं को लेकर मैं खुद भी शासन स्तर पर बात करूंगा। - के. विजयेंद्र पांडियन, डीएम गोरखपुर
मिनिस्ट्रीयल कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ की प्रमुख मांगें -
कलेक्ट्रेट का नाम मिनी या जनपद सचिवालय रखा जाए
कलेक्ट्रेट कर्मचारियों को सचिवालय कर्मचारियों के बराबर वेतन-भत्ते दिए जाएं
पुरानी पेंशन बहाल की जाए
कलेक्ट्रेट कर्मचारियों को नायब तहसीलदार के दस फीसदी पदों पर प्रोन्नति हो
कर्मचारियों का वेतन पुनरीक्षण किया जाए
पदनाम व ग्रेड पे बदला जाए
लेखा कार्य करने वाले पटल सहायकों को लेखा संवर्ग का वेतन दिया जाए
नवसृजित जनपदों एवं तहसीलों में पदों का सृजन
21 नवसृजित जनपदों में ज्येष्ठ प्रशासनिक अधिकारी व नवसृजित तहसीलों में प्रशासनिक अधिकारी का पद सृजन
भूलेख लिपिक को पूर्व की तरह कलेक्ट्रेट अधिष्ठान में वापस किया जाए
संघ कार्यालय के लिए दारूलसफा में कक्ष आवंटित किया जाए
सीजनल सहायक वासिल वाकी नवीसों के पदों के सापेक्ष शत-प्रतिशत समायोजन
300 उपर्जित अवकाश संचित करने और उनका भुगतान कराने
नवीन सीजनल सहायक वासिल वाकी नवीस की तैनाती पर लगे प्रतिबंध को तत्काल हटाया जाए
प्रोन्नत में समय सीमा की बाध्यता को तत्काल समाप्त की जाए
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गोरखपुर। पुरानी पेंशन बहाली, पदोन्नति समेत 24 मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश मिनिस्ट्रीयल कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ के आह्वान पर कलेक्ट्रेट व सभी तहसीलों के कर्मचारियों ने बुधवार को ताला बंद कर विरोध जताया। सभी कर्मचारी दिन भर दफ्तर से बाहर रहे और काम-काज पूरी तरह ठप रखा। दोपहर में कलेक्ट्रेट स्थित संघ कार्यालय भवन पर कर्मचारियों ने गेट मीटिंग की, फिर संघ के जिला मंत्री विश्वेश शुक्ला की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम के. विजयेंद्र पांडियन को सौंपा।
उत्तर प्रदेश मिनिस्ट्रियल कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ के आह्वान पर यह तीसरे चरण का आंदोलन है। संघ के पदाधिकारियों के मुताबिक 19 से 23 जुलाई तक कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर काम किया था। 23 जुलाई को ही मुख्यमंत्री को जवाबी पोस्टकार्ड भेजे गए थे। आंदोलन के तीसरे चरण में बुधवार को काम काज ठप कर विरोध जताया गया। जिसमें कलेक्ट्रेट के अलावा सदर, कैंपियरगंज, चौरीचौरा, सहजनवां, खजनी, बांसगांव और गोला तहसील के भी सभी दफ्तरों में ताला बंद कर विरोध जताया गया। इस दौरान सभी जगहों पर बैठक हुई और ज्ञापन भी दिया गया। दाधिकारियों के मुताबिक मांगें नहीं पूरी होने पर प्रदेश भर के कर्मचारी 16 सितंबर को लखनऊ में धरना-प्रदर्शन करेंगे।
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कोर्ट भी बंद रहे, सैकड़ों वादकारी निराश लौटे
आंदोलन के तहत कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट में डीएम और सभी एडीएम जबकि तहसीलों में एसडीएम और तहसीलदार व नायब तहसील, सभी के कोर्ट पर भी ताला जड़ दिया। इससे सैकड़ों की संख्या में वादकारी भी निराश लौटे। डीएम के. विजयेंद्र पांडियन समेत संबंधित अफसर अपने दफ्तरों में बैठे रहे मगर कर्मचारियों के हड़ताल पर होने की वजह से वहां भी फरियादी बहुत कम पहुंचे।
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कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन की वजह से तहसीलों से जाति, आय और निवास समेत तमाम तरह के प्रमाण पत्र जारी नहीं हो सके। कई आवेदक परेशान घूमते रहे। जब दिन भर काम नहीं होने की जानकारी मिली तब वे घर लौटै। इसी तरह कोर्ट के साथ ही अभिलेखागार भी बंद होने से तमाम अधिवक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा।
क्या कहते हैं पदाधिकारी
कलेक्ट्रेट को मिनी सचिवालय घोषित करने, नायब तहसीलदार के दस फीसदी पदों पर कलेक्ट्रेट कर्मचारियों की प्रोन्नति समेत कई मांगें वित्त विभाग एवं शासन की ओर से स्वीकृत की जा चुकी हैं अब सिर्फ कैबिनेट में उनकी मंजूरी होनी है। मगर सरकार अनदेखी कर रही है।- अशोक गुप्ता, प्रांतीय संप्रेक्षक व मंडलीय अध्यक्ष उप्र मिनिस्ट्रीयल कर्मचारी संघ
लंबित मांगों को लेकर लंबे समय से लड़ाई चल रही है। इसी क्रम में बुधवार को तालाबंदी की गई। इसके बाद भी अगर सरकार हमारी मांगे नहीं मानती है तो 16 सितंबर को जीपीओ लखनऊ में विशाल धरना प्रदर्शन होगा। हम पीछे हटने वाले नहीं, अपना हक लेकर रहेंगे।- विश्वेश शुक्ल, जिला मंत्री, उप्र मिनिस्ट्रीयल कर्मचारी संघ
अपनी हक की लड़ाई को लेकर कर्मचारी एकजुट हैं। यही वजह है कि तालाबंदी का कार्यक्रम कलेक्ट्रेट से लेकर सभी तहसीलों में सफल रहा। सरकार जिन कर्मचारियों से काम लेती है, उन्हीं की समस्याओं की अनदेखी कर रही। पेंशन बंद कर नए कर्मचारियों का भविष्य असुरक्षित कर दिया गया।- विनय सिंह, कोषाध्यक्ष कचहरी क्लब, कलेक्ट्रेट
वादा करने के बाद भी शासन कर्मचारियों की मांग पूरी नहीं कर रहा। मजबूर होकर हमें आंदोलन की राह पकड़नी पड़ी। हमारी सभी मांगे जायज हैं। प्रोन्नति और वेतन विसंगति के अलावा पुरानी पेंशन बंद हो जाने से कर्मचारी बहुत परेशान हैं। मांगे पूरी होने तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी। - पुरूषोत्तम यादव, सामान्य सदस्य कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ
कोट-
कर्मचारियों की ज्यादातर मांगों का निस्तारण शासन स्तर से ही हो सकता है। स्थानीय स्तर की उनकी जो भी मांगे हैं उनका जल्द निस्तारण करा दिया जाएगा। वे समस्याओं को लेकर 24 घंटे कभी भी मुझसे मुलाकात कर सकते हैं। कर्मचारियों ने मांगों से संबंधित जो ज्ञापन दिया है उसे प्राथमिकता के आधार पर मुख्यमंत्री कार्यालय तक भेज दिया जाएगा। उनकी समस्याओं को लेकर मैं खुद भी शासन स्तर पर बात करूंगा। - के. विजयेंद्र पांडियन, डीएम गोरखपुर
मिनिस्ट्रीयल कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ की प्रमुख मांगें -
कलेक्ट्रेट का नाम मिनी या जनपद सचिवालय रखा जाए
कलेक्ट्रेट कर्मचारियों को सचिवालय कर्मचारियों के बराबर वेतन-भत्ते दिए जाएं
पुरानी पेंशन बहाल की जाए
कलेक्ट्रेट कर्मचारियों को नायब तहसीलदार के दस फीसदी पदों पर प्रोन्नति हो
कर्मचारियों का वेतन पुनरीक्षण किया जाए
पदनाम व ग्रेड पे बदला जाए
लेखा कार्य करने वाले पटल सहायकों को लेखा संवर्ग का वेतन दिया जाए
नवसृजित जनपदों एवं तहसीलों में पदों का सृजन
21 नवसृजित जनपदों में ज्येष्ठ प्रशासनिक अधिकारी व नवसृजित तहसीलों में प्रशासनिक अधिकारी का पद सृजन
भूलेख लिपिक को पूर्व की तरह कलेक्ट्रेट अधिष्ठान में वापस किया जाए
संघ कार्यालय के लिए दारूलसफा में कक्ष आवंटित किया जाए
सीजनल सहायक वासिल वाकी नवीसों के पदों के सापेक्ष शत-प्रतिशत समायोजन
300 उपर्जित अवकाश संचित करने और उनका भुगतान कराने
नवीन सीजनल सहायक वासिल वाकी नवीस की तैनाती पर लगे प्रतिबंध को तत्काल हटाया जाए
प्रोन्नत में समय सीमा की बाध्यता को तत्काल समाप्त की जाए