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एडमिशन निरस्त करने के विरोध में प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 22 Feb 2017 02:29 AM IST
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार पर नामांकन रद्द होने के विरोध में प्रदर्शन करते दिशा छात्र संगठन के सदस्य।
- फोटो : Shivharsh Dwivedi
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गोरखपुर विश्वविद्यालय में पीजी कोर्स के 26 छात्रों का प्रवेश निरस्त किए जाने के विरोध में दिशा छात्र संगठन, भगत सिंह छात्र मोर्चा और अंबेडकरवादी छात्र सभा के सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन किया। मुख्य द्वार पर प्रदर्शन करने के बाद इन संगठनों के सदस्यों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए परिसर में मार्च निकाला और सभा की।
विश्वविद्यालय प्रवेश समिति ने पीजी कोर्स में पढ़ रहे 26 छात्रों का प्रवेश निरस्त कर दिया है। इसके विरोध में मंगलवार को प्रदर्शन करने के बाद दिशा छात्र संगठन के अंगद ने बताया कि छात्रों को जब इस बात की जानकारी हुई तबसे छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने अपनी मांग रख रहे हैं। जवाब में बताया गया कि यूनिवर्सिटी में यह नियम है कि स्नातक पास किए हुए जिन छात्रों को तीन वर्ष से ज्यादा समय हो चुका है, वे परास्नातक में प्रवेश नहीं ले सकते हैं।
लेकिन प्रवेश लेते समय विद्यार्थियों ने कोई तथ्य नहीं छिपाया। इसके बाद उन्हें एडमिशन दिया गया और उनकी परीक्षा भी करा दी गई। नियमित कक्षाओं में उपस्थित रहने और प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा देने के बाद भी प्रवेश निरस्त करने के मामले पर विश्वविद्यालय प्रशासन चुप्पी साधे हुआ है। अंगद ने कहा कि पूरे प्रकरण में यूनिवर्सिटी प्रशासन मात्र छात्रों को दोषी बताते हुए एकतरफ ा कार्रवाई की है जबकि छात्रों की फ ीस ही नहीं पूरा वर्ष भी बर्बाद हो गया है। यह यूनिवर्सिटी प्रशासन की तानाशाही का कोई पहला उदाहरण नहीं है पूर्व में भी दिशा छात्र संगठन के कार्यक्रमों को परिसर में मनमाने ढंग से रोका गया। प्रदर्शन करने वालों में मुकेश, दीपक, मनोरमा, नेहा, सर्वेश, राजकुमार, माया, विकास, प्रतिभा, आदर्श, शैलेष, पवन कुमार आदि मौजूद थे।
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विश्वविद्यालय प्रवेश समिति ने पीजी कोर्स में पढ़ रहे 26 छात्रों का प्रवेश निरस्त कर दिया है। इसके विरोध में मंगलवार को प्रदर्शन करने के बाद दिशा छात्र संगठन के अंगद ने बताया कि छात्रों को जब इस बात की जानकारी हुई तबसे छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने अपनी मांग रख रहे हैं। जवाब में बताया गया कि यूनिवर्सिटी में यह नियम है कि स्नातक पास किए हुए जिन छात्रों को तीन वर्ष से ज्यादा समय हो चुका है, वे परास्नातक में प्रवेश नहीं ले सकते हैं।
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लेकिन प्रवेश लेते समय विद्यार्थियों ने कोई तथ्य नहीं छिपाया। इसके बाद उन्हें एडमिशन दिया गया और उनकी परीक्षा भी करा दी गई। नियमित कक्षाओं में उपस्थित रहने और प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा देने के बाद भी प्रवेश निरस्त करने के मामले पर विश्वविद्यालय प्रशासन चुप्पी साधे हुआ है। अंगद ने कहा कि पूरे प्रकरण में यूनिवर्सिटी प्रशासन मात्र छात्रों को दोषी बताते हुए एकतरफ ा कार्रवाई की है जबकि छात्रों की फ ीस ही नहीं पूरा वर्ष भी बर्बाद हो गया है। यह यूनिवर्सिटी प्रशासन की तानाशाही का कोई पहला उदाहरण नहीं है पूर्व में भी दिशा छात्र संगठन के कार्यक्रमों को परिसर में मनमाने ढंग से रोका गया। प्रदर्शन करने वालों में मुकेश, दीपक, मनोरमा, नेहा, सर्वेश, राजकुमार, माया, विकास, प्रतिभा, आदर्श, शैलेष, पवन कुमार आदि मौजूद थे।
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