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बीआरडी में इमरजेंसी से लौटा दी गई गर्भवती
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 22 Jun 2016 08:26 PM IST
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मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज से मरीजों को बिना इलाज के ही लौटाने का एक और मामला सामने आया है। बुधवार को यहां गायनी विभाग की इमरजेंसी से एक गर्भवती को लौटा दिया गया। घर वालों का आरोप है कि डॉक्टर ने भर्ती करने से इन्कार करते हुए भगा दिया। इससे परेशान होकर घर वालों ने उसे प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती कराया है।
चिलुआताल थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर निवासी चंद्रिका अपनी गर्भवती पत्नी रीमा को तबीयत बिगड़ने पर चरगावां स्वास्थ्य केंद्र ले गए। मगर हालत गंभीर होने पर डॉक्टर ने उन्हें तत्काल मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। चंद्रिका ने बताया कि रीमा को लेकर वह मेडिकल कॉलेज के गायनी विभाग पहुंचे थे। मगर डॉक्टर ने इलाज करने से मना कर दिया। मिन्नतें करने पर वह नाराज हो गईं और वहां से भगा दिया। रीमा की हालत नाजुक होता देख घर वाले उसे पास के ही प्राइवेट नर्सिंग होम लेकर चले गए, जहां उसका उपचार चल रहा है।
पहले भी लौटाए गए हैं मरीज
मेडिकल कॉलेज में इलाज न मिल पाना कोई नई बात नहीं है। बीते कुछ महीनों से यह शिकायत आम होती जा रही है। अभी कुछ दिनों पहले ही देवरिया के एक मरीज को भर्ती करने से पहले इन्कार कर दिया गया था और उन्हें तीन दिन बाद बुलाया गया था। मगर जब हालत ज्याद बिगड़ने लगी तो उन्हें भर्ती तो किया गया, लेकिन इलाज में देरी होने पर उसकी मौत हो गई। इसके अलावा एड्स के एक मरीज को भी तीन दिन पहले भर्ती करने से इन्कार कर दिया गया था। उसकी भी मौत हो चुकी है। एक के बाद एक ऐसी घटनाएं आने के बावजूद अस्पताल प्रशासन कार्रवाई के नाम पर शिकायत और लीपापोती करने में ही पूरा जोर लगाता है।
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चिलुआताल थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर निवासी चंद्रिका अपनी गर्भवती पत्नी रीमा को तबीयत बिगड़ने पर चरगावां स्वास्थ्य केंद्र ले गए। मगर हालत गंभीर होने पर डॉक्टर ने उन्हें तत्काल मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। चंद्रिका ने बताया कि रीमा को लेकर वह मेडिकल कॉलेज के गायनी विभाग पहुंचे थे। मगर डॉक्टर ने इलाज करने से मना कर दिया। मिन्नतें करने पर वह नाराज हो गईं और वहां से भगा दिया। रीमा की हालत नाजुक होता देख घर वाले उसे पास के ही प्राइवेट नर्सिंग होम लेकर चले गए, जहां उसका उपचार चल रहा है।
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पहले भी लौटाए गए हैं मरीज
मेडिकल कॉलेज में इलाज न मिल पाना कोई नई बात नहीं है। बीते कुछ महीनों से यह शिकायत आम होती जा रही है। अभी कुछ दिनों पहले ही देवरिया के एक मरीज को भर्ती करने से पहले इन्कार कर दिया गया था और उन्हें तीन दिन बाद बुलाया गया था। मगर जब हालत ज्याद बिगड़ने लगी तो उन्हें भर्ती तो किया गया, लेकिन इलाज में देरी होने पर उसकी मौत हो गई। इसके अलावा एड्स के एक मरीज को भी तीन दिन पहले भर्ती करने से इन्कार कर दिया गया था। उसकी भी मौत हो चुकी है। एक के बाद एक ऐसी घटनाएं आने के बावजूद अस्पताल प्रशासन कार्रवाई के नाम पर शिकायत और लीपापोती करने में ही पूरा जोर लगाता है।
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