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बर्न वार्ड में 12 घंटे तड़पते रहे मरीज
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Updated Thu, 19 May 2016 01:20 AM IST
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बिजली कटौती
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मेडिकल कॉलेज के बर्न वार्ड में बुधवार को एक बार फिर रोगी गर्मी से उबल गए। मंगलवार की शाम चार बजे गुल हुई बिजली बुधवार सुबह चार बजे आ पाई। ऐसे में 12 घंटे तक मरीजों और तीमारदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। कॉलेज में जेनरेटर तो है मगर सबसे जरूरी बर्न वार्ड में आज तक इसका कनेक्शन ही नहीं किया गया है, जबकि अभी एक सप्ताह पहले भी ऐेसे ही हालात में तीमारदारों ने जमकर हंगामा मचाया था।
बर्न वार्ड में शाम चार बजे बिजली गुल हो गई थी। शुरू में तो मरीजों और तीमारदार ने सोचा कि थोड़ी देर में आ जाएगी मगर ऐसा न हो सका। मरीजों को तड़पता देख कई तीमारदारों को हाथ वाला पंखा खरीदना पड़ा। पूरी रात जागकर वे मरीजों को हवा करते और मेडिकल कॉलेज प्रशासन को कोसते रहे। मेडिकल स्टाफ का भी बुरा हाल था। वह भी किसी तरह से मरीजों का उपचार करने में जुटे रहे। बर्न वार्ड के अलावा न्यूरो वार्ड, वार्ड नंबर एक का भी यही हाल रहा। यहां पर भी सुबह चार बजे ही लाइट आ सकी। रात में तीन बार लाइट चंद मिनट के लिए आई जरूर, मगर ठहर न सकी।
.....
हाथ के पंखे से चलाया काम
भतीजे अच्युत को भर्ती कराया है। शाम को लाइट गई तो सोचा कि थोड़ी देर में आ ही जाएगी, मगर मरीज गर्मी से बेहाल हो गया तो हाथ पंखा खरीदकर ले आया और किसी तरह से उसे राहत दी।
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- मोहित, तीमारदार
मरीज को बहुत दिक्कत हुई
पत्नी को लेकर तीन दिन से भर्ती हूं। रात में पंखा भी नहीं चल सका। पत्नी तड़प रही थी तो बहुत कष्ट हो रहा था। किसी तरह से उसे सांत्वना देकर काम चलाया।
- अभय, तीमारदार
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बर्न वार्ड में शाम चार बजे बिजली गुल हो गई थी। शुरू में तो मरीजों और तीमारदार ने सोचा कि थोड़ी देर में आ जाएगी मगर ऐसा न हो सका। मरीजों को तड़पता देख कई तीमारदारों को हाथ वाला पंखा खरीदना पड़ा। पूरी रात जागकर वे मरीजों को हवा करते और मेडिकल कॉलेज प्रशासन को कोसते रहे। मेडिकल स्टाफ का भी बुरा हाल था। वह भी किसी तरह से मरीजों का उपचार करने में जुटे रहे। बर्न वार्ड के अलावा न्यूरो वार्ड, वार्ड नंबर एक का भी यही हाल रहा। यहां पर भी सुबह चार बजे ही लाइट आ सकी। रात में तीन बार लाइट चंद मिनट के लिए आई जरूर, मगर ठहर न सकी।
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हाथ के पंखे से चलाया काम
भतीजे अच्युत को भर्ती कराया है। शाम को लाइट गई तो सोचा कि थोड़ी देर में आ ही जाएगी, मगर मरीज गर्मी से बेहाल हो गया तो हाथ पंखा खरीदकर ले आया और किसी तरह से उसे राहत दी।
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- मोहित, तीमारदार
मरीज को बहुत दिक्कत हुई
पत्नी को लेकर तीन दिन से भर्ती हूं। रात में पंखा भी नहीं चल सका। पत्नी तड़प रही थी तो बहुत कष्ट हो रहा था। किसी तरह से उसे सांत्वना देकर काम चलाया।
- अभय, तीमारदार