{"_id":"586d0f8b4f1c1bdd69158d84","slug":"posters-hordings-are-removed","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘उतरवाइए होर्डिंग्स...नो ट्रांसफर एट ऑल’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘उतरवाइए होर्डिंग्स...नो ट्रांसफर एट ऑल’
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Thu, 05 Jan 2017 01:18 AM IST
विज्ञापन
आचार संहिता लागू होने के बाद होर्डिंग्स उतारते सूचना विभाग के लोग।
- फोटो : Shivharsh Dwivedi
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दोपहर के करीब एक बजकर 20 मिनट का वक्त। प्रदर्शनकारियों के बीच में से सीढ़ी लेकर दौड़ते सूचना विभाग के कुछ कर्मचारी डीएम दफ्तर के ठीक सामने पहुंचे और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तस्वीर वाली होर्डिंग नोचने लगे। अचानक यह नजारा देख धरना दे रहे विभिन्न संगठनों के लोग सकपका गए। एक-दूसरे से ढेरों सवालों के बीच कोई नतीजे पर पहुंचता कि तभी लाठी पटकते एक होमगार्ड ने उन्हें माजरा समझाया। बोलने लगा कि- चुनाव होए जात बा, अधिसूचना जारी हो गइल। अब न सीएम न पीएम, सबके होर्डिंग उतर जाइ।
एनआईसी बिल्डिंग स्थित निर्वाचन कार्यालय में गहमागहमी बढ़ गई। दो कर्मचारी कंप्यूटर पर आयोग की एक मेल पर आंख गड़ाए थे तो सिद्दीकी बाबू एक हाथ से इलेक्शन प्लान की फाइलें सहेजने में जुटे थे। फाइलें सरक गईं तो खीज उठे। कुर्सी खींचकर बैठते हुए दूसरे साथी को प्लास्टर लगा एक हाथ दिखाते हुए बोल पड़े- अब इसे भी अभी टूटना था।
उधर अपने दफ्तर में पानी की लंबी घूंट पीते हुए डीएम संध्या तिवारी चुनाव से जुड़ी एक फाइल पर दोबारा नजरें जमा ही रही थीं कि आधा दर्जन समर्थकों के साथ पहुंचे सपा के महासचिव नगीना साहनी ने उनका ध्यान भंग कर दिया। फाइलें बंद कर वह उनकी तरफ मुखातिब हुईं तो नमस्ते करते हुए नगीना पूर्व में किसी दिन हुई मुलाकात का हवाला देने लगे। कुछ देर की जद्दोजहद के बाद जैसे ही उन्हें यह विश्वास हो चला कि डीएम को मसला याद नहीं तो वे सीधे मुद्दे पर आ गए। पूछने लगे कि हाल ही में पिछड़ा वर्ग की 17 जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने संबंधी आदेश तहसीलों में जारी कर दिया गया कि नहीं। साथ ही यह भी आश्वस्त होना चाहा कि अधिसूचना के बाद इसमें कोई बाधा तो नहीं आएगी। मगर डीएम के जवाब ने उन्हें निराश कर दिया। डीएम ने दो टूक शब्दों में कहा कि शासन का आदेश एसडीएम तक चला गया होगा। प्रमाण पत्र के प्रोफॉर्मा में रेवन्यू बोर्ड को बदलाव करना है, इसके बाद ही प्रमाण पत्र जारी हो सकेगा।
विज्ञापन
सपाइयों के जाने के बाद एक आदमी ने छोटी सी पर्ची पकड़ाई तो डीएम बोल पड़ी- नो ट्रांसफर एट ऑल, अब लेखपाल क्या चपरासी का भी तबादला नहीं हो सकता। पर्ची लौटाते ही उनके मुंह से बरबस ही यह भी निकल पड़ा कि प्राथमिक शिक्षकों के तबादले की फाइल भी लौटा दी। बेलघाट से आई एक महिला ने दिव्यांग बेटी के लिए ट्राई साइकिल मांगी तो भी उन्होंने बेबसी जताते हुए कहा कि अब चाहकर भी वह मदद नहीं कर सकती। इसी बीच फोन पर सीईओ कार्यालय की घंटी घनघना उठी। उधर से पूछा जा रहा था कि उतारे जा रहे होर्डिंग्स की फोटो भेजने में देर क्यों हो रही। कॉल पूरी होते ही डीएम ने एडीएम फाइनेंस को फोन मिलाया और आयोग के फोन का हवाला देते हुए जल्द फोटो उपलब्ध कराने को कहा।
चंद मिनटों में आयोग के इस फोन की सूचना तमाम मातहतों में फैल गई। शायद यही वजह रही कि नगर आयुक्त, सिटी मजिस्ट्रेट, एसपी सिटी, एसडीएम सदर समेत कई अफसर शास्त्री चौक पर जुट गए। नगर आयुक्त अपनी टीम को होर्डिंग्स, बैनर, पोस्टर उतारने का रूट समझाने में मशगूल थे तो एक साथ इतने अफसरों को देख कार्रवाई के डर से टेंपो वाले खिसकने लगे थे।
विज्ञापन
एनआईसी बिल्डिंग स्थित निर्वाचन कार्यालय में गहमागहमी बढ़ गई। दो कर्मचारी कंप्यूटर पर आयोग की एक मेल पर आंख गड़ाए थे तो सिद्दीकी बाबू एक हाथ से इलेक्शन प्लान की फाइलें सहेजने में जुटे थे। फाइलें सरक गईं तो खीज उठे। कुर्सी खींचकर बैठते हुए दूसरे साथी को प्लास्टर लगा एक हाथ दिखाते हुए बोल पड़े- अब इसे भी अभी टूटना था।
विज्ञापन
उधर अपने दफ्तर में पानी की लंबी घूंट पीते हुए डीएम संध्या तिवारी चुनाव से जुड़ी एक फाइल पर दोबारा नजरें जमा ही रही थीं कि आधा दर्जन समर्थकों के साथ पहुंचे सपा के महासचिव नगीना साहनी ने उनका ध्यान भंग कर दिया। फाइलें बंद कर वह उनकी तरफ मुखातिब हुईं तो नमस्ते करते हुए नगीना पूर्व में किसी दिन हुई मुलाकात का हवाला देने लगे। कुछ देर की जद्दोजहद के बाद जैसे ही उन्हें यह विश्वास हो चला कि डीएम को मसला याद नहीं तो वे सीधे मुद्दे पर आ गए। पूछने लगे कि हाल ही में पिछड़ा वर्ग की 17 जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने संबंधी आदेश तहसीलों में जारी कर दिया गया कि नहीं। साथ ही यह भी आश्वस्त होना चाहा कि अधिसूचना के बाद इसमें कोई बाधा तो नहीं आएगी। मगर डीएम के जवाब ने उन्हें निराश कर दिया। डीएम ने दो टूक शब्दों में कहा कि शासन का आदेश एसडीएम तक चला गया होगा। प्रमाण पत्र के प्रोफॉर्मा में रेवन्यू बोर्ड को बदलाव करना है, इसके बाद ही प्रमाण पत्र जारी हो सकेगा।
विज्ञापन
सपाइयों के जाने के बाद एक आदमी ने छोटी सी पर्ची पकड़ाई तो डीएम बोल पड़ी- नो ट्रांसफर एट ऑल, अब लेखपाल क्या चपरासी का भी तबादला नहीं हो सकता। पर्ची लौटाते ही उनके मुंह से बरबस ही यह भी निकल पड़ा कि प्राथमिक शिक्षकों के तबादले की फाइल भी लौटा दी। बेलघाट से आई एक महिला ने दिव्यांग बेटी के लिए ट्राई साइकिल मांगी तो भी उन्होंने बेबसी जताते हुए कहा कि अब चाहकर भी वह मदद नहीं कर सकती। इसी बीच फोन पर सीईओ कार्यालय की घंटी घनघना उठी। उधर से पूछा जा रहा था कि उतारे जा रहे होर्डिंग्स की फोटो भेजने में देर क्यों हो रही। कॉल पूरी होते ही डीएम ने एडीएम फाइनेंस को फोन मिलाया और आयोग के फोन का हवाला देते हुए जल्द फोटो उपलब्ध कराने को कहा।
चंद मिनटों में आयोग के इस फोन की सूचना तमाम मातहतों में फैल गई। शायद यही वजह रही कि नगर आयुक्त, सिटी मजिस्ट्रेट, एसपी सिटी, एसडीएम सदर समेत कई अफसर शास्त्री चौक पर जुट गए। नगर आयुक्त अपनी टीम को होर्डिंग्स, बैनर, पोस्टर उतारने का रूट समझाने में मशगूल थे तो एक साथ इतने अफसरों को देख कार्रवाई के डर से टेंपो वाले खिसकने लगे थे।