फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   political

बांसगांव विधानसभा क्षेत्र: यहां विकास नहीं सिर्फ विरासत की बात

Thu, 21 Nov 2019 02:24 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 21 Nov 2019 02:24 AM IST
विज्ञापन
political
बांसगांव विधानसभा क्षेत्र ये है गोरखपुर-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग, जो लगभग गड्ढे में तब्दील ह?
बांसगांव विधानसभा क्षेत्र: यहां विकास नहीं सिर्फ विरासत की बात
विज्ञापन

बांसगांव विधानसभा क्षेत्र में 3.71 लाख मतदाता हैं। बांसगांव, कौड़ीराम और गगहा विकास खंड की जनता मतदान करती है। आरक्षित श्रेणी की इस सीट से पहले विधायक डॉ. विमलेश पासवान के पिता ओम प्रकाश पासवान ने राजनीति की। इसके बाद मां सुभावती पासवान ने सांसद का चुनाव जीता। विधायक के बड़े भाई कमलेश पासवान भाजपा के टिकट पर तीसरी बार चुनाव जीते हैं।
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बांसगांव विधानसभा क्षेत्र में विकास की नहीं, विरासत की बात होती है। जिससे भी बात करिए, वह विरासत पर आकर ठहर जाता है। वे कहते हैं विधायक जी की मां सांसद रही हैं। बड़े भाई ने इसी संसदीय क्षेत्र से तीसरी बार चुनाव जीता है। विधायक ने बीडीएस, एमडीएस किया है। सौम्य भी हैं। जो जब चाहे मिल सकता, लेकिन विकास के मामले में बांसगांव क्षेत्र काफी पीछे है। सड़कें बहुत खराब हैं। गोरखपुर-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर तो चलने की हिम्मत नहीं पड़ती। आप ही जाकर देखिए। गाड़ी सही सलामत नहीं रहेगी। शायद आपको याद भी होगा, एक आईएएस की कार डैमेज हो गई थी। ज्यादातर चौराहों पर सामुदायिक शौचालय नहीं है। शवदाह गृह की भी जरूरत महसूस की गई, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। कौड़ीराम विकास खंड के सहगौर गांव के सामने से आमी नदी निकलती है, बारिश में पानी बढ़ जाता है। आवागमन पूरी तरह से ठप हो जाता है, इसलिए पुल बनवाने की मांग की जा रही है। गांव के लोग बांस का पल्ला लगाकर गुजरते हैं। इससे गिरने या फिर चोट लगने की आशंका बनी रहती है। विधायक के क्षेत्र में न आने की शिकायत आम है। लोग कहते हैं कि मोदी-योगी के नाम पर वोट दिया था, अब उन्हीं से विकास की उम्मीद भी है।
विज्ञापन

छुट्टा पशु बर्बाद कर रहे फसल
आपको बताऊं क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या छुट्टा पशु हैं। झुंड में छुट्टा पशु आते और फसलें बर्बाद करके चले जाते हैं। कई बार पशु सड़क दुर्घटना के कारण बनते हैं। ऐसा लगता है विधायक जी सब कुछ जानकार चुप हैं। मैं तो 10 में से एक भी नंबर नहीं दूंगा। वह क्षेत्र में कम रहते हैं, यह बात क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति बता देगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

संत कुमार, लगुनही
सड़क ऐसी, जिसपर यात्रा कठिन
गोरखपुर-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग का ज्यादातर हिस्सा बांसगांव विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है। नौसड़ से बड़हलगंज के बीच 60 किलोमीटर सड़क ऐसी है, जिसपर यात्रा करना कठिन है। शायद आपको पता भी होगा। इस सड़क पर यात्रा के दौरान एक आईएएस की कार डैमेज हो गई थी। क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या को लेकर क्षेत्रीय विधायक कभी सड़क पर नहीं उतरे। बेलीपार क्षेत्र की ही 20 ग्राम पंचायतों की जनता परेशान है। फिर भी आप पूछ रहे हैं कि कितना नंबर देंगे ?
चंद्रशेखर जायसवाल, डवरपार
विधायी दायित्व निभाने में भी कमी
विधायक जी अपना विधायी उत्तरदायित्व भी नहीं निभा रहे हैं। ढाई साल का कार्यकाल बीत गया। कभी नहीं सुना कि विधायक जी ने क्षेत्रवासियों या फिर किसानों से संबंधित किसी मामले को विधानसभा में उठाया है। छुट्टा पशु फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। मुख्यमंत्री भी कई बार कह चुके हैं कि छुट्टा पशुओं को कान्हा उपवन में रखवाया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। विधायक अपना कार्यकाल पूरा करके, फिर नए वादे के साथ चुनाव मैदान में आएंगे। अभी की जो स्थिति है, उसमें 10 में से 4 नंबर दे सकता हूं।
अंबिद सिंह, मंझरिया टोला ग्राम पंचायत हटवा
मोदी-योगी के नाम पर मतदान किया
आपको सही बात बताऊं। विधानसभा चुनाव में मोदी-योगी के नाम पर मतदान किया था। राप्ती नदी की जलधारा गलत तरीके से मोड़ी जा रही है। कई गांवों का अस्तित्व खतरे में है। प्रलंयकारी योजना का विरोध हो रहा है। इसकी जानकारी विधायक को है, लेकिन वह समस्या के समाधान के लिए आगे नहीं आए। जो व्यक्ति समस्या के समाधान में रुचि न ले, उससे विकास की उम्मीद कैसे की जा सकती है ? मैं उन्हें नंबर देने की सोच भी नहीं सकता।
राजेश शुक्ल, मझिगावां
सुख-दुख में भी नहीं आते विधायक जी
देखिए, चुनाव जीतने के बाद विधायक जी को क्षेत्र में नहीं देखा है। मुझे याद नहीं है कि वह किसी व्यक्ति के सुख-दुख में पहुंच पाए हैं। एक बात और। वह ज्यादातर गोरखपुर शहर में रहते हैं। क्षेत्र में समस्याएं बेहिसाब हैं। चारों तरफ गंदगी के ढेर लगे हैं। तमाम लोग ऐसे हैं, जिन्हें अभी शौचालय नहीं मिला। सब खुले में शौच करने जाते हैं। विधायक हैं फेल तो नहीं करूंगा। हां, एक नंबर दे देता हूं।
कन्हैयालाल चौरसिया, कौड़ीराम
वादा भूल गए
सुनो लल्ला। चुनाव से पहले विधायक जी आए थे। बोले थे कि कौड़ीराम के लोगों को जाम की समस्या से निजात दिलाई जाएगी। नाली, सड़क और शौचालय की व्यवस्था बेहतर होगी। ये वादे कोरे साबित हो चुके हैं। विधायक जी अपने बिजनेस में व्यस्त रहते हैं। वह क्षेत्र और वहां के लोगों को कम समय दे पाते हैं। ऐसे में विकास की उम्मीद कैसे पूरी हो सकती है ? जनप्रतिनिधि हैं, इसलिए भारी मन से 10 में से दो नंबर दे रहा हूं।
ईश्वरचंद्र मद्धेशिया, कौड़ीराम
पेयजल का संकट जबरदस्त
बांसगांव विधानसभा क्षेत्र में तीन नदियां हैं, फिर भी पेयजल का संकट है। ज्यादातर क्षेत्रों का पेयजल दूषित है। क्षेत्र में पानी की टंकी बनाई जरूर गई, लेकिन आपूर्ति नहीं शुरू हुई। विधायक जी बात-व्यवहार से अच्छे हैं। जो उनके दरवाजे पर जाता है, उसे पूरा सम्मान मिलता है। मार्किंग दिलदारी से होनी चाहिए। यदि कम नंबर देंगे तो नाइंसाफी होगी। 10 में से 8 नंबर दे सकता हूं।
मनोज सिंह, बांसगांव
जनप्रतिनिधि क्षेत्र में न आए तो दुख की बात
हमने तो योगी और मोदी के नाम पर मतदान किया था। दुख की बात है कि चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि क्षेत्र में नहीं आए। ऐसे में विकास की उम्मीद कैसे की जा सकती है ? अगले चुनाव में दूसरा विकल्प खुला रहेगा, फिर किसी नेता के नाम पर मतदान करने की गलती नहीं करेंगे। बेहद निराशाजनक प्रदर्शन है। मार्क्स कैसे दूं, यह समझ ही नहीं पा रहा हूं।
धर्मेंद्र शुक्ल, कनईल
------------------------------------
विधायक की बात
सवाल: आरोप है कि राजनीति विरासत में मिली, इसलिए आप क्षेत्र में नहीं आते हैँ?
जवाब: आरोप निराधार हैं। परिवार के लोग बांसगांव क्षेत्र की जनता की सेवा पिछले 40-42 साल से कर रहे हैं। कोई फोन कर भर दे। पूरा परिवार खड़ा हो जाता है। जनता भी स्नेह करती है। पहले मां, फिर भाई और अब मैं भी इसी क्षेत्र की जनता के आशीर्वाद से जनप्रतिनिधि बना हूं। जनता की सेवा में किसी तरह की कोई कोर कसर नहीं रहती है। बड़े भाई सांसद हैं। उनके सहयोग से 100 फीसदी बेहतर करने की कोशिश करते हैं। इसका नतीजा भी दिख रहा है। बिजली, पानी, सड़क और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत अच्छा काम हुआ है।
सवाल: आप अपनी कुछ उपलब्धियां बताएंगे क्या?
जवाब: जी जरूर। आप लिखते जाइए। इस क्षेत्र को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विशेष आशीर्वाद मिला है। एनएच-29 का निर्माण कार्य चल रहा है। बांसगांव से कौड़ीराम, कौड़ीराम से गोला की सड़क और कुसमौल से बांसगांव की सड़क अच्छी हो गई। चंदाघाट पुल का शिलान्यास मुख्यमंत्री ने कर दिया है। निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। जल्द ही पुल बनकर तैयार हो जाएगा। सोहगौरा बंधे पर सड़क बनवा दी है। ऐसा आजादी के बाद हुआ। आप कौड़ीराम और बांसगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को ही देख लीजिए। ग्रामीण क्षेत्र के इन स्वास्थ्य केंद्रों की ओपीडी जबरदस्त है।
सवाल- आप पढ़े-लिखे और सौम्य हैं, लेकिन विकास के मोर्चे पर जनता बहुत अच्छे नंबर देने को तैयार नहीं है, ऐसा क्यों?
जवाब- देखिए, सबके अपने विचार होते हैं। मायने रखता है कि आपने कितने लोगों से बात की है। 10 व्यक्ति या फिर 40 हजार लोगों से। 40 हजार लोगों की जो राय आएगी, वह सही हो सकती है। कम सैंपलिंग पर निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं रहता है। हर व्यक्ति के अपने विचार होते हैं। सब अपनी राय रखने के लिए स्वतंत्र भी रहते हैं। मेरी नियत साफ है। कुछ कमियां हो सकती है, जिसे दूर करने की कोशिश करूंगा।
सवाल- विधायक निधि का इस्तेमाल कहां करते हैं?
जवाब: विधायक निधि के सालाना दो करोड़ रुपये मिलते हैं। इसका सही इस्तेमाल करते हैं। जो क्षेत्र अत्याधिक पिछड़े हैं, वहां नाली, सड़क और खड़ंजा का काम कराते हैं। पेयजल, बिजली की व्यवस्था बेहतर हो, ये भी सुनिश्चित कराते हैं। यह काम सतत चलता है।
सवाल: आरोप है कि आप विधायी जिम्मेदारियों का निर्वहन भी ठीक से नहीं कर रहे हैं?
जवाब: ऐसा नहीं है। क्षेत्र से जुड़े सबसे ज्यादा मामले विधानसभा में उठाए हैं। इसके रिकार्ड उपलब्ध हैं। जनता की सेवा के प्रति समर्पित हैं। यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। किसी के आरोप-प्रत्यारोप से कोई फर्क नहीं पड़ता है। जनता के प्रति जवाबदेही को हम अच्छी तरह से समझते हैं।

-----------------------------
विपक्ष की बात
विरासत में मिली सीट, इसलिए काम में रुचि नहीं
बांसगांव क्षेत्र की जनता ने विधायक के परिवार को बहुत दिया लेकिन बदले में उन्हें कुछ नहीं मिल सका। पहले पिता ने राजनीति की, फिर मां सांसद बन गईं। भाई तीसरी बार सांसद बने हैं। इसके बावजूद क्षेत्र विकास से कोसों दूर है। गोरखपुर-बड़हलगंज फोरलेन गड्ढे में तब्दील हो चुकी है। क्षेत्र की ज्यादातर सड़कें टूटी हैं। गंदगी के साथ ही पेयजल की समस्या गंभीर है। मझिगावा में राप्ती नदी की जलधारा मोड़ने का काम चल रहा है। यह फैसला क्षेत्र के ग्रामीण और किसानों को बर्बाद करने वाला है। राप्ती का जलस्तर बढ़ा तो तबाही मचेगी। कई गांव पानी के साथ बह जाएंगे। फसलें बर्बाद होंगी। कान्हा उपवन और गोशाला बनाने का दावा कागजों में सिमटकर रह गया है। छुट्टा पशुओं ने किसानों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। धान सहित खरीफ की कई फसलें छुट्टा पशु चट कर गए हैं। विधायक के क्षेत्र में न आने की शिकायत आम है। 2022 के चुनाव में बांसगांव विधानसभा क्षेत्र की जनता विधायक को सबक जरूर सिखाएगी। वह वोट देकर पछता रही है।
धर्मेंद्र कुमार, पूर्व प्रत्याशी बसपा
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed