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‘बकरी’ ने खोली नेताओं की पोल
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Mon, 27 Feb 2017 01:08 AM IST
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रैंपस में बकरी नाटक का मंचन करते कलाकार।
- फोटो : Amar Ujala
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अभियान थिएटर ग्रुप की ओर से आयोजित त्रिदिवसीय अभियान नाट्य महोत्सव 2017 के दूसरे दिन रैंपस कॉलेज परिसर में सर्वेश्वर दयाल सक्सेना कृत नाटक ‘बकरी’ का मंचन किया गया। कलाकारों ने नेताओं को लोभी, स्वार्थी बताते हुए गुमराह होने से बचने को प्रेरित किया और विकल्प ढूंढने को प्रयासरत रहने की बात कही है।
बकरी नाटक में बकरी जनता के रूप में आधार बनाकर नेताओं की छवि को लोगों के सामने रखा गया। नाटक में दिखाया गया है कि नेता जनता को गुमराह करते हैं और चुनाव में विजय हासिल कर लेते हैं। आम जनता हर बार ठगी जाती है। जनता निरीह नजर आती है। इस बात का प्रमाण नाटक में जनता के संवाद से स्पष्ट है। हालांकि, नाटक के अंत में जनता प्रतीकात्मक विद्रोह के माध्यम से नकली पहलुओं की पोल खोल देती है, लेकिन सवाल फिर भी अधूरा रह जाता है कि क्या पोल खोलना ही समाधान है। रंगकर्मियों को एक बेहतर विकल्प के बारे में विचार करना होगा। अन्यथा ऐसे नेता सत्ता में बार-बार आते रहेंगे और कुछ समाधान नहीं हो पाएगा।
नौटंकी शैली में कजरी, सोहर और निर्गुण लोकगीत प्रस्तुत किए गए। जबकि नगाड़ा पर लालमनि, हरमोनियम पर मुख्तार और ताल पर विपिन का सामंजस्य बेहतरीन रहा। इसके अलावा आकाश, सुमितंद्र, नेहा और विपिन ने अपने अभिनय से लोगों को प्रभावित किया। नौटंकी शैली में आधारित उक्त नाटक का निर्देशन नारायण पांडेय ने किया जबकि आईएफटीटी के कलाकारों ने अपने उत्कृष्ट अभियान क्षमता का प्रदर्शन कर दर्शकों का समां बांधा।
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बकरी नाटक में बकरी जनता के रूप में आधार बनाकर नेताओं की छवि को लोगों के सामने रखा गया। नाटक में दिखाया गया है कि नेता जनता को गुमराह करते हैं और चुनाव में विजय हासिल कर लेते हैं। आम जनता हर बार ठगी जाती है। जनता निरीह नजर आती है। इस बात का प्रमाण नाटक में जनता के संवाद से स्पष्ट है। हालांकि, नाटक के अंत में जनता प्रतीकात्मक विद्रोह के माध्यम से नकली पहलुओं की पोल खोल देती है, लेकिन सवाल फिर भी अधूरा रह जाता है कि क्या पोल खोलना ही समाधान है। रंगकर्मियों को एक बेहतर विकल्प के बारे में विचार करना होगा। अन्यथा ऐसे नेता सत्ता में बार-बार आते रहेंगे और कुछ समाधान नहीं हो पाएगा।
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नौटंकी शैली में कजरी, सोहर और निर्गुण लोकगीत प्रस्तुत किए गए। जबकि नगाड़ा पर लालमनि, हरमोनियम पर मुख्तार और ताल पर विपिन का सामंजस्य बेहतरीन रहा। इसके अलावा आकाश, सुमितंद्र, नेहा और विपिन ने अपने अभिनय से लोगों को प्रभावित किया। नौटंकी शैली में आधारित उक्त नाटक का निर्देशन नारायण पांडेय ने किया जबकि आईएफटीटी के कलाकारों ने अपने उत्कृष्ट अभियान क्षमता का प्रदर्शन कर दर्शकों का समां बांधा।
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