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ओपीडी में आधी रही मरीजों की संख्या
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
Updated Fri, 22 Jul 2016 09:47 PM IST
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मेडिकल कॉलेज के पर्ची काउंटर पर फैला सन्नाटा।
- फोटो : Shivharsh Dwivedi
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शहर आगमन का असर मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में भी देखने को मिला। दोनों ही जगह मरीजों की संख्या बेहद कम रही। रोजाना मेडिकल कॉलेज में जहां ढाई हजार से तीन हजार मरीज पहुंचते थे, वहां 840 मरीज ही पहुंचे। कुछ यही हाल जिला अस्पताल का भी रहा।
मेडिकल कॉलेज में सर्जरी ओटी को सेफ हाउस बनाए जाने से वहां एक भी ऑपरेशन नहीं हो सके, वहीं जिला अस्पताल में ऑर्थो और सर्जरी दोनों ही जगह पर ऑपरेशन नहीं हुए। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी व अन्य ओटी अन्य दिनों तरह ही क्रियाशील रही। ओपीडी में डॉक्टरों की संख्या कम जरूर थी, मगर हर ओपीडी में डॉक्टर मौजूद थे। जिन ओपीडी में रोज तीन डॉक्टर होते थे, वहां एक ही डॉक्टर मौजूद थे। अस्पताल में मरीजों की संख्या इतनी कम थी कि जो भी मरीज आए, उनका आसानी से इलाज हो गया।
ट्रॉमा खाली, पर इमरजेंसी में हुआ इलाज
प्रधानमंत्री की रैली को देखते हुए सुबह आठ बजे ही मेडिकल कॉलेज का ट्रॉमा सेंटर खाली करा लिया गया था। यहां भर्ती मरीजों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट करा दिया गया। इस दौरान जो भी मरीज इमरजेंसी में आ रहे थे, उन्हें देखा भी गया और दूसरे वार्डों में पूरी व्यवस्था के साथ भर्ती किया गया। ट्रॉमा मे इस दौरान केवल छह मरीजों को ही देखा गया।
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संविदा कर्मचारियों ने सौंपा ज्ञापन
ट्रॉमा सेंटर में कार्यरत संविदा कर्मचारियों ने वेतन भुगतान व नियमितिकरण की मांग को लेकर प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा। मेडिकल कॉलेज संविदा कर्मचारी समिति के महासचिव अंबुज कुमार ने बताया कि ज्ञापन के जरिए 14 महीने से वेतन न मिलने की जानकारी दी गई है। साथ ही जब से समान काम, समान वेतन का नियम लागू हुआ तब से आज तक के भुगतान की मांग की गई है। इसके अलावा कर्मचारियों को नियमित करने की भी मांग की गई है।
मेडिकल कॉलेज में बनाई गई थी पार्किंग
रैली स्थल पर जाने वाले तमाम लोगों ने गाड़ी को पार्क करने के लिए मेडिकल कॉलेज का भी इस्तेमाल किया, जिससे वहां पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गई थीं। इसके चलते मरीजों को भी असुविधा हुई। बाद में पुलिस ने वाहनों को एक किनारे खड़ा कराया।
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मेडिकल कॉलेज में सर्जरी ओटी को सेफ हाउस बनाए जाने से वहां एक भी ऑपरेशन नहीं हो सके, वहीं जिला अस्पताल में ऑर्थो और सर्जरी दोनों ही जगह पर ऑपरेशन नहीं हुए। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी व अन्य ओटी अन्य दिनों तरह ही क्रियाशील रही। ओपीडी में डॉक्टरों की संख्या कम जरूर थी, मगर हर ओपीडी में डॉक्टर मौजूद थे। जिन ओपीडी में रोज तीन डॉक्टर होते थे, वहां एक ही डॉक्टर मौजूद थे। अस्पताल में मरीजों की संख्या इतनी कम थी कि जो भी मरीज आए, उनका आसानी से इलाज हो गया।
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ट्रॉमा खाली, पर इमरजेंसी में हुआ इलाज
प्रधानमंत्री की रैली को देखते हुए सुबह आठ बजे ही मेडिकल कॉलेज का ट्रॉमा सेंटर खाली करा लिया गया था। यहां भर्ती मरीजों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट करा दिया गया। इस दौरान जो भी मरीज इमरजेंसी में आ रहे थे, उन्हें देखा भी गया और दूसरे वार्डों में पूरी व्यवस्था के साथ भर्ती किया गया। ट्रॉमा मे इस दौरान केवल छह मरीजों को ही देखा गया।
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संविदा कर्मचारियों ने सौंपा ज्ञापन
ट्रॉमा सेंटर में कार्यरत संविदा कर्मचारियों ने वेतन भुगतान व नियमितिकरण की मांग को लेकर प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा। मेडिकल कॉलेज संविदा कर्मचारी समिति के महासचिव अंबुज कुमार ने बताया कि ज्ञापन के जरिए 14 महीने से वेतन न मिलने की जानकारी दी गई है। साथ ही जब से समान काम, समान वेतन का नियम लागू हुआ तब से आज तक के भुगतान की मांग की गई है। इसके अलावा कर्मचारियों को नियमित करने की भी मांग की गई है।
मेडिकल कॉलेज में बनाई गई थी पार्किंग
रैली स्थल पर जाने वाले तमाम लोगों ने गाड़ी को पार्क करने के लिए मेडिकल कॉलेज का भी इस्तेमाल किया, जिससे वहां पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गई थीं। इसके चलते मरीजों को भी असुविधा हुई। बाद में पुलिस ने वाहनों को एक किनारे खड़ा कराया।