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अस्पताल में इलाज को तरसे मरीज

Tue, 20 Sep 2016 09:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Tue, 20 Sep 2016 09:47 PM IST
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Patients are faced trouble due to strike of lab technicians and farmsists
सीएमओ कार्यालय पर प्रदर्शन करते डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के लोग । - फोटो : Rajesh Kumar
मंगलवार को स्वास्थ्य कर्मचारियों के हड़ताल ने मरीजों को सांसत में डाल दिया। दवा वितरण काउंटर का ताला नहीं खुला और ऑपरेशन भी ठप रहा। सर्वाधिक परेशानी मेडिकल कॉलेज पहुंचे मरीजों को झेलनी पड़ी। सेंट्रल ड्रग स्टोर बंद होने से भर्ती मरीजों को भी दवाओं के लिए तरसना पड़ा।
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मंगलवार सुबह कार्य बहिष्कार करते हुए फॉर्मासिस्ट और लैब टेक्नीशियनों सीएमओ दफ्तर पर धरने पर बैठ गए। जिला अस्पताल में मरीजों के हो हल्ला मचाने पर ट्रेनी छात्रों की मदद से दवा काउंटर चलाया गया। वहीं महिला अस्पताल में दवा काउंटर का ताला खुला ही नहीं। पैथोलॉजी में जांच को आए लोगों को बेरंग ही लौटना पड़ा। जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में तो किसी तरह से मरीजों को कुछ उपचार मिला, मगर मेडिकल कॉलेज में सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ी।
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इमरजेंसी में एक फॉर्मासिस्ट ड्यूटी कर रहे थे, जिन्हें काम से हटाने के लिए साथी फॉर्मासिस्टों से उनकी नोकझोंक हो गई। दोपहर दो बजे के बाद से इमरजेंसी बिना फॉर्मासिस्ट के ही चली। हड़ताल के समर्थन में नर्सों के आने के कारण ऑपरेशन भी ठप रहा। मेडिकल कॉलेज में डिजिटल एक्सरे भी नहीं हुआ। हालांकि इसकी वजह हड़ताल नहीं बल्कि तकनीकी खराबी थी। फॉर्मासिस्टों के हड़ताल की वजह से इंसेफेलाइटिस की रिपोर्टिंग भी नहीं हो सकी है। हड़ताली कर्मचारी पर नजर रखने के लिए पुलिस बल तैनात रही। 
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इंसेफेलाइटिस दवा काउंटर भी बंद

दो बजे तक इंसेफेलाइटिस दवा काउंटर चला मगर बाद में हड़ताली कर्मचारी वहां पहुंच गए और उसे भी बंद करा दिया। दवा न मिलने से परेशान तीमारदारों ने वहां लिखे एसआईसी के नंबर भी फोन कर शिकायत दर्ज कराई, मगर कोई फायदा नहीं हुआ। 

यह हैं मांगें

0 वेतन विसंगति दूर हो
0 प्रोन्नत वेतनमान दिया जाए
0 कैडर रिव्यू और पीजीआई कर्मचारियों के बराबर भत्ते दिए जाए
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