{"_id":"58779bf84f1c1bab78ba93e4","slug":"pathology-of-women-hospital-are-not-worked","type":"story","status":"publish","title_hn":"अफसरों की जंग में ठप हुई पैथोलॉजी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अफसरों की जंग में ठप हुई पैथोलॉजी
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 13 Jan 2017 01:06 AM IST
विज्ञापन
महिला अस्पताल।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिछले कुछ महीनों से स्वास्थ्य अफसरों के बीच छिड़ी जंग ने मरीजों की परेशानी बढ़ा दी है। जिला अस्पताल में ठप हुई सर्जरी से शुरू हुआ सिलसिला बृहस्पतिवार को महिला अस्पताल की पैथोलॉजी के ठप होने तक पहुंच गया। एडी हेल्थ, सीएमओ, एसआईसी सभी अपने-अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे मरीजों की सांसत बढ़ रही है। अफसरों के बीच छिड़ी इस जंग में परेशान सिर्फ मरीज ही हो रहे हैं।
बृहस्पतिवार को सीएमओ के आदेश के बाद महिला अस्पताल की पैथोलॉजी ठप हो गई। दरअसल, एनआरएचएम के तहत यहां कर्मचारियों की तैनाती हुई थी, जो जांच आदि करते थे। अचानक सीएमओ ने इनकी तैनाती मूल स्थान पर करने का फरमान जारी कर दिया। आदेश के अनुपालन में कर्मचारी चले गए और महिला अस्पताल में जांच ठप हो गया। ओपीडी में आने वाली गर्भवतियों को डॉक्टर जांच कराने को कह रहे थे, लेकिन पैथोलॉजी में एड्स के अलावा कोई जांच हो ही नहीं रही थी।
पूरे मामले की शुरुआत एडी हेल्थ रहे डॉ. आरके तिवारी के एक आदेश से हुआ। जिला अस्पताल में एनेस्थीसिया के लिए अधूरा आदेश दिया गया, मगर आज तक एनेस्थीसिया के डॉक्टर न होने से जिला अस्पताल में सर्जरी ठप के कगार पर है। अकेले एसआईसी डॉ. एचआर यादव प्रशासनिक काम छोड़कर कुछ सर्जरी करा पाते हैं। यहां जैसे-तैसे ही व्यवस्था चल रही है। फिर जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. एचआर यादव ने पहले सीएमओ दफ्तर, फिर टीबी अस्पताल की बिजली कटवा दी। नियमानुसार बिजली कटनी भी चाहिए थी, मगर टीबी अस्पताल में इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ा। अब सीएमओ डॉ. रवींद्र कुमार ने अपने अधिकार का इस्तेमाल किया है और महिला अस्पताल में तैनात कर्मचारियों को मूल तैनाती पर भेज दिया, जिससे बृहस्पतिवार को जांच ठप हो गया।
विज्ञापन
जिला महिला अस्पताल में अटैच कर्मचारियों को हटाने का आदेश आया था। उन्हें मूल तैनाती वाली जगह पर भेजा गया है, यदि मांग की जाएगी तो संविदा कर्मचारी भेजे जाएंगे।
- डॉ. रवींद्र कुमार, सीएमओ
एक दिन पहले ही कर्मचारियों की मांग भेजी गई है लेकिन कर्मचारी अभी नहीं मिले, जिसके चलते दिक्कत हो गई है।
- डॉ. एके गुप्ता, एसआईसी, महिला अस्पताल
विज्ञापन
बृहस्पतिवार को सीएमओ के आदेश के बाद महिला अस्पताल की पैथोलॉजी ठप हो गई। दरअसल, एनआरएचएम के तहत यहां कर्मचारियों की तैनाती हुई थी, जो जांच आदि करते थे। अचानक सीएमओ ने इनकी तैनाती मूल स्थान पर करने का फरमान जारी कर दिया। आदेश के अनुपालन में कर्मचारी चले गए और महिला अस्पताल में जांच ठप हो गया। ओपीडी में आने वाली गर्भवतियों को डॉक्टर जांच कराने को कह रहे थे, लेकिन पैथोलॉजी में एड्स के अलावा कोई जांच हो ही नहीं रही थी।
विज्ञापन
पूरे मामले की शुरुआत एडी हेल्थ रहे डॉ. आरके तिवारी के एक आदेश से हुआ। जिला अस्पताल में एनेस्थीसिया के लिए अधूरा आदेश दिया गया, मगर आज तक एनेस्थीसिया के डॉक्टर न होने से जिला अस्पताल में सर्जरी ठप के कगार पर है। अकेले एसआईसी डॉ. एचआर यादव प्रशासनिक काम छोड़कर कुछ सर्जरी करा पाते हैं। यहां जैसे-तैसे ही व्यवस्था चल रही है। फिर जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. एचआर यादव ने पहले सीएमओ दफ्तर, फिर टीबी अस्पताल की बिजली कटवा दी। नियमानुसार बिजली कटनी भी चाहिए थी, मगर टीबी अस्पताल में इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ा। अब सीएमओ डॉ. रवींद्र कुमार ने अपने अधिकार का इस्तेमाल किया है और महिला अस्पताल में तैनात कर्मचारियों को मूल तैनाती पर भेज दिया, जिससे बृहस्पतिवार को जांच ठप हो गया।
विज्ञापन
जिला महिला अस्पताल में अटैच कर्मचारियों को हटाने का आदेश आया था। उन्हें मूल तैनाती वाली जगह पर भेजा गया है, यदि मांग की जाएगी तो संविदा कर्मचारी भेजे जाएंगे।
- डॉ. रवींद्र कुमार, सीएमओ
एक दिन पहले ही कर्मचारियों की मांग भेजी गई है लेकिन कर्मचारी अभी नहीं मिले, जिसके चलते दिक्कत हो गई है।
- डॉ. एके गुप्ता, एसआईसी, महिला अस्पताल