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भाईचारा की मिसाल बना पांडेय हाता

Thu, 20 Apr 2017 01:52 AM IST
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, गोरखपुर।
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Thu, 20 Apr 2017 01:52 AM IST
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Pandeyhata became symbol of brotherhoods
पांडेयहाता में सिंधोरा बनाते कारीगर। - फोटो : Amar Ujala
शहर का पांडेय हाता भाईचारा की मिसाल है। हिंदू और मुस्लिम व्यापारी गंगा-जमुनी तहजीब को आगे बढ़ाते हुए पैगंबर साहब के जलसे की तैयारी में लगे हैं। जश्ने मेराजुन्नवी का आयोजन 24 अप्रैल को होना है। आयोजक बज्मे आले मुस्तफा कमेटी के कोषाध्यक्ष छाजूराम केडिया हैं। कई सदस्य हिंदू हैं। इसी तरह मुस्लिम होली और दीपावली में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। होली का जुलूस निकालने में मदद करते हैं। लक्ष्मी पूजा के लिए चंदा भी देते हैं।
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कमेटी के सदर जावेद ने बताया कि आपसी भाईचारा की ऐसी मिसाल कहीं और देखने को कम ही मिलेगी। यह कोई साल दो साल की बात नहीं हैं। इस रिवायत को कायम रखे हुए 50 साल गुजर गए। दोनों समुदाय के बीच प्यार में कभी कोई कमी नहीं आई। इस वर्ष 24 अप्रैल को पांडेयहाता बाजार में कमेटी राष्ट्रीय स्तर का जश्ने मेराजुन्नबी सम्मेलन कराने जा रही है। कोषाध्यक्ष छाजूराम केडिया के साथ सदस्य संजीव जैन (बब्बू), विजय पाठक, गुड्डू शुक्ल और राजेश तैयारियों में जुटे हैं।
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कमेटी के महमूद अहमद (जुम्मन) ने बताया कि हिंदू भाई न सिर्फ तैयारियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं बल्कि आयोजन के लिए चंदा देना हो या फिर कार्यक्रम में आने वाले लोगों का इस्तेकबाल करना हो, सभी में पूरी शिद्दत से शामिल होते हैं। जश्ने मेराजुन्नबी में मौलाना मोहम्मद हाशिम कानपुरी, मुफ्ती मोहम्मद निजामुद्दीन नूरी, मौलाना मोहम्मद कमरुद्दीन शिरकत करेंगे। नात शरीफ  मशहूर शायर राही बस्तवी पेश करेंगे। पिछले 50 सालों से इस तरह के जलसे का आयोजन कमेटी आपसी भाईचारा के दम पर कराती आ रही है।
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मिलकर खुशी मनाने में ही असली आनंद
कोशिश यही रहती है कि हर काम हम आपस में मिलकर करें। एक-दूसरे के धार्मिक कार्यक्रम हम आपसी सहयोग से कराते हैं। बिशाता व्यापार मंडल से जुड़े सभी लोग धर्म-जाति से ऊपर उठकर पांच दशकों से यह काम करते आ रहे हैं।
- हुलास मल्ल जैन, संरक्षक बिशाता व्यापार मंडल

एक-दूसरे के सहयोग से होते हैं धार्मिक आयोजन
होली का जुलूस हो या पैगंबर साहब की महफिल सजाने की बात, पांडेयहाता के व्यापारी कौमी एकता की मिसाल पेश करते आए हैं। दोनों ही धर्मों के लोग एक-दूसरे के धार्मिक आयोजन में पूरा सहयोग देते हैं और शिरकत भी करते हैं।
- जावेद, सदर बज्मे आले मुस्तफा कमेटी

नाज है प्यार की परंपरा पर
दशकों से आपसी सहयोग से दोनों धर्मों के आयोजन होते देखता आया हूं। सभी व्यापारियों के बीच भाईचारे का रिश्ता है। ये अहसास कराता है कि हम सब आपस में एक हैं। बाजार की इस गौरवशाली परंपरा पर मुझे नाज है।
- अशफाक (राजू), सदस्य बज्मे आले मुस्तफा कमेटी

मजहब जोड़ता है तोड़ता नहीं
मजहब जोड़ने का काम करता है, तोड़ने का नहीं। पांडेयहाता के सभी व्यापारी ऐसा ही मानते हैं। इसीलिए दोनों धर्मों के लोग विभिन्न मौकों पर एक-दूसरे के साथ खड़े नजर आते हैं। फिर चाहे होली हो या पैगंबर साहब की महफिल।

- संजीव जैन, सदस्य बज्मे आले मुस्तफा कमेटी

यहां तैयार होता है दुल्हन के लिए सिंधोरा
पांडेयहाता की पहचान यहां बने सिंधोरा से भी है। इसे बनाने वाले अधिकतर मुसलमान हैं तो बेचने वाले ज्यादातर हिंदू। बाजार की अर्थव्यवस्था भी पूरी तरह कौमी एकता पर आधारित है। हालांकि, अब दोनों धर्मों के लोग सिंधोरा बनाने और बेचने का काम करने लगे हैं।
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