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2018 तक एम्स में शुरू हो जाएगी ओपीडी
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Mon, 22 Aug 2016 07:54 PM IST
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महंत आदित्यनाथ
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पूर्वी उत्तर प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए ही गोरखपुर में एम्स की आधारशिला रखी गई है। केंद्र सरकार प्रयासरत है कि जल्द से जल्द एम्स का निर्माण हो और 2018 तक ओपीडी चालू करा दी जाए। इसके अलावा मेडिकल कालेज में प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा के तहत छह विभागों में सुपर स्पेशियालिटी शुरू किया जा रहा है। इससे इन विभागों में मरीजों को उच्च स्तर की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इंसेफेलाइटिस पीड़ित बच्चों के लिए पुनर्वास केंद्र का शिलान्यास केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री सितंबर के प्रथम सप्ताह में करेंगे।
यह जानकारी सांसद महंत आदित्यनाथ ने दी। सोमवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जेई एईएस से पीड़ित बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए मेडिकल कालेज में पांच करोड़ की लागत से पुनर्वास केंद्र की स्थापना की जाएगी। इसकी आधारशिला केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा रखेंगे। इसके अलावा पूना की तर्ज पर यहां राष्ट्रीय विषाणु संस्थान (एनआईबी) के अपग्रेडेशन की भी प्रक्रिया चल रही है।
यह पूरी तरह से आधुनिक तकनीक पर आधारित होगा। इसके बाद जांच के लिए अब दूसरी जगह रिपोर्ट नहीं भेजनी होगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पूर्वांचल में सघन आबादी के कारण बहुत सी जलजनित और विषाणुजनित बीमारियों ने अपनी जड़ें जमा ली हैं। एनआईबी से उसकीरोकथाम में मदद मिलेगी। शोध केंद्र के लिए केंद्र सरकार से अनुमति मिल गई है। एक सप्ताह पूर्व केंद्र की 30 सदस्यीय टीम ने यहां का दौरा कर पूरी जानकारी एकत्र की। केंद्र सरकार ने जेई को नोटिफाइड डिजिज घोषित कर दिया है। इस पर आने वाला सभी खर्च केंद्र सरकार ही वहन करेगी।
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यह जानकारी सांसद महंत आदित्यनाथ ने दी। सोमवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जेई एईएस से पीड़ित बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए मेडिकल कालेज में पांच करोड़ की लागत से पुनर्वास केंद्र की स्थापना की जाएगी। इसकी आधारशिला केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा रखेंगे। इसके अलावा पूना की तर्ज पर यहां राष्ट्रीय विषाणु संस्थान (एनआईबी) के अपग्रेडेशन की भी प्रक्रिया चल रही है।
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यह पूरी तरह से आधुनिक तकनीक पर आधारित होगा। इसके बाद जांच के लिए अब दूसरी जगह रिपोर्ट नहीं भेजनी होगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पूर्वांचल में सघन आबादी के कारण बहुत सी जलजनित और विषाणुजनित बीमारियों ने अपनी जड़ें जमा ली हैं। एनआईबी से उसकीरोकथाम में मदद मिलेगी। शोध केंद्र के लिए केंद्र सरकार से अनुमति मिल गई है। एक सप्ताह पूर्व केंद्र की 30 सदस्यीय टीम ने यहां का दौरा कर पूरी जानकारी एकत्र की। केंद्र सरकार ने जेई को नोटिफाइड डिजिज घोषित कर दिया है। इस पर आने वाला सभी खर्च केंद्र सरकार ही वहन करेगी।
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