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अब मेडिकल कॉलेज में हो सकेगी इंसेफलाइटिस की जांच
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 23 Nov 2015 08:43 PM IST
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इंसेफलाइटिस की जांच के लिए मेडिकल कॉलेज को अब नेशनल वायरोलॉजी (एनआईवी) लैब, पुणे पर निर्भर नहीं रहना होगा। अब कॉलेज का अपना वायरल जांच केंद्र होगा। प्रदेश शासन ने इसके लिए सिर्फ मंजूरी ही नहीं दी है बल्कि केंद्र की स्थापना के लिए मंजूर तीन करोड़ के सापेक्ष 92 लाख रुपये भी स्वीकृत कर दिए हैं। धन स्वीकृत होने के बाद कॉलेज प्रशासन जांच केंद्र की स्थापना की तैयारी में जुट गया है।
दरअसल, इंसेफलाइटिस की जांच के लिए कॉलेज प्रशासन को परिसर में स्थापित एनआईवी की गोरखपुर इकाई पर निर्भर रहना पड़ता है। चूंकि इस इकाई को रिसर्च के लिए स्थापित किया गया है, इसलिए वह जांच की प्रक्रिया अपनी जरूरत की प्राथमिकता के आधार पर करती रही है, जिससे कभी-कभी जांच रिपोर्ट आने में वक्त लग जाता है और इसका असर इलाज पर भी पड़ता है। यह समस्या कॉलेज प्रशासन ने पिछले दिनों प्रदेश शासन के उच्चाधिकारियों के सामने रखी तो इसे गंभीरता से लेते हुए चार महीने पहले कॉलेज से प्रस्ताव मांगा।
कॉलेज की ओर से माइक्रोबायोलॉजी विभाग में वायरल डिजीज रिसर्च लैब स्थापना के लिए जरूरत का प्रस्ताव बनाकर भेज दिया गया। प्रस्ताव मंजूर करते हुए शासन ने इस मद में तीन करोड़ रुपये खर्च का प्रावधान रखा है साथ ही लैब के लिए उपकरणों की खरीद के मद में 92 लाख 41 हजार रुपये स्वीकृत कर दिया है। धन की स्वीकृति के साथ ही शासन से कॉलेज प्रशासन को लैब स्थापना की गुणवत्ता के मद्देनजर तमाम चेतावनी भी दी है। इसमें उपकरण खरीद के दौरान किसी तरह की डुप्लीकेसी से बचने की हिदायत भी शामिल है। यह भी कहा गया है कि जब तक उपकरण खरीद की सारी प्रक्रिया पूरी न कर ली जाए तब तक कोषागार से धनराशि न निकाली जाय।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रो. आरपी शर्मा ने बताया कि प्रस्ताव के मुताबिक धन स्वीकृत हो जाने की जानकारी मिली है। रकम की राशि जारी होते ही लैब बनाने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इस लैब के बन जाने इंसेफेलाइटिस समेत सभी वायरल जांच के लिए कॉलेज खुद ही सक्षम हो जाएगा। जांच के लिए सेंपल को एनआईवी लैब नहीं भेजना पड़ेगा।
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दरअसल, इंसेफलाइटिस की जांच के लिए कॉलेज प्रशासन को परिसर में स्थापित एनआईवी की गोरखपुर इकाई पर निर्भर रहना पड़ता है। चूंकि इस इकाई को रिसर्च के लिए स्थापित किया गया है, इसलिए वह जांच की प्रक्रिया अपनी जरूरत की प्राथमिकता के आधार पर करती रही है, जिससे कभी-कभी जांच रिपोर्ट आने में वक्त लग जाता है और इसका असर इलाज पर भी पड़ता है। यह समस्या कॉलेज प्रशासन ने पिछले दिनों प्रदेश शासन के उच्चाधिकारियों के सामने रखी तो इसे गंभीरता से लेते हुए चार महीने पहले कॉलेज से प्रस्ताव मांगा।
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कॉलेज की ओर से माइक्रोबायोलॉजी विभाग में वायरल डिजीज रिसर्च लैब स्थापना के लिए जरूरत का प्रस्ताव बनाकर भेज दिया गया। प्रस्ताव मंजूर करते हुए शासन ने इस मद में तीन करोड़ रुपये खर्च का प्रावधान रखा है साथ ही लैब के लिए उपकरणों की खरीद के मद में 92 लाख 41 हजार रुपये स्वीकृत कर दिया है। धन की स्वीकृति के साथ ही शासन से कॉलेज प्रशासन को लैब स्थापना की गुणवत्ता के मद्देनजर तमाम चेतावनी भी दी है। इसमें उपकरण खरीद के दौरान किसी तरह की डुप्लीकेसी से बचने की हिदायत भी शामिल है। यह भी कहा गया है कि जब तक उपकरण खरीद की सारी प्रक्रिया पूरी न कर ली जाए तब तक कोषागार से धनराशि न निकाली जाय।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रो. आरपी शर्मा ने बताया कि प्रस्ताव के मुताबिक धन स्वीकृत हो जाने की जानकारी मिली है। रकम की राशि जारी होते ही लैब बनाने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इस लैब के बन जाने इंसेफेलाइटिस समेत सभी वायरल जांच के लिए कॉलेज खुद ही सक्षम हो जाएगा। जांच के लिए सेंपल को एनआईवी लैब नहीं भेजना पड़ेगा।