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इंसेफेलाइटिस ने नौ और की ली जान
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
Updated Tue, 16 Aug 2016 10:12 PM IST
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अस्पताल में भर्ती मरीज
इंसेफेलाइटिस के ने 72 घंटे के भीतर नौ लोगों की जान ले ली। वहीं 34 नऐ मरीजों को भर्ती किया गया है। मेडिकल कॉलेज में 85 मरीजों का उपचार किया जा रहा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने तेज बुखार होने पर सरकारी अस्पताल में इलाज कराने की अपील किया है। डॉक्टरों का कहना है कि समय से इलाज शुरू होने पर मरीजों की जान बचाई जा सकती है। उन्हीं मरीजों की मौत होती है जिन्हें प्राथमिक उपचार समय से नहीं मिल पाता है।
इंसेफेलाइटिस से मरने वाले में गोरखपुर के गुलरिहा की इच्छा (3) पुत्र रविंद्र सिंह, गुलरिहा जंगल एकला के रवि (8) पुत्र सुभाष, तिवारीपुर की अनुष्का (3) पुत्री राजेंद्र, देवरिया जिले के बनकटा का देवा (4) पुत्र बलवंत, संतकबीरनगर महुली की स्नेहा (5) पुत्री इंद्रजीत, घनघटा की अंकिता (2) पुत्र कपिलदेव, सुधरा की अंशिका (8) पुत्री दिलीप, सिद्धार्थनगर मसानीगंज की अंशिका (3) पुत्री परशुराम, नेपाल के सोना (6) पुत्र नागेंद्र शामिल हैं। वहीं गोरखपुर के दस, देवरिया और संतकबीरनगर के तीन-तीन, महराजगंज के तीन, सिद्धार्थनगर के एक, कुशीनगर के छह, बस्ती के दो और बिहार छह मरीजों को भर्ती किया गया है।
जनवरी से लेकर अब तक मेडिकल कॉलेज में 144 मरीजों की मौतें हो चुकी हैं। इस समय नेहरू चिकित्सालय 85 मरीजों का इलाज हो रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि इलाज को लेकर कहीं से कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है। मरीज पहले इधर-उधर इलाज के चक्कर में पड़ जा रहे हैं और केस बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज आ रहे हैं। अस्पताल प्रशासन ने अपील की है कि जिस भी मरीज को तेज बुखार, झटके आदि की शिकायत हो वह निशुल्क सरकारी एंबुलेंस 108 की मदद से सीधे मेडिकल कॉलेज पहुंचे।
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इंसेफेलाइटिस से मरने वाले में गोरखपुर के गुलरिहा की इच्छा (3) पुत्र रविंद्र सिंह, गुलरिहा जंगल एकला के रवि (8) पुत्र सुभाष, तिवारीपुर की अनुष्का (3) पुत्री राजेंद्र, देवरिया जिले के बनकटा का देवा (4) पुत्र बलवंत, संतकबीरनगर महुली की स्नेहा (5) पुत्री इंद्रजीत, घनघटा की अंकिता (2) पुत्र कपिलदेव, सुधरा की अंशिका (8) पुत्री दिलीप, सिद्धार्थनगर मसानीगंज की अंशिका (3) पुत्री परशुराम, नेपाल के सोना (6) पुत्र नागेंद्र शामिल हैं। वहीं गोरखपुर के दस, देवरिया और संतकबीरनगर के तीन-तीन, महराजगंज के तीन, सिद्धार्थनगर के एक, कुशीनगर के छह, बस्ती के दो और बिहार छह मरीजों को भर्ती किया गया है।
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जनवरी से लेकर अब तक मेडिकल कॉलेज में 144 मरीजों की मौतें हो चुकी हैं। इस समय नेहरू चिकित्सालय 85 मरीजों का इलाज हो रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि इलाज को लेकर कहीं से कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है। मरीज पहले इधर-उधर इलाज के चक्कर में पड़ जा रहे हैं और केस बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज आ रहे हैं। अस्पताल प्रशासन ने अपील की है कि जिस भी मरीज को तेज बुखार, झटके आदि की शिकायत हो वह निशुल्क सरकारी एंबुलेंस 108 की मदद से सीधे मेडिकल कॉलेज पहुंचे।
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