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रामगढ़तालः ५० हजार लोगों को फिलहाल संजीवनी
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रामगढ़ताल : 50 हजार बाशिंदों को फिलहाल राहत
गोरखपुर। रामगढ़ताल किनारे रहने वाले करीब 50 हजार लोगों को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की तरफ से फिलहाल राहत मिली है। रामगढ़ताल मामले में हुई सुनवाई के दौरान एनजीटी ने हाई पावर कमेटी की संस्तुति पर अभी कोई एक्शन लेने की जगह प्रमुख सचिव नगर विकास को आदेश दिया कि जांच कर बताएं कि ट्रिब्यूनल के 17 दिसंबर 2018 के आदेश का पालन हो रहा है या नहीं । आदेश का उल्लंघन होने पर प्रमुख सचिव को जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित पर कार्रवाई करने का भी आदेश दिया गया है। 17 दिसंबर के आदेश में एनजीटी ने 500 मीटर के दायरे में निर्माण कार्य नहीं होने के साथ ही गोरखपुर विकास प्राधिकरण को वहां किसी का भी मानचित्र नहीं स्वीकृत करने को कहा था। प्रमुख सचिव को रिपोर्ट देने के लिए एक महीने का समय दिया गया है।
उधर जीडीए के अफसरों ने भी इस आदेश से थोड़ी राहत महसूस की है। अगर एनजीटी अपनी हाई पावर कमेटी की संस्तुति पर कोई कार्रवाई का आदेश सुना देती तो प्राधिकरण की मुश्किलें बढ़ जातीं। प्राधिकरण का कहना है कि ट्रिब्यूनल के 17 दिसंबर 2018 के आदेश का तत्काल प्रभाव से पालन शुरू करते हुए मानचित्र स्वीकृति पर रोक लगा दी गई है। रामगढ़ताल के मामले में मीरा शुक्ला बनाम म्यूनिसिपल कारपोरेशन गोरखपुर और विश्वविजय सिंह बनाम यूपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मामले में 19 जुलाई को सुनवाई थी। जिसमें एनजीटी ने प्रमुख सचिव नगर विकास को ये निर्देश दिए।
रामगढ़ताल के 500 मीटर के दायरे में निर्माण पर एनजीटी के रोक के आदेश का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है। आदेश के बाद से ही संबंधित क्षेत्र में किसी भी निर्माण कार्य के लिए मानचित्र नहीं स्वीकृत किया गया है। इसका नोटिफिकेशन भी किया जा चुका है। - राम सिंह गौतम, सचिव, जीडीए
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गोरखपुर। रामगढ़ताल किनारे रहने वाले करीब 50 हजार लोगों को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की तरफ से फिलहाल राहत मिली है। रामगढ़ताल मामले में हुई सुनवाई के दौरान एनजीटी ने हाई पावर कमेटी की संस्तुति पर अभी कोई एक्शन लेने की जगह प्रमुख सचिव नगर विकास को आदेश दिया कि जांच कर बताएं कि ट्रिब्यूनल के 17 दिसंबर 2018 के आदेश का पालन हो रहा है या नहीं । आदेश का उल्लंघन होने पर प्रमुख सचिव को जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित पर कार्रवाई करने का भी आदेश दिया गया है। 17 दिसंबर के आदेश में एनजीटी ने 500 मीटर के दायरे में निर्माण कार्य नहीं होने के साथ ही गोरखपुर विकास प्राधिकरण को वहां किसी का भी मानचित्र नहीं स्वीकृत करने को कहा था। प्रमुख सचिव को रिपोर्ट देने के लिए एक महीने का समय दिया गया है।
उधर जीडीए के अफसरों ने भी इस आदेश से थोड़ी राहत महसूस की है। अगर एनजीटी अपनी हाई पावर कमेटी की संस्तुति पर कोई कार्रवाई का आदेश सुना देती तो प्राधिकरण की मुश्किलें बढ़ जातीं। प्राधिकरण का कहना है कि ट्रिब्यूनल के 17 दिसंबर 2018 के आदेश का तत्काल प्रभाव से पालन शुरू करते हुए मानचित्र स्वीकृति पर रोक लगा दी गई है। रामगढ़ताल के मामले में मीरा शुक्ला बनाम म्यूनिसिपल कारपोरेशन गोरखपुर और विश्वविजय सिंह बनाम यूपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मामले में 19 जुलाई को सुनवाई थी। जिसमें एनजीटी ने प्रमुख सचिव नगर विकास को ये निर्देश दिए।
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रामगढ़ताल के 500 मीटर के दायरे में निर्माण पर एनजीटी के रोक के आदेश का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है। आदेश के बाद से ही संबंधित क्षेत्र में किसी भी निर्माण कार्य के लिए मानचित्र नहीं स्वीकृत किया गया है। इसका नोटिफिकेशन भी किया जा चुका है। - राम सिंह गौतम, सचिव, जीडीए
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