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नरमू के 103 साल के महामंत्री ने खोले ‘जवां’ होने के राज, बोले-‘सकारात्मक सोच ही मेरी ऊर्जा’

Wed, 18 Dec 2019 01:34 PM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर Published by: विजय जैन Updated Wed, 18 Dec 2019 01:34 PM IST
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NE railway mazdoor union new General Secretary kl gupt exclusive interview
नरमू के 103 साल के महामंत्री केएल गुप्त। - फोटो : अमर उजाला
शहर में बिरले ही होंगे जो 100 वर्ष की उम्र में सक्रिय हों, लेकिन मंगलवार को 59 वीं बार एनई रेलवे मजदूर यूनियन (नरमू) के महामंत्री चुने गए 103 साल के केएल गुप्त सक्रियता में आज भी युवाओं को मात देते हैं।
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वे आज भी न केवल अपने को ‘जवां’ मानते हैं,बल्कि एक युवा की तरह ऊर्जा से भरपूर काम करते हैं। सादगी उनकी पहचान है। उम्र पर वे खुद हावी हैं और बीमारी उनसे कोसों दूर है। सुबह पांच बजे से ही उनकी गतिविधियां शुरू हो जाती है। सकारात्मक सोच को ही वे अपना ऊर्जा मानते हैं। अमर उजाला से उन्होंने अपने जीवन के अहम पलों को साझा किया ही साथ ही इस उम्र में जवां होने का राज भी बताया।
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सवाल: इस उम्र में भी इतने तेज तर्रार हैं, कैसे संभव हो पाया यह सब?
जवाब: सकारात्मक सोच रखता हूं। इससे मिशन से भटकता नहीं। मुझे इसी से ऊर्जा मिलती है।‘कम खाना और गम खाना’ मेरे जीवन का मूलमंत्र है। मतलब यह है कि कम भोजन और दूसरों की
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समस्या को अपना बना लेता हूं और उसका समाधान कराता हूं।
सवाल: खुद को फिट रखने के लिए क्या करते हैं?
जवाब: सुबह पांच बजे उठ जाता हूं। रोजाना 15 से 20 मिनट व्यायाम करता हूं। पैदल खूब चलता हूं। शायद इसी से फिट रहता हूं।

भोजन में क्या लेते हैं, कुछ विशेष व्यंजन पसंद है?

जवाब: शाकाहारी हूं। रोटी, चावल और दाल। भोजन सिर्फ रात में करता हूं। दिन में नाश्ता मिल गया तो ठीक वरना चाय पर ही दिन कट जाता है। कोई विशेष व्यंजन पसंद नहीं है।

सवाल: आप आर्मी में थे तो कैसे रेलवे में आना हुआ और यूनियन की राजनीति कैसे शुरू की?
जवाब: एआईआरएफ के अध्यक्ष व कटिहार के सांसद प्रिय गुप्त से मुझे प्रेरणा मिली। आर्मी छोड़कर रोजगार कार्यालय ज्वाइन किया, लेकिन मन नहीं माना। 1951 में रेलवे में लेखा सहायक पद पर ज्वाइन कर लिया। इसी वर्ष मजदूर यूनियन से जुड़ गया। 1952 में नरमू का गठन हुआ तभी से महामंत्री हूं। सबकी दुआ से वह सफर आज भी जारी है।

सवाल: कहा जाता है कि आपकी मेमोरी कंप्यूटर जैसी है?
जवाब: सब ईश्वर की देन है। स्मृति मेरी ठीक है। आंख में दिक्कत थी तो ऑपरेशन हो चुका है। एक बात है, लिखता पढ़ता खूब हूं। बाकी आपके सामने खड़ा हूं।

सवाल: आज के युवाओं के लिए क्या संदेश देंगे?
जवाब: आज के नौजवानों में ऊर्जा तो बहुत है, लेकिन उसे सही दिशा में खर्च नहीं करते हैं। अगर कोई कुछ कहता है तो उसका जवाब देने में जुट जाते हैं और अपने मिशन से भटक जाते हैं। यूथ
के लिए यही कहूंगा कि जो लक्ष्य बनाएं सिर्फ उसी को ध्यान में रखें।
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