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भक्ति से शुरू होगी शक्ति की आराधना
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 30 Sep 2016 07:38 PM IST
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नवरात्र को लेकर सजीं दुकानें।
- फोटो : Shivharsh Dwivedi
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मां आदिशक्ति की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र शनिवार से शुरू हो रहा है। पहले दिन श्रद्धालु कलश स्थापना के बाद मां के पहले स्वरूप शैलपुत्री की आराधना करेंगे और व्रत का संकल्प लेंगे। नौ दिन या पहले और आखिरी दिन का उपवास रखने वाले श्रद्धालु दुर्गा सप्तशती पाठ के साथ इस महापूजा की शुरुआत करेंगे और मां के चरणों में अपनी श्रद्धा निवेदित करेंगे।
नवरात्र को लेकर तैयारी का दौर शुक्रवार को सभी देवी मंदिरों, शक्तिपीठों और अस्थाई पूजा पंडालों में पूरे दिन और देर रात तक चलता रहा। मंदिरों और शक्तिपीठों में देर रात तक साफ-सफाई चलती रही, जिससे श्रद्धालु अपनी नौ दिन की आराधना को विधि-विधान से शुरू कर सकें। अखिल भारतीय विद्वत महासभा के महामंत्री पं. बृजेश पांडेय ने बताया कि शारदीय नवरात्र एक अक्टूबर शनिवार से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा। कलश स्थापना शनिवार को सूर्योदय 6 बजकर 6 मिनट के बाद दिन की जा सकती है।
हस्त नक्षत्र और ब्रह्मयोग का संयोग पुण्यदायक है। महानिशा पूजा 8 तारीख को मध्य रात्रि में की जाएगी और अष्टमी महाव्रत 9 अक्टूबर को रखा जाएगा। महानवमी व्रत व दुर्गा सप्तशती पाठ और व्रत का हवन 10 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 55 मिनट तक करने का मुहूर्त है। विजय दशमी, नीलकंठ दर्शन, शमी पूजन, अपराजिता पूजा और नवरात्र व्रत का पारण 11 अक्टूबर को होगा। पं. ब्रजेश ने बताया कि कहीं-कहीं मतांतर होने से मंगलवार को विदाई नहीं की जाती, ऐसे में विदाई 10 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 6 मिनट के बाद श्रवण नक्षत्र में की जा सकती है। इस बार का नवरात्र दस दिन का है।
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नवरात्र को लेकर तैयारी का दौर शुक्रवार को सभी देवी मंदिरों, शक्तिपीठों और अस्थाई पूजा पंडालों में पूरे दिन और देर रात तक चलता रहा। मंदिरों और शक्तिपीठों में देर रात तक साफ-सफाई चलती रही, जिससे श्रद्धालु अपनी नौ दिन की आराधना को विधि-विधान से शुरू कर सकें। अखिल भारतीय विद्वत महासभा के महामंत्री पं. बृजेश पांडेय ने बताया कि शारदीय नवरात्र एक अक्टूबर शनिवार से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा। कलश स्थापना शनिवार को सूर्योदय 6 बजकर 6 मिनट के बाद दिन की जा सकती है।
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हस्त नक्षत्र और ब्रह्मयोग का संयोग पुण्यदायक है। महानिशा पूजा 8 तारीख को मध्य रात्रि में की जाएगी और अष्टमी महाव्रत 9 अक्टूबर को रखा जाएगा। महानवमी व्रत व दुर्गा सप्तशती पाठ और व्रत का हवन 10 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 55 मिनट तक करने का मुहूर्त है। विजय दशमी, नीलकंठ दर्शन, शमी पूजन, अपराजिता पूजा और नवरात्र व्रत का पारण 11 अक्टूबर को होगा। पं. ब्रजेश ने बताया कि कहीं-कहीं मतांतर होने से मंगलवार को विदाई नहीं की जाती, ऐसे में विदाई 10 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 6 मिनट के बाद श्रवण नक्षत्र में की जा सकती है। इस बार का नवरात्र दस दिन का है।
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