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नेशनल वाइफ डे तीन नवंबर : हम में है दम, नहीं किसी से कम

Wed, 23 Oct 2019 01:39 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 23 Oct 2019 01:39 AM IST
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नेशनल वाइफ डे तीन नवंबर : हम में है दम, नहीं किसी से कम
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हाउस वाइफ नहीं, ‘हाउस मैनेजमेंट मैनेजर’
आज हाउस-वाइफ का मतलब ‘हाउस मैनेजमेंट मैनेजर’ हो गया है। हाउस वाइफ की जिम्मेदारियां वर्किंग वूमेन से कहीं ज्यादा हो गई हैं। हरिओम नगर की ऋचा अग्रवाल कहती हैं कि पूरा दिन अपनी जिम्मेदारियों में बिजी रहती हूं। पति ध्रुव अग्रवाल बिजनेसमैन हैं। सो सुबह से शाम तक घर में खाने-पीने, रख-रखाव, खरीददारी, बच्चों का स्कूल होमवर्क और किचेन सब मेरे ऊपर है। कहीं न कहीं लगता है कि सास और मां की अपेक्षा हाउसवाइफ लाइफ में बहुत सारी जिम्मेदारियां हैं। तब बच्चे पल जाते थे पर आज पालने पड़ते हैं। उसे तो खाने में घर के हर सदस्य का स्वाद और उनकी पूरी दिनचर्या को अपना शेड्यल बना कर चलना होता है। नई पीढ़ी की हाउस वाइफ का ये चेहरा अलग शख्सियत दर्शाता है।
बहुत चेंज आया, बन गई हूं एनर्जी टैंक
सोसाइटी में जिस तरह से चेंज आया है उसने हाउस वाइफ का लाइफ स्टाइल बिल्कुल बदल दिया है। बशारतपुर की लक्ष्मी मिश्रा कहती हैं कि आज हसबैंड घर में पत्नी की राय के बिना खरीददारी तक नहीं करते हैं। घर का डेकोरेशन पेरेन्टस मीटिंग तीज-त्योहार खरीदारी आदि जो कुछ सिर्फ सास-या पति तक सीमित था उसमें आज गृहलक्ष्मी की पसंद नापसंद का पूरा ध्यान रखा जाता है। अपनी सास सुशीला मिश्रा से बहुत कुछ सीखा है लेकिन लगता है कि बच्चों और घर के लिए और कुछ करना चाहिये। हाउस वाइफ का दायरा दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है। हसबैंड घर और बिजनेस के मामले में उनसे राय लेते हैं तो लगता है कि शायद एक हैप्पी आदमी की हैप्पी लाइफ स्टाइल इसी को कहते हैं।
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सुपर मॉडल बन गई हैं हाउस वाइफ
मां और सासू मां के नजरिये में चेंज आने से आज की हाउस वाइफ नई जिम्मेदारियां उठाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। ऐसा मानना है रामजानकीनगर की सरोज त्रिपाठी का। मानती हैं कि
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पिछले सालों में जिस तरह से महिलाओं की सोच-बदली है उससे नई पीढ़ी को फायदा हुआ है। आजकल मां और सास की ओर से बेटी और बहुओं को सलवार-कमीज, गाउन, जींस पहनने और घर संभालने के नजरिये में जो छूट मिली है उसने हाउस वाइफ को सुपर मॉडल बना दिया है। फादर जब-बच्चों की नैपी बदलने में कोई गुरेज नहीं कर रहे हैं तो हाउस वाइफ शेफ से लेकर बच्चों की टीचर तक सारी जिम्मेदारियां बिना किसी खटपट के पूरी कर रही हैं। यह जरूर है हाउस वाइफ को लाइफ में बहुत समझौते करने पड़ते हैं पर फिर भी लाइफ मजेदार लगती है।
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पतियों का नजरिया भी खुला है
हाउस वाइफ आज पति की खुशहाल लाइफ का हिस्सा बन चुकी हैं। यह कहना है तारामंडल इलाके की पूजा सोनकर का। बताती हैं कि बिजनेसमैन पति डॉ. विशाल सोनकर के साथ बच्चों और घर की पूरी जिम्मेदारी उनके ऊपर है। हसबैंड का खुला नजरिया हाउस वाइफ की सुखद लाइफ के लिए सबसे बड़ा मैनेजमेंट है। अगर ऐसा न हो तो पत्नी कभी अच्छी हाउसवाइफ नहीं बन सकती है। घरेलू फैसलों में पत्नी को तवज्जो देना और अपनी लाइफ स्टाइल में पत्नी को जगह देने वाले हसबैंड की पत्नी भी फैमली के लिए बेस्ट बीबी बेस्ट बहू बेस्ट मां और बेस्ट हाउस मैनेजर साबित होती है। घर की ट्रेन के पहिये आराम से ट्रैक पर चलते रहते हैं। पूजा कहती है कि मां रूना देवी से उन्होंने बहुत कुछ सीखा लेकिन वो काफी नहीं था। उन्होंने नये सिरे से प्रयास किया और सुपर सुपर बहू से सुपर मम्मी का सफर आसानी से तय कर पा रही हैं।
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कंप्यूटर और रोबोट जैसी आ गई है तेजी
अंबेश्वरी अपार्टमेंट की रुचि रुंगटा का मानना है कि कल की हाउस वाइफ सिर्फ मां थी, लेकिन आज की हाउस वाइफ में कंप्यूटर दिमाग, रोबोट जैसी एनर्जी, पांच सितारा होटल जैसी कुक और 24 घंटे सेवा देने वाली बन चुकी है। जिसे पति के ड्यूटी पर जाने के बाद और बच्चों को स्कूल से लाने की जिम्मेदारी भी निभानी है। सरोज का कहना है कि आज-पति के पास बिजनेस सबसे बड़ी जिम्मेदारी होने लगी है। ऐसे में घर और बच्चों की जिम्मेदारियों के साथ इंटरटेन में आउटिंग और स्टडी का पूरा ख्याल मिसेस हाउस वाइफ के जिम्मे आ रहा है। किसी हद तक ये सही है लेकिन कई बार स्थिति बोरिंग लगने लगती है और तब लगता है कि हाउस वाइफ जैसे मशीन बन गईं हैं।
संवारा घर बार, अब संवारेंगी अखबार
अपराजिता नेशनल हाउस वाइफ डे कांटेस्ट: महिलाओं के सशक्तीकरण का अभिनव अभियान
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। नेशनल हाउस वाइफ डे (तीन नवंबर) के दिन प्रकाशित होने वाले अमर उजाला अखबार के संपादन की जिम्मेदारी शहर की गृहणियों के हाथों में होगी। गेस्ट एडिटर पैनल के लिए जिले भर से चुनी तीन गृहणी दो नवंबर को (तीन नवंबर का अंक) संपादक की भांति संपादकीय टीम का नेतृत्व करेंगी। तीन नवंबर का अंक इस गेस्ट एडिटर पैनल की पंसद का ही होगा। जिले की गृहणियों को यह अहम दायित्व देकर अमर उजाला साबित करना चाहता है कि गृहणियां किसी से कम नहीं। अपराजिता 100 मिलियन स्माइल अभियान के तहत अमर उजाला नेशनल हाउस वाइफ डे के उपलक्ष्य में विविध आयोजन करने जा रहा है। आयोजनों की यह श्रृंखला आज बुधवार से प्रारंभ होगी और तीन नवंबर तक चलेगी। इस दौरान शहर की गृहणियों पर पुरस्कारों की बरसात भी होगी।
प्रतिदिन प्रकाशित क्विज की विजेताओं में से साक्षात्कार के जरिए चयनित 20 सफल विजेताओं में तीन गेस्ट एडिटर का चुनाव होगा। इन 20 सफल गृहणियों को एक नवंबर को होटल रेडिसन ब्लू में आमंत्रित किया जाएगा। वहां सामान्य स्तर की लिखित परीक्षा और सवाल-जवाब के उपरांत तीन गेस्ट एडिटर का चुनाव होगा। इसके अतिरिक्त गृहिणी का दायित्व संभालते हुए आपने कुछ खास किया हो तो हमें व्हाट्सएप पर लिख भेजें।
क्विज कांटेस्ट की नियम-शर्तें
-यह कांटेस्ट केवल महिलाओं के लिए है
-महिला का विवाहित होना अनिवार्य है
-शैक्षणिक योग्यता स्नातक होनी चाहिए
-उम्र 50 वर्ष से अधिक न हो
- क्विज में उसी दिन के अमर उजाला में प्रकाशित समाचारों से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे। जवाब के विकल्पों में सही पर टिक करना होगा
- 31 अक्तूबर को आखिरी क्विज प्रकाशित होगी
- 20 सफल विजेताओं से तीन गेस्ट एडिटर चुनी जाएंगी
- गेस्ट एडिटर का चुनाव होटल रेडिसन ब्लू में सामान्य लिखित परीक्षा से होगा
-अमर उजाला के पाठकों के अलावा अन्य गृहणियां भी भाग ले सकतीं हैं। उन्हें अमर उजाला में प्रकाशित क्विज फार्मेट की फोटो स्टेट कराकर पूरी तरह से भरकर भेजना होगा।
-एक बार विजेता घोषित होने के बाद अन्य क्विज में आपकी एंट्री नहीं शामिल होगी।
-निर्णायक मंडल का निर्णय अंतिम होगा
तो फिर इतरा कर हसबैंड को सरप्राइज देने को हो जाइए तैयार...
तीन हाउस वाइफ को गेस्ट एडीटर पैनल में शामिल करके अखबार के अतिथि संपादन का गौरवपूर्ण मौका देने के अलावा अमर उजाला गृहिणियों की एक दिली ख्वाहिश भी पूरा करने का माध्यम बनना चाहता है। अमर उजाला ने एक सर्वे के जरिए शहर के मध्यमवर्गीय परिवार की 224 महिलाओं से उनकी दिली ख्वाहिश पूछी। कई और ख्वाहिशों के अलावा बहुमत में यह लब्बोलुआब भी सामने आया कि वे एक दिन-पति और बच्चों से कहना चाहतीं हैं कि चलो आज मैं तुम्हें फाइव स्टार होटल में डिनर कराकर लाती हूं।

मगर क्या कह पाती हैं? नहीं। दरअसल गृहस्थी के खर्चे से जोड़-तोड़ कर बचाए गए रुपये वे यूं ही एक डिनर पर नहीं खर्च कर सकतीं। अमर उजाला और होटल रेडिसन ब्लू नेशनल-हाउस वाइफ डे पर उनकी इस इच्छा को साकार करने का माध्यम भी बनेंगे। क्विज कांटेस्ट के तहत प्रतिदिन चयनित विजेताओं मेें से चार गृहणियों का- चलिए होटल रेडिसन ब्लू कार्यक्रम के लिए चयन किया जाएगा। रेडिसन ब्लू के डायरेक्टर सेल्स एंड मार्केटिंग अभिषेक कुमार सिंह कहते हैं , तो कहने को हो जाएं तैयार- सुनिए जी ! आज हम आपको होटल रेडिसन ब्लू में डिनर कराने ले चलेंगे।
सुनिए जी से चलेंगे तक आखिरी लाइन बोल्ड होगी।
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