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फिजा में गूंजी ‘या हुसैन, या अब्बास’ की सदाएं
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Thu, 06 Oct 2016 08:44 PM IST
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चौथी मोहर्रम पर बसंतपुर से मातमी जुलूस निकाला गया।
- फोटो : Shivharsh Dwivedi
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चौथी मोहर्रम पर अंजुमन हुसैनिया की ओर से इस्लाम की रक्षा और सलामती के लिए इमाम हुसैन और 72 जाबांजों की अजीम कुर्बानी की याद में बृहस्पतिवार को मातमी दस्तों के साथ अलम बरामद हुआ। इस दौरान फिजा में ‘या हुसैन’, ‘या सुहैन’, ‘या अब्बास’ की सदाएं गूंजती रहीं।
यह मातमी जुलूस दोपहर एक बजे बसंतपुर से निकला। इसमें अंजुमन हुसैनिया के सदस्यों ने नोहाख्वानी, सीनाजनी, जजीर व कमा से मातम किया। नौहेख्वानी के फरायज को मिर्जा अली अब्बास, अफरोज आलम, सैफ रिजवी, ताहिर आबिद हुसैन, हसनैन, साबिर हुसैन, मंतजिर हुसैन ने अंजाम दिया। जुलूस मोहम्मद रफत हुसैन की अगुवाई में निकलकर नकी रोड, हालसीगंज, उर्दू बाजार होते हुए घंटाघर पहुंचा। उसके बाद रेती चौक होते हुए इमामबाड़ा आगा शाहबान गीताप्रेस में जाकर संपन्न हुआ। कमा और जंजीर का मातम शादाब, दानिश, मोहसिन, सलमान, अली, अब्बास, ताहा, आमिर, कामिल, उमैद, दिलशाद, मुर्तजा हुसैन, मुसब्बिर, सनी, विक्की आदि ने किया।
घंटाघर में जुलूस को संबोधित करते हुए मोहम्मद मेहंदी ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन का मिशन इस्लाम को इंसानियत का पैगाम देना था। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन को चाहने वाले पूरी दुनिया में मौजूद हैं, जबकि यजीद का नाम लेने वाला दुनिया में कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में यदि आतंकवाद की खिलाफत न होती तो शायद दुनिया में मुसलमानों से शक की निगाह से देखा जाता। जुलूस में सैयद एजाज हुसैन, आशफाक हैदर, वाकर हैदर, वसी रजा, जिम्मी हैदर, राजा, नायाब हैदर, मसूद, सिब्ते हसन, माहताब, आफताब आदि मौजूद रहे।
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यह मातमी जुलूस दोपहर एक बजे बसंतपुर से निकला। इसमें अंजुमन हुसैनिया के सदस्यों ने नोहाख्वानी, सीनाजनी, जजीर व कमा से मातम किया। नौहेख्वानी के फरायज को मिर्जा अली अब्बास, अफरोज आलम, सैफ रिजवी, ताहिर आबिद हुसैन, हसनैन, साबिर हुसैन, मंतजिर हुसैन ने अंजाम दिया। जुलूस मोहम्मद रफत हुसैन की अगुवाई में निकलकर नकी रोड, हालसीगंज, उर्दू बाजार होते हुए घंटाघर पहुंचा। उसके बाद रेती चौक होते हुए इमामबाड़ा आगा शाहबान गीताप्रेस में जाकर संपन्न हुआ। कमा और जंजीर का मातम शादाब, दानिश, मोहसिन, सलमान, अली, अब्बास, ताहा, आमिर, कामिल, उमैद, दिलशाद, मुर्तजा हुसैन, मुसब्बिर, सनी, विक्की आदि ने किया।
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घंटाघर में जुलूस को संबोधित करते हुए मोहम्मद मेहंदी ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन का मिशन इस्लाम को इंसानियत का पैगाम देना था। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन को चाहने वाले पूरी दुनिया में मौजूद हैं, जबकि यजीद का नाम लेने वाला दुनिया में कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में यदि आतंकवाद की खिलाफत न होती तो शायद दुनिया में मुसलमानों से शक की निगाह से देखा जाता। जुलूस में सैयद एजाज हुसैन, आशफाक हैदर, वाकर हैदर, वसी रजा, जिम्मी हैदर, राजा, नायाब हैदर, मसूद, सिब्ते हसन, माहताब, आफताब आदि मौजूद रहे।
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