{"_id":"0a230577ca8ef91925b3b1066a47de77","slug":"more-than-50-percent-people-are-depressed-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पचास फीसदी से अधिक लोग अवसादग्रस्त ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पचास फीसदी से अधिक लोग अवसादग्रस्त
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 24 Feb 2016 02:18 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहर के पचास फीसदी लोग या तो डिप्रेशन के शिकार हैं या फिर उसके घेरे में हैं। जो पूरी तरह डिप्रेशन की जद में हैं उनकी तादाद भी 33 फीसदी है। यह तथ्य सामने आया है मेडिकल कॉलेज के साइकियाट्री विभाग की ओर से कराए गए सर्वे में। दुखद यह है कि सर्वे के बाद जिन लोगों को डिप्रेशन का शिकार पाया गया, उनमें सर्वाधिक 60 फीसदी तादादा युवाओं की है।
इलाज के लिए काफी संख्या आ रहे डिप्रेशन रोगियों की मौजूदा स्थिति जानने के लिए साइकियाट्री विभाग ने दस प्रश्नों की प्रश्नावली तैयार कराई। इनमें जीवन से जुड़े उन पहलुओं को शामिल किया गया, जिससे किसी व्यक्ति संपूर्ण सोच का आकलन किया जा सके। यह भी तय किया गया कि यह सर्वे 15 से 60 वर्ष के उम्र तक के लोगों पर ही किया जाएगा। इसके पीछे तर्क यह था कि प्रश्नावली में दिए गए सवालों का सटीक उत्तर न तो बच्चे दे सकेंगे और न ही अति बुजुर्ग। इसके लिए एक संस्था के माध्यम से शहर के विभिन्न इलाकों के 359 लोगों से प्रश्नावली का जवाब लिया गया, जिसमें से 183 लोगों के पांच से अधिक जवाब ऐसे थे, जो उन्हें डिप्रेशन के दायरे में साबित करने के लिए पर्याप्त थे। प्रश्नावली के पांच आधार सवाल (पहले तीन और अंतिम दो) जिन पर सहमति जताने पर व्यक्ति को टोटल डिप्रेशन का शिकार मान लिया जाता है, उनकी संख्या भी 120 यानी 33 फीसदी रही।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह तादाद देश आंकड़ों के मुकाबले दस फीसदी अधिक है क्योंकि देशव्यापी आंकड़ा 23 से 25 फीसदी के बीच है। सर्वे के दौरान करीब 30 फीसदी लोग ऐसे पाए गए, जिनके मन में समय-समय पर आत्महत्या के विचार आते रहते हैं। इनमें 20 प्रतिशत तो प्रयास के दौर में भी पहुंच जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक आत्महत्या की प्रवृत्ति का यह आंकड़ा देशव्यापी आंकड़े के मुताबिक है।
विज्ञापन
प्रश्नावली जिससे आप भी कर सकते हैं आकलन
पोषण का असंतुलन है बड़ी वजह
आमतौर पर बदल रही जीवन शैली से मिल रहे तनाव को ही डिप्रेशन की मुख्य वजह माना जाता है, लेकिन असली वजह सिर्फ यही नहीं है। प्रश्नावली पर अध्ययन के दौरान डिप्रेशन के दायरे में पाए गए लोगों में ज्यादातर में पोषण का असंतुलन पाया गया। किसी में विटामिन, प्रोटीन व खनिज तत्व की अधिकता पाई गई तो किसी में उसकी कमी। यहां तक एक ही व्यक्ति में इन तत्वों की कमी और अधिकता के मामले में भी सामने आए। व्यक्ति में पनपे डिप्रेशन के इतिहास में जाने पर पता चला कि उनके अंदर यह स्थिति तभी आई, जब शरीर में तत्वों का असंतुलन शुरू हो गया। ऐसे में यह साबित हुआ कि डिप्रेशन की एक बड़ी वजह पोषण का असंतुलन भी है।
- डॉ. आमिल एच खान, प्रवक्ता, साइकियाट्री विभाग, मेडिकल कॉलेज
विज्ञापन
इलाज के लिए काफी संख्या आ रहे डिप्रेशन रोगियों की मौजूदा स्थिति जानने के लिए साइकियाट्री विभाग ने दस प्रश्नों की प्रश्नावली तैयार कराई। इनमें जीवन से जुड़े उन पहलुओं को शामिल किया गया, जिससे किसी व्यक्ति संपूर्ण सोच का आकलन किया जा सके। यह भी तय किया गया कि यह सर्वे 15 से 60 वर्ष के उम्र तक के लोगों पर ही किया जाएगा। इसके पीछे तर्क यह था कि प्रश्नावली में दिए गए सवालों का सटीक उत्तर न तो बच्चे दे सकेंगे और न ही अति बुजुर्ग। इसके लिए एक संस्था के माध्यम से शहर के विभिन्न इलाकों के 359 लोगों से प्रश्नावली का जवाब लिया गया, जिसमें से 183 लोगों के पांच से अधिक जवाब ऐसे थे, जो उन्हें डिप्रेशन के दायरे में साबित करने के लिए पर्याप्त थे। प्रश्नावली के पांच आधार सवाल (पहले तीन और अंतिम दो) जिन पर सहमति जताने पर व्यक्ति को टोटल डिप्रेशन का शिकार मान लिया जाता है, उनकी संख्या भी 120 यानी 33 फीसदी रही।
विज्ञापन
विशेषज्ञों के मुताबिक यह तादाद देश आंकड़ों के मुकाबले दस फीसदी अधिक है क्योंकि देशव्यापी आंकड़ा 23 से 25 फीसदी के बीच है। सर्वे के दौरान करीब 30 फीसदी लोग ऐसे पाए गए, जिनके मन में समय-समय पर आत्महत्या के विचार आते रहते हैं। इनमें 20 प्रतिशत तो प्रयास के दौर में भी पहुंच जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक आत्महत्या की प्रवृत्ति का यह आंकड़ा देशव्यापी आंकड़े के मुताबिक है।
विज्ञापन
प्रश्नावली जिससे आप भी कर सकते हैं आकलन
- क्या आपका मन चिड़चिड़ा रहता है?
- क्या आनंद वाले कार्यों में आनंद नहीं आता?
- क्या आपके भूख या वजन में परिवर्तन हुआ है?
- क्या आपको नींद कम या अधिक आती है?
- क्या आपको आत्मग्लानि होती है?
- क्या आपको ध्यान लगाने में या याददाश्त में दिक्कत है?
- क्या आपको बहुत सुस्ती व थकान महसूस होती है?
- क्या आपको बेचैनी व उपलक्षण महसूस होती है?
- क्या आपको निराशाजनक विचार आते हैं?
- क्या आपके आपके मन में आत्महत्या के विचार आते हैं?
पोषण का असंतुलन है बड़ी वजह
आमतौर पर बदल रही जीवन शैली से मिल रहे तनाव को ही डिप्रेशन की मुख्य वजह माना जाता है, लेकिन असली वजह सिर्फ यही नहीं है। प्रश्नावली पर अध्ययन के दौरान डिप्रेशन के दायरे में पाए गए लोगों में ज्यादातर में पोषण का असंतुलन पाया गया। किसी में विटामिन, प्रोटीन व खनिज तत्व की अधिकता पाई गई तो किसी में उसकी कमी। यहां तक एक ही व्यक्ति में इन तत्वों की कमी और अधिकता के मामले में भी सामने आए। व्यक्ति में पनपे डिप्रेशन के इतिहास में जाने पर पता चला कि उनके अंदर यह स्थिति तभी आई, जब शरीर में तत्वों का असंतुलन शुरू हो गया। ऐसे में यह साबित हुआ कि डिप्रेशन की एक बड़ी वजह पोषण का असंतुलन भी है।
- डॉ. आमिल एच खान, प्रवक्ता, साइकियाट्री विभाग, मेडिकल कॉलेज