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इतना खाओ कि यजमान दोबारा न लें कथा करवाने का नाम
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चंपा देवी पार्क में राम कथा सुनाते मोरारी बापू।
इतना खाओ कि यजमान दोबारा न लें कथा करवाने का नाम
गोरखपुर। चंपा देवी पार्क में चल रही राम कथा में रविवार को मोरारी बापू ने व्यासपीठ से कथा में आए श्रद्धालुओं से प्रसाद (भोजन) लेने की अपील करते हुए कहा कि आप लोग इतना खाओ कि यजमान दोबारा कथा करवाने का नाम न लें।
कथा समापन के पश्चात अचानक ही मोरारी बापू ने आयोजकों से पूछ लिया कि आज प्रसाद में क्या है। इस दौरान उन्हें रविवार के प्रसाद का मेन्यू दिया गया। बापू ने व्यासपीठ से ही श्रद्धालुओं को मेन्यू के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही उन्होंने यजमानों पर चुटकी लेते हुए श्रद्धालुओं से कहा कि किसी को भी प्रसाद खाए बगैर नहीं जाना है। आप लोग इतना प्रसाद खाओ की यजमान फिर कभी कथा कराने का नाम न ले सके।
ये था मेन्यू
प्रसाद में सामान्य लोगों के लिए आलू-बोड़ा की सब्जी, लौकी की सूखी सब्जी, अरहर दाल फ्राई, पूड़ी, रोटी, चावल, पापड़, चटनी, अचार एवं मीठे में दिलखुसार बर्फी मेन्यू में शामिल था।
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फलाहार की थी व्यवस्था
शनिवार को महाष्टमी होने के कारण बड़ी संख्या में लोगों का व्रत था। ऐसे में कथा के बाद व्रतियों के लिए फलाहार की व्यवस्था की गई थी। फलाहार में आलू-दही की सब्जी, कुट्टू के आटे की पूड़ी, मूंगफली, आलू फ्राई, सिंघाड़े के आटे का हलवा शामिल था।
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गोरखपुर। चंपा देवी पार्क में चल रही राम कथा में रविवार को मोरारी बापू ने व्यासपीठ से कथा में आए श्रद्धालुओं से प्रसाद (भोजन) लेने की अपील करते हुए कहा कि आप लोग इतना खाओ कि यजमान दोबारा कथा करवाने का नाम न लें।
कथा समापन के पश्चात अचानक ही मोरारी बापू ने आयोजकों से पूछ लिया कि आज प्रसाद में क्या है। इस दौरान उन्हें रविवार के प्रसाद का मेन्यू दिया गया। बापू ने व्यासपीठ से ही श्रद्धालुओं को मेन्यू के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही उन्होंने यजमानों पर चुटकी लेते हुए श्रद्धालुओं से कहा कि किसी को भी प्रसाद खाए बगैर नहीं जाना है। आप लोग इतना प्रसाद खाओ की यजमान फिर कभी कथा कराने का नाम न ले सके।
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ये था मेन्यू
प्रसाद में सामान्य लोगों के लिए आलू-बोड़ा की सब्जी, लौकी की सूखी सब्जी, अरहर दाल फ्राई, पूड़ी, रोटी, चावल, पापड़, चटनी, अचार एवं मीठे में दिलखुसार बर्फी मेन्यू में शामिल था।
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फलाहार की थी व्यवस्था
शनिवार को महाष्टमी होने के कारण बड़ी संख्या में लोगों का व्रत था। ऐसे में कथा के बाद व्रतियों के लिए फलाहार की व्यवस्था की गई थी। फलाहार में आलू-दही की सब्जी, कुट्टू के आटे की पूड़ी, मूंगफली, आलू फ्राई, सिंघाड़े के आटे का हलवा शामिल था।