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राम कथा का पांचवा दिन:‘रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई’
Thu, 10 Oct 2019 04:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 10 Oct 2019 04:05 AM IST
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मोरारी बापू
- फोटो : Amar Ujala
गोरखनाथ मंदिर और श्रीराम कथा प्रेमयज्ञ समिति की ओर से ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की स्मृति में आयोजित राम कथा के पांचवे दिन बुधवार को चंपा देवी पार्क में मोरारी बापू ने कहा कि राम कथा का आनंद तभी है जब वक्ता और श्रोता दोनों सुर, लय, ताल मिलाकर कथा का रसपान करें।
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नौ दिवसीय आयोजन में प्रेम की ही वार्ता होगी। प्रेम प्रकट हो जाए तो परमात्मा खुद प्रकट हो जाएंगे प्रेम के बिना जीवन का कोई अर्थ नहीं है। ‘ रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई’ चौपाई के माध्यम से बताया कि प्रभु श्रीराम स्वयं सत्य के कब्जे में है। परंतु सत्य भगवान श्रीकृष्ण के कब्जे में है, क्योंकि कृष्ण महासत्य है।
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बापू ने प्रसंग को विस्तारित करते हुए कहा कि विषयी लोग सदैव असत्य के कब्जे में रहते है। वे सदैव झूठ ही बोलते है। उन पर असत्य हावी हो जाता है। साधक सत्य व असत्य दोनों के कब्जे (वश) में होते हैं। इसलिए जब साधक पर सत्य हावी रहता है, तब तक तो ठीक है परंतु असत्य हावी होते ही उसे समस्या होती है। वह ना चाहते हुए भी असत्य बोलने लगता है।
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इसके पूर्व बापू ने नवनाथ की नाथ धारा को प्रणाम करते हुए कहा कि गुरू गोरखनाथ की जो वाणी है, वचन हैं वे इस काल में भी बहुत प्रासंगिक हैं। भले ही योग बहुत पुराना है, मगर गोरक्षवाणी आज के समय में भी अति प्रासंगिक है। आज जो कथा मैं सुना रहा हूं उसका कोई बहुत प्रमाणिक इतिहास तो नहीं है। मगर जब किसी गूढ़ बात का ऐतिहासिक प्रमाण ना मिले तो बुद्ध पुरूष के अंत:करण के प्रवृति को ही प्रमाण माना गया है। साधु का भजन ही सबसे बड़ा प्रमाण माना गया है।
बापू ने कहा संसार में एक वक्त ऐसा आया कि जब पांच वस्तुएं मर्यादा से बाहर हो चुकीं थीं। अत्याचार, रोग, दारिद्र तन, मन, धन , विपरीत विचारधारा वालों ने सनातन वैदिक परंपरा का दुष्प्रचार शुरू कर दिया था। समाज परद्रोही और अपवादी हो गया था। तब महादेव भोलेनाथ चिंतित होकर ब्रम्हांड रचयिता ब्रम्हा जी से बोले, हम त्रिदेव, योग, समाधि, ध्यान इत्यादि में सदा लीन रहते हैं।
आज समाज में भ्रष्टाचार, रोग महारोग, दारिद्र, दुष्प्रचार के तत्व व्याप्त हो गए हैं। जिससे ब्रम्हांड का वातावरण अत्यंत दूषित हो चुका है। अब विश्व को एक नए नाथ प्राकट्य की आवश्यकता है। तब त्रिदेव ने विश्व कल्याण के लिए नवनाथ का अवतार धारण किया। ये नवनाथ और कोई नही देवादि देव महादेव भोलेनाथ स्वयं हैं।
बापू ने कहा कि धर्म के मूल-मार्ग की आलोचना कभी नहीं करनी चाहिए। मगर जब धर्म का मूल मार्ग गड्ढा युक्त हो जाए तो समय के साथ इसमें संशोधन अति आवश्यक है। बापू ने कहा कुछ लोग धर्म की गलत व्याख्या कर दुष्कर्म और दुष्प्रचार करने लगते हैं तब धर्म व विश्व कल्याण के लिए ऐसे नवनाथ की आवश्यकता होती हैै।
जो समस्त संसार को सत्य एवं नीति के मार्ग पर ले जाएं। बापू ने ऐसे कुधर्मी लोगों को ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ पहने हुए लोग कहा। कथा के अंत में आरती के दौरान यजमान जालान परिवार के साथ इस्लाम धर्म के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
कौमी एकता कमेटी ने बापू को भेंट की कुरान ए मजीद
गोरखपुर।कौमी एकता कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशफाक हुसैन मेकरानी की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने व्यासपीठ पर जाकर मोरारी बापू से भेंट की। इस दौरान उन्हें कुरान ए मजीद के अंग्रेजी और हिंदी अनुवाद की प्रतियां सौंपी। बापू ने इन्हें स्वीकार कर कौमी एकता कमेटी के सदस्यों को प्रसाद के रूप में अंग वस्त्र भेंट किया।
इंजीनियर मो. मिनतुल्लाह ने बताया कि दो वर्ष पहले लखनऊ में आयोजित बापू की रामकथा के दौरान भी मुस्लिम समुदाय के लोगों का एक दल उनसे मिलने गया था। अशफाक मेकरानी ने कहा कि बापू सभी धर्मों का सम्मान करने की नसीहत देते हैं। रामकथा के दौरान भी ख्वाजा गरीब नवाज, खुमार बाराबंकी की गजल को रामकथा के जुड़े प्रसंगों की व्याख्या करने के लिए जोड़ते हैं।
यही वजह है की समाज के लोगों में उनकी पूछ ज्यादा है। इस अवसर पर डॉ. राशिद हुसैन, अरशद अहमद, सेराज शानू आदि मौजूद रहे।
मोरारी बापू ने भी दी विजयदशमी की बधाई
रामकथा के दौरान मोरारी बापू ने भी शहरवासियों को विजयदशमी की बधाई दी। कहा कि आज भगवान राम के विजय का दिन है। दुनिया अपनी मानसिकता से रावण को मारने का प्रण ले। इस लक्ष्य को हासिल करते ही मन में राम के प्रकट होने का उल्लास आप खुद ही महसूस करेंगे।
... दिल में तुम्हें बिठा के
कथा के दौरान मोरारी बापू ने कहा कि एक संत (योगी आदित्यनाथ) ने पूरे शहर का कायाकल्प कर दिया है। यहां के लोगों में रामकथा को उत्साह देखते ही बनता है। कथा के आखिरी दिन तक मैं सबको किडनैप कर लूंगा (मुस्कुराते हुए) । इसके बाद बापू ने बॉलीवुड गीत... दिल में तुम्हें बिठा के, कर लूंगी मैं बंद आंखे गीत सुना श्रद्धालुओं से अपने प्रेम को प्रदर्शित किया।
वहीं ‘इन्हीं लोगों ने ले लिन्हा दुपट्टा’, ‘निगाहें मिलाने को जी चाहता है’ सरीखे गीतों का कथा के दौरान सात्विक अर्थों में इस्तेमाल करते हुए कथा से जोड़ा।
... जब मोरारी बापू ने बजाया डमरु
संत सन्यासियों की ओर से किए जाने वाले ‘अलख निरंजन’ के जाप की महत्ता को व्यासपीठ से बताने के दौरान मंच के दाई ओर बैठे एक साधु पर बापू की नजर पड़ी तो उन्होंने उन्हें झट से उन्हें मंच पर बुला लिया। एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में डमरू लिए जब सन्यासी मंच पर पहुंचे तो बापू ने उनसे डमरू बजाने का आग्रह किया और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। इस दौरान बापू सन्यासी के डमरू को लेकर बजाने लगे।