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शान-ओ-शौकत से निकला रवायती शाही जुलूस
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 07 Oct 2016 08:44 PM IST
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कड़ी सुरक्षा के बीच मोहर्रम का जुलूस निकाला गया।
- फोटो : Rajesh Kumar
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पांचवीं मोहर्रम पर इमामबाड़ा इस्टेट का रवायती शाही जुलूस शुक्रवार को पूरी शान-ओ-शौकत से निकला। जुलूस की अगुवाई सज्जादानशीन मियां साहब फ र्रुख अदनान शाह ने की। रवायत और दस्तूर के मुताबिक मियां साहब सफेद पैरहन के साथ पारंपरिक पोशाक में थे तो उनके इर्दगिर्द नीली और सफेद वर्दी में अंगरक्षक। फौजी अंदाज में बावर्दी लोगों के साथ-साथ शाही परचम, घोड़े और बैंड-बाजे का साथ मौके को खास बना रहा था। रास्ते में जगह-जगह जुलूस का स्वागत किया गया। छतों पर मौजूद लोगों ने फूल बरसाकर मियां साहब का इस्तकबाल किया।
इमामबाड़ा इस्टेट के पश्चिमी गेट से शुरू हुआ जुलूस कमाल शहीद मजार, बक्शीपुर, अलीनगर, बेनीगंज, जाफरा बाजार होते हुए कर्बला पहुंचा। परंपरा के अनुसार बक्शीपुर से शुरू हुआ भगवती का जुलूस भी इसी जुलूस का हिस्सा बन गया। वहां इमाम हुसैन और उनके साथियों को याद करते हुए खिराजे अकीदत पेश की गई। शाही जुलूस के यहां मुक्तसर से ठहराव के बीच भगवती का जुलूस आगे बढ़ता गया।
इसके बाद शाही जुलूस के घासीकटरा, मिर्जापुर होते हुए खूनीपुर चौराहे पहुंचने पर अंजुमन इस्लामिया के प्रधानाचार्य मिर्जा रफीउल्लाह बेग ने मियां साहब का इस्तकबाल किया। यहां से आगे बढ़कर जुलूस कोतवाली, मान चौराहा होते हुए दक्षिणी गेट से इमामबाड़ा इस्टेट में दाखिल हुआ। पुरखों को याद करते हुए मियां साहब ने फातिहा पढ़ने के बाद जुलूस मुकम्मल होने का एलान करते हुए पुलिस और प्रशासन की टीम के साथ जुलूस में सहयोग करने वाले हर शख्स का आभार जताया। आयोजन में मियां साहब के दोनों पुत्र सैयद आतिफ अली व अयान अहमद, जुल्फिकार अहमद, सैयद इरशाद अहमद, ख्वाजा शमशुद्दीन, मुमताज अहमद, कैफ अख्तर, आफताब अहमद, मंजूर आलम, हाजी अमीरूद्दीन, शकील शाही, अयाज हुसैन, अजहर समी आदि का सक्रिय योगदान रहा।
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इसके अलावा बृहस्पतिवार की देर रात घासीकटरा से सुल्तान अहमद, खोखरटोला से अब्दुल वहीद, रहमतनगर से इमरान अहमद, मोहनलालपुर से शमीम अहमद, गाजीरौजा से शमशुल हुआ अंसारी, कसाई टोला से सलीम अहमद और इलाहीबाग से फैसल रेहान के नेतृत्व में जुलूस निकाला गया।
मातमी जुलूस खूनीपुर चौराहे से अंजुमन इस्लामिया पहुंचा तो वहां हल्लौर से आए नफीस सैयद ने इमाम हुसैन की शहादत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मात्र अपने घर के कुछ लोगों को लेकर जिनकी कुल तादाद 72 थी, इमाम हुसैन मदीने के लिए निकल पड़े और दूसरी मोहर्रम को इराक के करबला पहुंचे। जहां यजीद ने10 मोहर्रम सन् 61 हिजरी को इमाम हुसैन और उनके साथियों को शहीद कर दिया। हुसैन शहीद तो हो गए लेकिन दुनिया को सब्र व इन्सानियत का पैगाम दे गए।
जुलूस में कमियाब बब्लू, मोहम्मद हैदर शब्लू, बशारत, मुमताज़ और फैजी ने अपने कलाम से माहौल को और गमगीन बना दिया। जिशान हैदर चिक्के, कामियाब, अरमान, शादाब के अलावा कस्बा हल्लौर से आए लोगों ने कमां और जंजीरों का मातम किया। यह जुलूस अंजुमन इस्लामिया, नखास चौक से रेती चौक होते हुए गीताप्रेस रोड स्थित इमामबाड़ा आगा साहेबान में पहुंचा जहां हल्लौर एसोसिएशन की जानिब से मजलिसे हुई।
इस अवसर पर एसोसिएशन के अध्यक्ष कैसर रिजवी, अली मोहम्मद, हाजी नायाब हैदर, अनवर अब्बास, अली जमाल नासिर, कमाल रिजवी, सुल्तान हैदर, कमर अब्बास, तनवीर रिजवी, अकील अब्बास, मुनव्वर अब्बास रिजवी आदि शामिल रहे।
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इमामबाड़ा इस्टेट के पश्चिमी गेट से शुरू हुआ जुलूस कमाल शहीद मजार, बक्शीपुर, अलीनगर, बेनीगंज, जाफरा बाजार होते हुए कर्बला पहुंचा। परंपरा के अनुसार बक्शीपुर से शुरू हुआ भगवती का जुलूस भी इसी जुलूस का हिस्सा बन गया। वहां इमाम हुसैन और उनके साथियों को याद करते हुए खिराजे अकीदत पेश की गई। शाही जुलूस के यहां मुक्तसर से ठहराव के बीच भगवती का जुलूस आगे बढ़ता गया।
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इसके बाद शाही जुलूस के घासीकटरा, मिर्जापुर होते हुए खूनीपुर चौराहे पहुंचने पर अंजुमन इस्लामिया के प्रधानाचार्य मिर्जा रफीउल्लाह बेग ने मियां साहब का इस्तकबाल किया। यहां से आगे बढ़कर जुलूस कोतवाली, मान चौराहा होते हुए दक्षिणी गेट से इमामबाड़ा इस्टेट में दाखिल हुआ। पुरखों को याद करते हुए मियां साहब ने फातिहा पढ़ने के बाद जुलूस मुकम्मल होने का एलान करते हुए पुलिस और प्रशासन की टीम के साथ जुलूस में सहयोग करने वाले हर शख्स का आभार जताया। आयोजन में मियां साहब के दोनों पुत्र सैयद आतिफ अली व अयान अहमद, जुल्फिकार अहमद, सैयद इरशाद अहमद, ख्वाजा शमशुद्दीन, मुमताज अहमद, कैफ अख्तर, आफताब अहमद, मंजूर आलम, हाजी अमीरूद्दीन, शकील शाही, अयाज हुसैन, अजहर समी आदि का सक्रिय योगदान रहा।
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इसके अलावा बृहस्पतिवार की देर रात घासीकटरा से सुल्तान अहमद, खोखरटोला से अब्दुल वहीद, रहमतनगर से इमरान अहमद, मोहनलालपुर से शमीम अहमद, गाजीरौजा से शमशुल हुआ अंसारी, कसाई टोला से सलीम अहमद और इलाहीबाग से फैसल रेहान के नेतृत्व में जुलूस निकाला गया।
जगह-जगह जुलूस का भव्य स्वागत हुआ
मियां साहब के नेतृत्व में इमामबाड़ा इस्टेट से शुरू हुए शाही जुलूस का जगह-जगह स्वागत किया गया। बाजार में व्यापारी संगठन के लोग भी जुलूस के स्वागत के लिए आगे आए। कई जगह मजहबी सीमाओं में बंधे बिना लोगों की आयोजन में शिरकत से सर्व-धर्म-समभाव की तस्वीर दिखी। इमामबाड़ा इस्टेट के पश्चिमी गेट पर मोहम्मद ईसा खां, असलम उर्फ सन्नू, शमीम अख्तर आदि ने, उत्तरी गेट पर डॉ. के शर्मा, जैनुल आबदीन, मोहम्मद नदीम, मोहम्मद शब्बू, फिरोज अहमद आदि ने, कमाल शहीद की मजार पर डॉ. मुमताज खान, हाफिज अब्दुर्रहमान, शमशेर अली, इरशाद अहमद सिद्दीकी, अल्लाह बक्श, परवेज खान आदि ने, बक्शीपुर में राजीव रस्तोगी, शिव गोविंद आदि ने चरनलाल चौक पर इमामबाड़ा मुतवल्लियान कमेटी के अध्यक्ष इरशाद अहमद, आफताब अहमद, कैफ अख्तर आदि ने, बेनीगंज चौराहे पर रफत, जफर, मतीउर्रहमान, सगन, अख्तर, रोहित, कर्बला के मैदान के पास मोइनुद्दीन, जफर आफताब, मोहम्मद तलहा, इकबाल अहमद आदि ने स्वागत किया। जाफरा बाजार में इरशाद अहमद के नेतृत्व में लोगों ने स्वागत के दौरान कबूतर उड़ाया।इंसानियत का पैगाम दे गया मातमी जुलूस
अंजुमन हैदरी हल्लौर का पांचवी मोहर्रम का जंजीरी मातमी जुलूस मोहल्ला खूनीपुर से निकला। इससे पहले महिलाओं द्वारा मजलिस व मातम किया गया। जुलूस के इंतजार में लोग सड़कों और गलियों में छतों पर जंजीर, कमा और छोटी तलवार का मातमी जुलूस देखने के लिए जमे रहे। इकबाल हुसैन रिज़वी द्वारा स्थापित हल्लौर एसोसिएशन के बैनर तले अपनी 47 साल पुरानी परंपरा को कायम रखते हुए निकले इस जुलूस के दौरान जंजीरी और कमा का मातम देख अकीतमंदों की आंखें नम हो गईं। हर तरफ ‘या हुसैन’ की सदाएं गूंज रही थीं।मातमी जुलूस खूनीपुर चौराहे से अंजुमन इस्लामिया पहुंचा तो वहां हल्लौर से आए नफीस सैयद ने इमाम हुसैन की शहादत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मात्र अपने घर के कुछ लोगों को लेकर जिनकी कुल तादाद 72 थी, इमाम हुसैन मदीने के लिए निकल पड़े और दूसरी मोहर्रम को इराक के करबला पहुंचे। जहां यजीद ने10 मोहर्रम सन् 61 हिजरी को इमाम हुसैन और उनके साथियों को शहीद कर दिया। हुसैन शहीद तो हो गए लेकिन दुनिया को सब्र व इन्सानियत का पैगाम दे गए।
जुलूस में कमियाब बब्लू, मोहम्मद हैदर शब्लू, बशारत, मुमताज़ और फैजी ने अपने कलाम से माहौल को और गमगीन बना दिया। जिशान हैदर चिक्के, कामियाब, अरमान, शादाब के अलावा कस्बा हल्लौर से आए लोगों ने कमां और जंजीरों का मातम किया। यह जुलूस अंजुमन इस्लामिया, नखास चौक से रेती चौक होते हुए गीताप्रेस रोड स्थित इमामबाड़ा आगा साहेबान में पहुंचा जहां हल्लौर एसोसिएशन की जानिब से मजलिसे हुई।
इस अवसर पर एसोसिएशन के अध्यक्ष कैसर रिजवी, अली मोहम्मद, हाजी नायाब हैदर, अनवर अब्बास, अली जमाल नासिर, कमाल रिजवी, सुल्तान हैदर, कमर अब्बास, तनवीर रिजवी, अकील अब्बास, मुनव्वर अब्बास रिजवी आदि शामिल रहे।