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धंधा मंदा है साहब... 

Sat, 12 Nov 2016 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Sat, 12 Nov 2016 01:19 AM IST
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Merchants are disappointed due to ban on 500-1000 rupees note
रुपए
बड़े नोटों पर बैन के असर से बाजार अब भी उबर नहीं सका है। बिक्री काफी कम होने से व्यापारी परेशान हैं। पिछले दो दिनों से नुकसान झेल रहे व्यापारियों को आगे भी धंधा मंदा रहने की आशंका है। बड़े नोटों पर बैन से छोटे कामगारों के परिवारों के भूखे सोने की नौबत आ गई है तो वहीं बड़े व्यापारी दुकान का खर्च भी न निकलता देखकर निराश हैं।
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दवा के व्यापारी हों या फिर किराना के दुकानदार, बड़े नोटों पर बैन ने सभी की कमर तोड़ दी है। इनका कहना है कि सरकार ने बड़े नोट स्वीकार न करने का आदेश दिया है और लोगों के पास छोटे नोट हैं नहीं। ऐसे में बिक्री बेहद कम हो गई है। पुराने जानकार बड़े नोट लेकर सामान लेने आ रहे हैं तो व्यवहार की मजबूरी में सामान उधार देना पड़ रहा है। दुकान पर बिक्री का आलम यह है कि इससे खर्च निकलना ही मुश्किल हो गया है। यही हाल रहा तो दुकान पर काम करने वालों की मजदूरी भी अपनी जेब से चुकानी पड़ेगी।
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वहीं फुटपाथ पर अपना धंधा चलाने वालों के सामने पेट भरने का संकट खड़ा हो गया है। एडी कन्या इंटर कॉलेज के सामने बांस के सामान बनाकर बेचने वाले सोनू, जग्गू, मक्खू आदि के परिवारों में छोटे नोट न होने के चलते पेट काटना शुरू कर दिया है। इनमें से कई के डेरे में रात को खाना नहीं पकाया। वहीं शुक्रवार को भी इनके सामान नहीं बिके।
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व्यापारियों की सुविधा का ध्यान रखना था
लिनोलियम की दुकान है। पिछले दो दिनों से बिक्री थम र्गई है। कामगारों का वेतन, चाय-नाश्ते आदि पर जो खर्च आता है वह भी इस माह निकलता नजर नहीं आ रहा है। सरकार को मिलने वाले राजस्व का 87 फीसदी हिस्सा व्यापारियों से ही आता है। ऐसे में सरकार को व्यापारियों की सुविधा और सहूलियत पर भी ध्यान देना चाहिए था। अचानक उठाए गए इस कदम से व्यापारियों में भय का माहौल है।
- प्रकाश नारायण पांडेय, व्यापारी

एक्का-दुक्का ग्राहक ही आ रहे
जबसे बड़े नोटों पर बैन लगा है तबसे दुकान पर एक्का-दुक्का ग्राहक ही आ रहे हैं। इसका असर बिक्री पर सीधे तौर पर पड़ा है। बिक्री में कई गुना गिरावट आई है। आलम यह है कि दुकान का बिजली बिल और अन्य खर्चा भी इस तरह की दुकानदारी से नहीं निकल पाएगा। एकाध को छोड़ दें तो बाकी आइटम उधार ही बिके हैं। हालांकि, कुछ ग्राहकों ने कार्ड से पेमेंट करके सामान खरीदा, लेकिन ऐसे ग्राहकों की संख्या काफी कम है।
- अजय मल्ल, इलेक्ट्रॉनिक शोरूम

भरोसा है हो जाएगी नुकसान की भरपाई
बड़े नोटों पर बैन के चलते दुकान पर ग्राहकों की संख्या कम हो गई है। बिक्री की बात करें तो करीब 80 फीसदी गिरावट आई है। नुकसान तो हो रहा है लेकिन भरोसा है कि इसकी भरपाई हो जाएगी। पीएम ने सराहनीय कदम उठाया है। ऐसे में मेरा भी नैतिक समर्थन उनको है। उम्मीद करता हूं वह आगामी योजनाओं के जरिए जनता को हुए नुकसान की भरपाई कर देंगे। सरकार की इस कार्रवाई की जितनी सराहना की जाए कम ही है।

- शैलेश कुमार पांडेय, कंप्यूटर पार्ट्स व्यापारी

कपड़ा कारोबार को भी झटका
कपड़े का बाजार लग्न के सीजन में कभी इतना मंदा नहीं रहा। लग्न की तैयारी पहले से करके रखी थी। कपड़ों की व्यापक रेंज मंगाई थी, लेकिन बड़े नोटों पर बैन से कपड़ा कारोबार को करारा झटका लग गया है। लोग पास में हजारों होने के बाद भी कपड़े नहीं खरीद पा रहे। कई ग्राहक बड़े नोट लेकर खरीदारी करने आए, लेकिन सरकार की ओर से इनको प्रचलन से बाहर करने के चलते दुकान पर इन नोटों को स्वीकार नहीं किया।
-योगेंद्र यादव, कपड़ा व्यापारी
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