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खड़ी रह गई लिक्विफाइड ऑक्सीजन टैंक
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Tue, 03 May 2016 08:40 PM IST
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मेडिकल कॉलेज में खड़ा लिक्विड ऑक्सीजन का टैंकर।
- फोटो : amar ujala
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मेडिकल कॉलेज में पुष्पा सेल्स की ओर से एक टैंक लिक्विफाइड ऑक्सीजन भेजा गया। मंगलवार की सुबह दस बजे ही टैंक पहुंच गया मगर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने उसे रिसीव करने से इंकार कर दिया। मेडिकल प्रशासन का तर्क है कि पहले टैंक से ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू की जाए उसके बाद ही उसे भरने की नौबत आएगी। टैंक से ऑक्सीजन सप्लाई की जिम्मेदारी सुपरवाइजर की है जो फरार है।
मालूम हो कि 27 अप्रैल की रात पाइप में लिक्विफाइड ऑक्सीजन सप्लाई बंद थी। पाइप में ऑक्सीजन न आने पर अफरा तफरी मच गई और तत्काल ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था कर मरीजों की जान बचाई गई। इसकी जानकारी होने के बाद प्राचार्य ने दो सदस्यीय कमेटी जांच को गठित की थी।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक सुपरवाइजर ने जानबूझ कर ऑक्सीजन की सप्लाई बंद की थी। यह बात उजागर होने के बाद से ही सुपरवाइजर फरार है और अभी तक मेडिकल कॉलेज में लिक्विफाइड ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं हो सकी है। मंगलवार की सुबह ही ऑक्सीजन की टैंक पहुंची मगर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने रिसीव करने से इंकार कर दिया।
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प्रभारी अधिकारी डॉ. सतीश का कहना है कि टैंक में अभी ऑक्सीजन है पहले उसकी सप्लाई शुरू हो उसके बाद ही ऑक्सीजन भरने की जरूरत पड़ेगी। यह काम सुपरवाइजर का है उसे करना चाहिए।
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मालूम हो कि 27 अप्रैल की रात पाइप में लिक्विफाइड ऑक्सीजन सप्लाई बंद थी। पाइप में ऑक्सीजन न आने पर अफरा तफरी मच गई और तत्काल ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था कर मरीजों की जान बचाई गई। इसकी जानकारी होने के बाद प्राचार्य ने दो सदस्यीय कमेटी जांच को गठित की थी।
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जांच रिपोर्ट के मुताबिक सुपरवाइजर ने जानबूझ कर ऑक्सीजन की सप्लाई बंद की थी। यह बात उजागर होने के बाद से ही सुपरवाइजर फरार है और अभी तक मेडिकल कॉलेज में लिक्विफाइड ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं हो सकी है। मंगलवार की सुबह ही ऑक्सीजन की टैंक पहुंची मगर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने रिसीव करने से इंकार कर दिया।
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प्रभारी अधिकारी डॉ. सतीश का कहना है कि टैंक में अभी ऑक्सीजन है पहले उसकी सप्लाई शुरू हो उसके बाद ही ऑक्सीजन भरने की जरूरत पड़ेगी। यह काम सुपरवाइजर का है उसे करना चाहिए।