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संतकबीरनगर का एक शिक्षक माफिया बनवाता है टीईटी का फर्जी अंकपत्र
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संतकबीरनगर का एक शिक्षक माफिया बनवाता है टीईटी का फर्जी अंकपत्र
पत्नी, भाई सहित कई रिश्तेदारों को बनवा रखा है शिक्षक
जिले के कई लिपिकों और बीएसए से रहे हैं बेहतर संबंध
शिक्षक माफिया राकेश सिंह का है सबसे करीबी
नीरज मिश्र
सिद्धार्थनगर। फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने के आरोप में पकड़े जा रहे शिक्षकों के टीईटी के जाली प्रमाण पत्र संतकबीरनगर का एक शिक्षा माफिया बनवाता था। हालिया जांच में यह जानकारी मिली है। पुलिस उसके खिलाफ सुबूत जुटा रही है। पता चला है कि फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के लिए वह चार से पांच लाख रुपये लेता था। मौजूदा समय में जिले के कई युवा उसके चंगुल में फंसे हैं। गौरतलब है कि फर्जी टीईटी प्रमाण पत्र के आधार पर काम कर रहे 83 शिक्षकों को अब तक बर्खास्त किया जा चुका है, जबकि 23 के खिलाफ जांच चल रही है।
बेसिक शिक्षा मंत्री का जिला होने के बाद भी फर्जीवाड़े का सिलसिला थम नहीं रहा है। शिक्षक माफिया और फर्जी शिक्षकों का गठजोड़ इस कदर है कि जिले में 400 से अधिक फर्जी शिक्षक नौकरी कर रहे हैं। गिरफ्तार स्टेनो हरेंद्र सिंह इसका खुलासा भी कर चुका है। 23 ऐसे नाम एसटीएफ के हाथ लगे थे, जिनकी डिग्री पर संदेह है। गोरखपुर के सीओ कैंट रोहन प्रमोद बोत्रे इसकी सूची बीएसए कार्यालय को सौंप चुके हैं। जांच के बाद 23 शिक्षकों का वेतन रोकते हुए सत्यापन का काम भी शुरू हो चुका है। बर्खास्त किए गए शिक्षकों के टीईटी के अंकपत्र संतकबीरनगर का एक शिक्षक माफिया बनवाता था, जिसकी पकड़ शासन स्तर पर भी तगड़ी है। उसके घर में बेटे, पतोहू से लेकर उसके कई रिश्तेदार तक शिक्षक हैं। उसे लोग तिवारी उपनाम से भी जानते हैं। खास बात यह है कि उसका नेटवर्क सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर के अलावा देवरिया, गोरखपुर और कुशीनगर, महराजगंज, बलरामपुर, श्रावस्ती तक में फैला है।
गिरफ्तार किए गए शिक्षक माफिया राकेश सिंह, स्टेनो हरेंद्र सिंह, बीएसए कार्यालय में तैनात रहे लिपिक धर्मेंद्र कुमार, सच्चिदानंद से उस शिक्षक माफिया के अच्छे संबंध रहे हैं। गोरखपुर के सीओ कैंट रोहन प्रमोद बोत्रे ने बताया कि करीब 10 फर्जी शिक्षकों की लिस्ट मिली है। मामले की जांच तेजी से चल रही है। जल्द ही कई चेहरे बेनकाब होंगे।
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बना ली है करोड़ों की संपत्ति
संतकबीरनगर का शिक्षक माफिया जिले के कई युवाओं का टीईटी बनवाने के नाम पर लाखों रुपये फंसा रखा है। इसके अलावा उसने बेहद कम समय में करोड़ों की संपत्ति बना ली है। संतकबीरनगर में मीडिया और राजनीतिक पकड़ होने की वजह से उस पर कोई हाथ नहीं डाल पा रहा है, जबकि उसनेसंतकबीरनगर शहर में करोड़ों रुपये की लागत से स्कूल बनवाए हैं।
कई बीएसए और बाबुओं से हैं संबंध
जिले में पिछले आठ से 10 सालों में तैनात रहे बीएसए और बाबुओं से उसके बेहतर संबंध रहे हैं। करीब छह से सात ऐसे बीएसए रहे हैं जिनकी शह पर वह फर्जी शिक्षकों को जिले में टीईटी का अंकपत्र देकर तैनाती दिलवाता रहा है। इसके अलावा कई बाबू ऐसे हैं, जो उसके इशारे पर पूर्व में काम करते रहे हैं। खास बात यह है कि मौजूदा सरकार में भी उसकी राजनीतिक पकड़ बेहद तगड़ी है।
10 फर्जी शिक्षकों की लिस्ट पुुलिस को मिली
23 में 10 ऐसे शिक्षक हैं, जिनका सत्यापन हो चुका है। इनकी लिस्ट भी गोरखपुर पुलिस को मिली है। सूत्र बताते हैं कि इन 10 नामों में दो-तीन ऐसे फर्जी शिक्षक हैं, जो पूरे रैकेट से जुड़े हुए हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद कई और चेहरे बेनकाब होंगे।
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पत्नी, भाई सहित कई रिश्तेदारों को बनवा रखा है शिक्षक
जिले के कई लिपिकों और बीएसए से रहे हैं बेहतर संबंध
शिक्षक माफिया राकेश सिंह का है सबसे करीबी
नीरज मिश्र
सिद्धार्थनगर। फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने के आरोप में पकड़े जा रहे शिक्षकों के टीईटी के जाली प्रमाण पत्र संतकबीरनगर का एक शिक्षा माफिया बनवाता था। हालिया जांच में यह जानकारी मिली है। पुलिस उसके खिलाफ सुबूत जुटा रही है। पता चला है कि फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के लिए वह चार से पांच लाख रुपये लेता था। मौजूदा समय में जिले के कई युवा उसके चंगुल में फंसे हैं। गौरतलब है कि फर्जी टीईटी प्रमाण पत्र के आधार पर काम कर रहे 83 शिक्षकों को अब तक बर्खास्त किया जा चुका है, जबकि 23 के खिलाफ जांच चल रही है।
बेसिक शिक्षा मंत्री का जिला होने के बाद भी फर्जीवाड़े का सिलसिला थम नहीं रहा है। शिक्षक माफिया और फर्जी शिक्षकों का गठजोड़ इस कदर है कि जिले में 400 से अधिक फर्जी शिक्षक नौकरी कर रहे हैं। गिरफ्तार स्टेनो हरेंद्र सिंह इसका खुलासा भी कर चुका है। 23 ऐसे नाम एसटीएफ के हाथ लगे थे, जिनकी डिग्री पर संदेह है। गोरखपुर के सीओ कैंट रोहन प्रमोद बोत्रे इसकी सूची बीएसए कार्यालय को सौंप चुके हैं। जांच के बाद 23 शिक्षकों का वेतन रोकते हुए सत्यापन का काम भी शुरू हो चुका है। बर्खास्त किए गए शिक्षकों के टीईटी के अंकपत्र संतकबीरनगर का एक शिक्षक माफिया बनवाता था, जिसकी पकड़ शासन स्तर पर भी तगड़ी है। उसके घर में बेटे, पतोहू से लेकर उसके कई रिश्तेदार तक शिक्षक हैं। उसे लोग तिवारी उपनाम से भी जानते हैं। खास बात यह है कि उसका नेटवर्क सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर के अलावा देवरिया, गोरखपुर और कुशीनगर, महराजगंज, बलरामपुर, श्रावस्ती तक में फैला है।
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गिरफ्तार किए गए शिक्षक माफिया राकेश सिंह, स्टेनो हरेंद्र सिंह, बीएसए कार्यालय में तैनात रहे लिपिक धर्मेंद्र कुमार, सच्चिदानंद से उस शिक्षक माफिया के अच्छे संबंध रहे हैं। गोरखपुर के सीओ कैंट रोहन प्रमोद बोत्रे ने बताया कि करीब 10 फर्जी शिक्षकों की लिस्ट मिली है। मामले की जांच तेजी से चल रही है। जल्द ही कई चेहरे बेनकाब होंगे।
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बना ली है करोड़ों की संपत्ति
संतकबीरनगर का शिक्षक माफिया जिले के कई युवाओं का टीईटी बनवाने के नाम पर लाखों रुपये फंसा रखा है। इसके अलावा उसने बेहद कम समय में करोड़ों की संपत्ति बना ली है। संतकबीरनगर में मीडिया और राजनीतिक पकड़ होने की वजह से उस पर कोई हाथ नहीं डाल पा रहा है, जबकि उसनेसंतकबीरनगर शहर में करोड़ों रुपये की लागत से स्कूल बनवाए हैं।
कई बीएसए और बाबुओं से हैं संबंध
जिले में पिछले आठ से 10 सालों में तैनात रहे बीएसए और बाबुओं से उसके बेहतर संबंध रहे हैं। करीब छह से सात ऐसे बीएसए रहे हैं जिनकी शह पर वह फर्जी शिक्षकों को जिले में टीईटी का अंकपत्र देकर तैनाती दिलवाता रहा है। इसके अलावा कई बाबू ऐसे हैं, जो उसके इशारे पर पूर्व में काम करते रहे हैं। खास बात यह है कि मौजूदा सरकार में भी उसकी राजनीतिक पकड़ बेहद तगड़ी है।
10 फर्जी शिक्षकों की लिस्ट पुुलिस को मिली
23 में 10 ऐसे शिक्षक हैं, जिनका सत्यापन हो चुका है। इनकी लिस्ट भी गोरखपुर पुलिस को मिली है। सूत्र बताते हैं कि इन 10 नामों में दो-तीन ऐसे फर्जी शिक्षक हैं, जो पूरे रैकेट से जुड़े हुए हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद कई और चेहरे बेनकाब होंगे।