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डाक से भेजा तलाक का लेटर, पहुंची सीएम दरबार
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sun, 14 May 2017 01:22 AM IST
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गोरखनाथ मंदिर पहुंची तीन तलाक से पीड़ित नजमा।
- फोटो : Amar Ujala
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कुशीनगर जिले के पटेहरवा थाना क्षेत्र चौरीडीहा निवासी तीन तलाक की पीड़ित नजमा खातून न्याय के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ के दरबार पहुंची। नजमा का कहना है कि न्याय के लिए हर दरवाजा खटखटाकर थक चुकी है। अब अंतिम उम्मीद लेकर योगी दरबार (गोरखनाथ मंदिर) आई हूं।। सीएम ने पूरी बात सुनी है। इसके साथ ही भरोसा दिलाया है कि अन्याय नहीं होेगा। कानून अपना काम करेगा। नजमा के पति ने डाक से तलाक का लेटर भेजकर दूसरी शादी कर ली है।
नजमा खातून की शादी 2012 में जानकी नगर बघौचघाट देवरिया निवासी गुलशन के साथ हुई थी। कुछ दिन तक तो सब कुछ ठीक ठाक रहा। आरोप है कि बाद में ससुराल वाले दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे। कहने लगे कि अपने पिता से कहो कि बाइक पहुंचा दें। इसके साथ लाख रुपये नकद की डिमांड भी की गई। इस पर पिता के माली हालत की जानकारी दी। बताया कि शादी में ही परिवार पर कर्ज हो गया। रकम का इंतजाम नहीं हो सकता। इसके बाद उत्पीड़न बढ़ गया। मारपीट होने लगी। इससे मजबूर होकर ही मायके आकर रहने लगी
नजमा ने सीएम से बताया कि 26 नवंबर 2015 को उसके पति ने डाक से तीन तलाक का लेटर लिखकर भेज दिया। इतना ही नहीं उसके बाद उसने दूसरी शादी भी कर ली। इससे सदमा लगा। वह न्याय पाने के लिए थाने गई पर सुनवाई नहीं हुई। गुजारा भत्ता का अप्लीकेशन भी लगाया लेकिन मामले का हल नहीं निकला। दौड़-भाग का सिलसिला जारी रहा। नजमा ने कहा कि जिस तरह से सीएम ने बातों को सुना और आश्वासन दिया, उससे न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
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जो लोग तीन तलाक को मजहबी मामला बताकर उस पर किसी प्रकार के दखल को इस्लाम के विरुद्ध बताते हैं उन्हें किसी महिला की पीड़ा का एहसास नहीं है। उसका दर्द वह महिला समझ सकती है या जिसकी बेटी-बहन के साथ इस तरह की बात होती है। सच यह है कि तीन तलाक के खिलाफ लड़ने पर कोर्ट से घर तक जिंदगी सिमट जाती है। इसे खत्म किया जाना चाहिए।
- नजमा खातून, तीन तलाक पीड़ित
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नजमा खातून की शादी 2012 में जानकी नगर बघौचघाट देवरिया निवासी गुलशन के साथ हुई थी। कुछ दिन तक तो सब कुछ ठीक ठाक रहा। आरोप है कि बाद में ससुराल वाले दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे। कहने लगे कि अपने पिता से कहो कि बाइक पहुंचा दें। इसके साथ लाख रुपये नकद की डिमांड भी की गई। इस पर पिता के माली हालत की जानकारी दी। बताया कि शादी में ही परिवार पर कर्ज हो गया। रकम का इंतजाम नहीं हो सकता। इसके बाद उत्पीड़न बढ़ गया। मारपीट होने लगी। इससे मजबूर होकर ही मायके आकर रहने लगी
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नजमा ने सीएम से बताया कि 26 नवंबर 2015 को उसके पति ने डाक से तीन तलाक का लेटर लिखकर भेज दिया। इतना ही नहीं उसके बाद उसने दूसरी शादी भी कर ली। इससे सदमा लगा। वह न्याय पाने के लिए थाने गई पर सुनवाई नहीं हुई। गुजारा भत्ता का अप्लीकेशन भी लगाया लेकिन मामले का हल नहीं निकला। दौड़-भाग का सिलसिला जारी रहा। नजमा ने कहा कि जिस तरह से सीएम ने बातों को सुना और आश्वासन दिया, उससे न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
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जो लोग तीन तलाक को मजहबी मामला बताकर उस पर किसी प्रकार के दखल को इस्लाम के विरुद्ध बताते हैं उन्हें किसी महिला की पीड़ा का एहसास नहीं है। उसका दर्द वह महिला समझ सकती है या जिसकी बेटी-बहन के साथ इस तरह की बात होती है। सच यह है कि तीन तलाक के खिलाफ लड़ने पर कोर्ट से घर तक जिंदगी सिमट जाती है। इसे खत्म किया जाना चाहिए।
- नजमा खातून, तीन तलाक पीड़ित