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गोरखपुर: लेखपालों की हड़ताल खत्म करने के लिए सख्ती तेज, 44 को सर्विस ब्रेक की नोटिस
Sat, 21 Dec 2019 08:51 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 21 Dec 2019 08:51 PM IST
सार
- 44 और लेखपालों को सर्विस ब्रेक की नोटिस
- अब तक छह सस्पेंड हो चुके, 544 को दिया जा चुका है नोटिस
- कल से शुरू हो रहे वोटर अभियान का भी करेंगे बहिष्कार
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मांगों को लेकर धरना देते लेखपाल।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लेखपालों की हड़ताल खत्म करने के लिए सख्ती तेज कर दी गई है। शनिवार को 44 और लेखपालों को सर्विस ब्रेक करने के साथ ही ‘नो वर्क-नो पे’ का नोटिस दिया गया। अब तक छह लेखपालों को सस्पेंड किए जाने के साथ ही कुल 544 को सर्विस ब्रेक और नो वर्क नो पे का नोटिस दिया जा चुका है।
वहीं लेखपाल मांगे पूरी होने तक हड़ताल जारी रखने पर अड़े हैं। सोमवार से शुरू होने वाले मतदाता पुनरीक्षण अभियान का भी लेखपाल बहिष्कार करेंगे। जिले में करीब 750 लेखपाल हैं और सभी मतदाता अभियान के सुपरवाइजर हैं। उधर सीआरओ चंद्रशेखर मिश्र का कहना है कि लेखपाल अगर जल्द लौटे नहीं तो उनपर और सख्ती की जाएगी। शासन ने एस्मा लागू कर रखा है। ऐसे में लेखपाल हड़ताल नहीं कर सकते हैं।
लेखपालों का कहना है कि उन्हें अन्य कर्मचारी संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है। लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष नीलकंठ दूबे और मंत्री जगदीश प्रसाद ने बताया कि शनिवार को धरना स्थल पर नगर निगम परिसर में राजस्व संग्रह अमीन संघ, उप्र प्रगतिशील लेखक एवं साहित्यकार संघ, ग्राम विकास अधिकारी संघ, ग्राम पंचायत अधिकारी संघ, पंचायतीराज ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ आदि ने समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन ने लेखपालों की आवाज दबाने के लिए दमनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। उन्हें लेखपालों की समस्याओं से कोई वास्ता नहीं है।
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ये हैं लेखपालों की मांगें
वेतन विसंगति को ठीक करने, वेतनमान बढ़ाने, राजस्व निरीक्षक के पदों में वृद्धि, राजस्व निरीक्षक व नायब तहसीलदार पदों पर पदोन्नति एवं विभागीय परीक्षा के माध्यम से लेखपालों को अधिक अवसर प्रदान करने, पदनाम परिवर्तित कर लेखपाल के स्थान पर उप राजस्व निरीक्षक किए जाने, मोटर साइकिल भत्ता देने, पुरानी पेंशन बहाल करने के साथ ही पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थियों के सत्यापन के लिए पारिश्रमिक उपलब्ध कराना आदि।
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वहीं लेखपाल मांगे पूरी होने तक हड़ताल जारी रखने पर अड़े हैं। सोमवार से शुरू होने वाले मतदाता पुनरीक्षण अभियान का भी लेखपाल बहिष्कार करेंगे। जिले में करीब 750 लेखपाल हैं और सभी मतदाता अभियान के सुपरवाइजर हैं। उधर सीआरओ चंद्रशेखर मिश्र का कहना है कि लेखपाल अगर जल्द लौटे नहीं तो उनपर और सख्ती की जाएगी। शासन ने एस्मा लागू कर रखा है। ऐसे में लेखपाल हड़ताल नहीं कर सकते हैं।
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लेखपालों का कहना है कि उन्हें अन्य कर्मचारी संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है। लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष नीलकंठ दूबे और मंत्री जगदीश प्रसाद ने बताया कि शनिवार को धरना स्थल पर नगर निगम परिसर में राजस्व संग्रह अमीन संघ, उप्र प्रगतिशील लेखक एवं साहित्यकार संघ, ग्राम विकास अधिकारी संघ, ग्राम पंचायत अधिकारी संघ, पंचायतीराज ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ आदि ने समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन ने लेखपालों की आवाज दबाने के लिए दमनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। उन्हें लेखपालों की समस्याओं से कोई वास्ता नहीं है।
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ये हैं लेखपालों की मांगें
वेतन विसंगति को ठीक करने, वेतनमान बढ़ाने, राजस्व निरीक्षक के पदों में वृद्धि, राजस्व निरीक्षक व नायब तहसीलदार पदों पर पदोन्नति एवं विभागीय परीक्षा के माध्यम से लेखपालों को अधिक अवसर प्रदान करने, पदनाम परिवर्तित कर लेखपाल के स्थान पर उप राजस्व निरीक्षक किए जाने, मोटर साइकिल भत्ता देने, पुरानी पेंशन बहाल करने के साथ ही पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थियों के सत्यापन के लिए पारिश्रमिक उपलब्ध कराना आदि।