{"_id":"5d64485b8ebc3e93d56ca6de","slug":"lady-came-from-saudi-arabiya-gorakhpur-city-news-gkp31909493","type":"story","status":"publish","title_hn":"सऊदी अरब से मोहर्रम मनाने गोरखपुर आई महिला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सऊदी अरब से मोहर्रम मनाने गोरखपुर आई महिला
विज्ञापन
सऊदी अरब के दम्माम से मोहर्रम मनाने गोरखपुर आई महिला।
सऊदी अरब से मोहर्रम मनाने गोरखपुर आई महिला
गोरखपुर। इमामबाड़ा इस्टेट में सोने चांदी का ताजिया और मोहर्रम में होने वाले कार्यक्रम की कशिश सऊदी अरब केे दम्माम में रहने वाली परवीन सिद्दीकी को खींच लाई। नबी पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नवाए हजरत हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत के माह मोहर्रम को भारत में किस तरह मनाया जाता है, यह दिखाने के लिए वह अपने बेटे को भी साथ लाई हैं। इमामबाड़ा इस्टेट के प्रवक्ता मंजूर आलम उर्फ शब्बू मियां ने मां-बेटे को मोहर्रम पर्व पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी।
इमामबाड़ा इस्टेट पहुंची परवीन सिद्दीकी ने बताया कि सऊदी अरब में मोहर्रम माह सादे ढंग से शुरू होता है, वहां ताजियादारी नहीं होती। वह बचपन में एक बार इमामबाड़ा इस्टेट आई थीं। 2007 में शादी के बाद दम्माम चली गईं लेकिन यहां की यादें उनके साथ थीं। बारह साल से सऊदी अरब में मोहर्रम पर शहर की याद आती थी। बेटा अयान भी मोहर्रम और ताजियादारी, मर्सियाख्वानी, खिचड़ा आदि के बारे में जानने को उत्सुक था। उन्होंने गोरखपुर में रहने वाले अपने भाई मो. परवेज सिद्दीकी को अपनी ख्वाहिश बताई। उन्होंने मोहर्रम मनाने के लिए बुला लिया। परवीन सिद्दीकी सोमवार को बेटे अयान और भाई परवेज सिद्दीकी के साथ इमामबाड़ा इस्टेट पहुंचीं। उन्होंने हजरत रौशन अली रहमतुल्लाह अलैह की बारगाह में हाजिरी दी और फातिहाख्वानी कर दुआ मांगी।
इमामबाड़ा इस्टेट के प्रवक्ता मंजूर आलम उर्फ शब्बू मियां ने दोनोें को हजरत रौशन अली बाबा की इबादतगाह, उनका चिमटा, दांत मुबारक, कटोरा, प्लेट, हुक्का आदि के दीदार कराए। बाबा का खास तबर्रुक (प्रसाद) धूनी की राख भी अता की और मोहर्रम से संबंधित सभी कार्यक्रमों की जानकारी दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
गोरखपुर। इमामबाड़ा इस्टेट में सोने चांदी का ताजिया और मोहर्रम में होने वाले कार्यक्रम की कशिश सऊदी अरब केे दम्माम में रहने वाली परवीन सिद्दीकी को खींच लाई। नबी पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नवाए हजरत हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत के माह मोहर्रम को भारत में किस तरह मनाया जाता है, यह दिखाने के लिए वह अपने बेटे को भी साथ लाई हैं। इमामबाड़ा इस्टेट के प्रवक्ता मंजूर आलम उर्फ शब्बू मियां ने मां-बेटे को मोहर्रम पर्व पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी।
इमामबाड़ा इस्टेट पहुंची परवीन सिद्दीकी ने बताया कि सऊदी अरब में मोहर्रम माह सादे ढंग से शुरू होता है, वहां ताजियादारी नहीं होती। वह बचपन में एक बार इमामबाड़ा इस्टेट आई थीं। 2007 में शादी के बाद दम्माम चली गईं लेकिन यहां की यादें उनके साथ थीं। बारह साल से सऊदी अरब में मोहर्रम पर शहर की याद आती थी। बेटा अयान भी मोहर्रम और ताजियादारी, मर्सियाख्वानी, खिचड़ा आदि के बारे में जानने को उत्सुक था। उन्होंने गोरखपुर में रहने वाले अपने भाई मो. परवेज सिद्दीकी को अपनी ख्वाहिश बताई। उन्होंने मोहर्रम मनाने के लिए बुला लिया। परवीन सिद्दीकी सोमवार को बेटे अयान और भाई परवेज सिद्दीकी के साथ इमामबाड़ा इस्टेट पहुंचीं। उन्होंने हजरत रौशन अली रहमतुल्लाह अलैह की बारगाह में हाजिरी दी और फातिहाख्वानी कर दुआ मांगी।
विज्ञापन
इमामबाड़ा इस्टेट के प्रवक्ता मंजूर आलम उर्फ शब्बू मियां ने दोनोें को हजरत रौशन अली बाबा की इबादतगाह, उनका चिमटा, दांत मुबारक, कटोरा, प्लेट, हुक्का आदि के दीदार कराए। बाबा का खास तबर्रुक (प्रसाद) धूनी की राख भी अता की और मोहर्रम से संबंधित सभी कार्यक्रमों की जानकारी दी।
विज्ञापन