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‘मेरी सांसें हैं रामायण, मेरी धड़कन ही गीता है’
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Mon, 30 Jan 2017 01:39 AM IST
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ।
- फोटो : Amar Ujala
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चेतना माया वेलफेयर एंड एजुकेशनल सोसाइटी की ओर से गोरखपुर विश्वविद्यालय के संवाद भवन में रविवार को स्वर्ण माया पांडेय स्मृति अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। इसमें देश भर से आए कवियों व शायरों के अलावा गोरखपुर के भी रचनाकारों ने खूब वाहवाही लूटी।
गाजीपुर से आए हरिनारायण सिंह की ‘जब-जब कोई कर्ण बहाया जाएगा’ खूब सराही गई। डॉ. सुरेश ने ‘हम तो ठहरे बंजारे’, फैजाबाद से आए जमुना प्रसाद उपाध्याय ने अपने शेर ‘लड़कन से बुढ़ापे तक यहां यौवन नहीं मिलता’ से लोगों का ध्यान खींचा। डॉ. चेतना पांडेय का गीत ‘सुगम पथ पर जाऊं ’ श्रोताओं के आकर्षण का केंद्र रहा। सत्यंवदा शर्मा के गीत ‘तेरी यादें बनकर खुशबू’ और प्राची राज के गीत ‘आंखे सब कुछ पढ़ लेती हैं’ ने भी खूब तालियां बटोरीं। फारूक सरल की रचना ‘बताओ रमजानी अब का करिहो’ इलाहाबाद से आए शैलेंद्र मधुर की कविता ‘मेरी सांसें हैं रामायण’ मेरी धड़कन ही गीता है’ विकास बौखल की हास्य कविता ‘इस महंगाई में कन्हैया यदि आए, सच कहता हूं रोटी दाल मार डालेगी’ ने लोगों को बांधे रखा। नवोदित कवि अभिषेक पांडेय की भी रचना सराही गई।
मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि कवि सम्मेलन ऐसा माध्यम है, जिसमें जीवन के विविध पहलुओं को स्वतंत्रता से व्यक्त कर सकते हैं। अध्यक्षता कर रहे प्रो. चितरंजन मिश्र ने कहा कि कविता, बासी हो रही दुनिया को बराबर ताजा करती है। अतिथियों का स्वागत छात्रसंघ की पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. चेतना पांडेय ने किया और आभार ज्ञापन साहित्यकार नरसिंह बहादुर चंद ने किया।
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गाजीपुर से आए हरिनारायण सिंह की ‘जब-जब कोई कर्ण बहाया जाएगा’ खूब सराही गई। डॉ. सुरेश ने ‘हम तो ठहरे बंजारे’, फैजाबाद से आए जमुना प्रसाद उपाध्याय ने अपने शेर ‘लड़कन से बुढ़ापे तक यहां यौवन नहीं मिलता’ से लोगों का ध्यान खींचा। डॉ. चेतना पांडेय का गीत ‘सुगम पथ पर जाऊं ’ श्रोताओं के आकर्षण का केंद्र रहा। सत्यंवदा शर्मा के गीत ‘तेरी यादें बनकर खुशबू’ और प्राची राज के गीत ‘आंखे सब कुछ पढ़ लेती हैं’ ने भी खूब तालियां बटोरीं। फारूक सरल की रचना ‘बताओ रमजानी अब का करिहो’ इलाहाबाद से आए शैलेंद्र मधुर की कविता ‘मेरी सांसें हैं रामायण’ मेरी धड़कन ही गीता है’ विकास बौखल की हास्य कविता ‘इस महंगाई में कन्हैया यदि आए, सच कहता हूं रोटी दाल मार डालेगी’ ने लोगों को बांधे रखा। नवोदित कवि अभिषेक पांडेय की भी रचना सराही गई।
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मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि कवि सम्मेलन ऐसा माध्यम है, जिसमें जीवन के विविध पहलुओं को स्वतंत्रता से व्यक्त कर सकते हैं। अध्यक्षता कर रहे प्रो. चितरंजन मिश्र ने कहा कि कविता, बासी हो रही दुनिया को बराबर ताजा करती है। अतिथियों का स्वागत छात्रसंघ की पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. चेतना पांडेय ने किया और आभार ज्ञापन साहित्यकार नरसिंह बहादुर चंद ने किया।
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