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‘देश में राजा रावण हो या राम, जनता तो बेचारी सीता’
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गोकुल अतिथि भवन में आचार्य सत्यनारायण त्रिपाठी के स्मृति में आयोजित कवि सम्मेलन में कविता पाठ क?
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गोरखपुर। ‘कोई फर्क नहीं पड़ता कि देश में राजा रावण हो या राम, जनता तो बेचारी सीता है। रावण राजा हुआ तो सीता चोरी कर ली जाएगी, राम राजा हुए तो अग्निपरीक्षा के बाद फिर वनवास भेज दी जाएगी’। ये लाइनें मशहूर व्यंग्यकार और पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र शर्मा ने गोकुल अतिथि भवन में आयोजित कवि सम्मेलन में मंगलवार को कहीं।
पूर्वांचल हिंदी मंच के संस्थापक कवि सत्य नारायण त्रिपाठी की पुण्यतिथि पर आयोजित कवि सम्मेलन में कवियत्री डॉ. सुमन दूबे ने ‘मै नहीं और कोई बोल रहा है मुझमें, अब ये एहसास हुआ की कोई है मुझमें, लाख रूठी हूं मान जाना है क्योंकि औरत हूं यही अदा है मुझमें’ रचना सुना दर्शकों की तालियां बटोरी। कवि सम्मेलन में डॉ. सुरेश अवस्थी ने ‘आजादी के अर्थ कुछ ऐसे भा गए, 1947 से एके 47 तक आ गए, सुनाकर कार्यक्रम को ऊंचाई प्रदान की। वहीं ‘घर के मंदिर खूब सजाना पर दिल के मंदिर में बुजुर्गों का ठिकाना रखना’ सुना युवाओं को माता पिता का आदर करने की नसीहत दी। संचालन डॉ. कलीम कैसर ने किया। डॉ. चारूशीला ने भी अपनी कविताएं सुना शहवासियों से वाहवाही लूटी।
आचार्य सत्य नारायण को किया नमन
कवि सम्मेलन से पूर्व शब्दपुरुष के नाम ख्यातिलब्ध स्वर्गीय आचार्य सत्य नारायण त्रिपाठी की द्वितीय पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता पूर्व अध्यक्ष साहित्य अकादमी प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने की। इस अवसर पर रामदेव शुक्ल, प्रो. कृष्ण चन्द्र लाल, प्रो. अनंत मिश्र, प्रो. सदानंद प्रसाद गुप्त, प्रो. सुरेन्द्र दूबे, प्रो. चितरंजन मिश्र, रवीन्द्र श्रीवास्तव जुगानी, प्रो. विमलेश कुमार, डॉ. संजयन त्रिपाठी समेत अन्य लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
पूर्वांचल हिंदी मंच के संस्थापक कवि सत्य नारायण त्रिपाठी की पुण्यतिथि पर आयोजित कवि सम्मेलन में कवियत्री डॉ. सुमन दूबे ने ‘मै नहीं और कोई बोल रहा है मुझमें, अब ये एहसास हुआ की कोई है मुझमें, लाख रूठी हूं मान जाना है क्योंकि औरत हूं यही अदा है मुझमें’ रचना सुना दर्शकों की तालियां बटोरी। कवि सम्मेलन में डॉ. सुरेश अवस्थी ने ‘आजादी के अर्थ कुछ ऐसे भा गए, 1947 से एके 47 तक आ गए, सुनाकर कार्यक्रम को ऊंचाई प्रदान की। वहीं ‘घर के मंदिर खूब सजाना पर दिल के मंदिर में बुजुर्गों का ठिकाना रखना’ सुना युवाओं को माता पिता का आदर करने की नसीहत दी। संचालन डॉ. कलीम कैसर ने किया। डॉ. चारूशीला ने भी अपनी कविताएं सुना शहवासियों से वाहवाही लूटी।
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आचार्य सत्य नारायण को किया नमन
कवि सम्मेलन से पूर्व शब्दपुरुष के नाम ख्यातिलब्ध स्वर्गीय आचार्य सत्य नारायण त्रिपाठी की द्वितीय पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता पूर्व अध्यक्ष साहित्य अकादमी प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने की। इस अवसर पर रामदेव शुक्ल, प्रो. कृष्ण चन्द्र लाल, प्रो. अनंत मिश्र, प्रो. सदानंद प्रसाद गुप्त, प्रो. सुरेन्द्र दूबे, प्रो. चितरंजन मिश्र, रवीन्द्र श्रीवास्तव जुगानी, प्रो. विमलेश कुमार, डॉ. संजयन त्रिपाठी समेत अन्य लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
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