{"_id":"58d53ac84f1c1ba06e1a44e3","slug":"kalraj-mishra-said-their-is-no-lack-of-funds-for-research-in-india","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारत में शोध के लिए फंड की कमी नहीं : कलराज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भारत में शोध के लिए फंड की कमी नहीं : कलराज
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sat, 25 Mar 2017 01:56 AM IST
विज्ञापन
सौर ऊजा प्लांट का उद्घाटन करते केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र।
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऊर्जा का सभी क्षेत्रों में महत्व है। आज जीने के लिए हमें पानी, हवा, ऊर्जा और स्वच्छ भोजन की जरूरत है तो इसे पाने के लिए प्रयास भी हमें ही करने होंगे। मौजूदा दौर में बिजली के बिना जीनव की कल्पना मुश्किल है मगर विकास की निरंतरता बनाए रखने के लिए पर्यावरण संरक्षण के महत्व को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। परंपरागत उर्जा के स्त्रोत के रूप में सौर ऊर्जा, पवन चक्की के इस्तेमाल से पर्यावरण प्रदूषित नहीं होता। आज कई देख इस दिशा में काम कर रहे हैं और भारत सरकार भी इसे बढ़ावा दे रही है।
उक्त बातें केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री कलराज मिश्र ने एमएमएमयूटी और इटली की संस्था ईएनईए के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के उद्घाटन समारोह में कहीं। ‘चैलेंजेज इन सस्टेनेबल डेवलपमेंट फ्रॉम एनर्जी एंड इनवायरमेंट पासपेक्टिव’ पर विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि भारत एक युवा देश है। यहां 65 फासदी लोग 35 साल से कम उम्र के हैं, लेकिन उनके भीतर छिपी मेधा का विकास नहीं हो पा रहा है। सरकार इसे चुनौती के रूप में स्वीकार कर इसे निखारने के लिए स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा दे रही है। भारत में शोध और अन्वेषण केे लिए फंड की कोई कमी नहीं है। यह खुशी की बात है कि शिक्षण संस्थान इसमें अपनी महती भूमिका निभा रहे हैं। इसके साथ केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का सपना है कि भारतीय रोजगार मांगने वाले नहीं बल्कि देने वाले बनें।
विशिष्ट अतिथि पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पीआर अग्रवाल ने कहा कि भारत दुनिया का तीसरा ऐसा देश है, जहां ऊर्जा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है, लेकिन यह चिंताजनक है कि इससे फैलने वाले पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा सके हैं। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. ओकार सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए एमएमएमयूटी और इटली की संस्था ईएनईए के साथ करार के अंतर्गत हुए काम के बारे में जानकारी दी।
विज्ञापन
ईएनईए के प्रतिनिधि डॉ वीके शर्मा और डॉ जी ब्रैशियों ने कहा कि विकास की अंधी दौड़ में लोग पर्यावरण संरक्षण को भूल चुके हैं। इसे हर शख्स तक पहुंचाना ही इस करार का मकसद है। आयोजन सचिव प्रो एस के श्रीवास्तव ने कहा कि महज कानून बना देने से ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोग जागरूक नहीं होंगे, बल्कि खूद मानव जाति को इसकी अहमियत समझने की जरूरत है। इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों को बैज लगाकर हुई। तत्पश्चात दीप प्रज्जवल किया गया। कुलपति प्रो. ओंकार सिंह ने मुख्य अतिथि को बुके और मोमेंटो देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर संगोष्टी की स्मारिका का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में विशेषज्ञों का व्याख्यान हुआ।
सौर ऊजा प्लांट का हुआ उद्घाटन
एमएमएमयूटी में आयोजित संगोष्ठी में शिरकत करने से पहले मंत्री कलराज मिश्र ने परिसर में लगे 100 किलोवाट के सौर ऊर्जा प्लांट का शुभारंभ किया। करीब एक करोड़ की लागत से बने इस प्लांट की ऊर्जा का इस्तेमाल कुलपति कार्यालय में किया जाएगा। इसके शुरू होने से एक महीने में होने वाले विद्युत खर्च में करीब पांच फीसदी की कटौती होगी। कुलपति ने बताया कि आगे भी सोलर पैनल लगाए जाएंगे।
विज्ञापन
उक्त बातें केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री कलराज मिश्र ने एमएमएमयूटी और इटली की संस्था ईएनईए के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के उद्घाटन समारोह में कहीं। ‘चैलेंजेज इन सस्टेनेबल डेवलपमेंट फ्रॉम एनर्जी एंड इनवायरमेंट पासपेक्टिव’ पर विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि भारत एक युवा देश है। यहां 65 फासदी लोग 35 साल से कम उम्र के हैं, लेकिन उनके भीतर छिपी मेधा का विकास नहीं हो पा रहा है। सरकार इसे चुनौती के रूप में स्वीकार कर इसे निखारने के लिए स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा दे रही है। भारत में शोध और अन्वेषण केे लिए फंड की कोई कमी नहीं है। यह खुशी की बात है कि शिक्षण संस्थान इसमें अपनी महती भूमिका निभा रहे हैं। इसके साथ केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का सपना है कि भारतीय रोजगार मांगने वाले नहीं बल्कि देने वाले बनें।
विज्ञापन
विशिष्ट अतिथि पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पीआर अग्रवाल ने कहा कि भारत दुनिया का तीसरा ऐसा देश है, जहां ऊर्जा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है, लेकिन यह चिंताजनक है कि इससे फैलने वाले पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा सके हैं। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. ओकार सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए एमएमएमयूटी और इटली की संस्था ईएनईए के साथ करार के अंतर्गत हुए काम के बारे में जानकारी दी।
विज्ञापन
ईएनईए के प्रतिनिधि डॉ वीके शर्मा और डॉ जी ब्रैशियों ने कहा कि विकास की अंधी दौड़ में लोग पर्यावरण संरक्षण को भूल चुके हैं। इसे हर शख्स तक पहुंचाना ही इस करार का मकसद है। आयोजन सचिव प्रो एस के श्रीवास्तव ने कहा कि महज कानून बना देने से ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोग जागरूक नहीं होंगे, बल्कि खूद मानव जाति को इसकी अहमियत समझने की जरूरत है। इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों को बैज लगाकर हुई। तत्पश्चात दीप प्रज्जवल किया गया। कुलपति प्रो. ओंकार सिंह ने मुख्य अतिथि को बुके और मोमेंटो देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर संगोष्टी की स्मारिका का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में विशेषज्ञों का व्याख्यान हुआ।
सौर ऊजा प्लांट का हुआ उद्घाटन
एमएमएमयूटी में आयोजित संगोष्ठी में शिरकत करने से पहले मंत्री कलराज मिश्र ने परिसर में लगे 100 किलोवाट के सौर ऊर्जा प्लांट का शुभारंभ किया। करीब एक करोड़ की लागत से बने इस प्लांट की ऊर्जा का इस्तेमाल कुलपति कार्यालय में किया जाएगा। इसके शुरू होने से एक महीने में होने वाले विद्युत खर्च में करीब पांच फीसदी की कटौती होगी। कुलपति ने बताया कि आगे भी सोलर पैनल लगाए जाएंगे।