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‘सैनिक सरहद, संत धर्म-संस्कृति की रक्षा करते हैं’
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Updated Tue, 05 Apr 2016 08:41 PM IST
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वीके सिंह
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गोरखपुर। विदेश राज्यमंत्री और पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने कहा कि जब सैनिक और संत का समागम होता है तो देश का उद्धार होता है। देश की भौगोलिक सीमाओं की रक्षा सेना करती है, जबकि राष्ट्र के सांस्कृतिक स्वरूप की रक्षा संत करते हैं। भारत अपनी इन्हीं विशेषताओं के कारण दुनिया में विश्व गुरु के रूप में जाना गया।
जनरल सिंह गंभीरनाथ पुण्यतिथि शताब्दी समारोह में बतौर विशिष्ट अतिथि विचार व्यक्त कर रहे थे। देश के हालात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज वह समय आ गया है जब सेना और संत दोनों अपने-अपने मोर्चे की कमान संभालें। भारत मां की अपराजेय ध्वज पताका फहराने के लिए आगे बढ़ें।
गोरक्ष पीठ इसी वैचारिक धारा का समर्थक रहा है। योगी राज गंभीरनाथ एक सिद्ध योगी थे। उनकी पुण्य स्मृति के सौ वर्ष पूरे होने पर शताब्दी वर्ष के रूप में मनाया जाने वाला यह समारोह भारत के लिए यशस्वी मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म समुद्र की तरह है। उसके अंदर अथक गहराई है। आप सिद्ध स्थान पर आए हैं। यहां यह निश्चय करें कि हमारा देश, समाज और धर्म सर्वोपरि है। उसे आगे बढ़ाने का मार्गदर्शन संतों द्वारा मिलता रहेगा। बाबा गंभीरनाथ का जिक्र करते हुए कहा कि उनके बारे में जो जानकारी मिली है उससे यह कहा जा सकता है उन्होंने अपनी तपस्या से अक्षय समृद्धि प्रदान की।
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समारोह में केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने कहा कि गोरक्षपीठ धर्म की डिफेंस एरिया है और महंत आदित्यनाथ उसके जनरल। यहां की धुनी में राष्ट्रविरोधी तत्वों को भस्म करने की ताकत है। मंदिर में जलने वाली अखंड ज्योति के प्रकाश से भारत की सनातन संस्कृति सदैव प्रकाशित होती रहती है। इस पीठ की तुलना न किसी राजा के राज्य से हो सकती है न ही किसी नेता के साम्राज्य से। यहां से भक्ति और प्रेरणा प्राप्त होती है। भारत नामक भूखंड पर बहुतों ने राज किया, पर यहां की जनता के दिलों पर कोई राज नहीं कर सका। सनातन धर्म को संतों और धर्माचार्यों ने ही संरक्षित किया हुआ है। उन्होंने सैनिक और संत की भूमिका एक समान बताते हुए कहा कि सैनिक सरहद की रक्षा करता है तो संत धर्म की।
उन्होंने कहा कि देश और समाज की लड़ाई दो मोर्चों पर लड़ी जाती है। एक पर सेना और उसका जनरल लड़ता है। दूसरे मोर्चे पर धर्म है जहां महंत आदित्यनाथ जैसे लोग कमान संभाले रहते हैं। कहा कि मां गंगा, गौ माता, नारी के सम्मान की रक्षा, गरीबों के प्रति स्नेह, असहायों के प्रति करुणा भारतीय संस्कृति की विशेषता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की ध्वजा तलवार के बल पर नहीं फहरती। हम बौद्धिक लड़ाई के बल पर धर्म ध्वजा फहराते हैं। हम धरती पर अधिकार नहीं करते बल्कि संस्कृति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
वीके सिंह की आत्मकथा, साहस और संकल्प का विमोचन
गोरखपुर। विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह की पुस्तक साहस और संकल्प का विमोचन गोरक्षनाथ मंदिर में आयोजित समारोह में हुआ। पुस्तक डा. सिंह की आत्मकथा के रूप में लिखी गई है। विमोचन के समय केंद्रीय कैबिनेट मंत्री उमा भारती ने उनकी जमकर तारीफ की और कहा कि वह उनकी फैन हैं। उनसे मुलाकात अक्सर किसी कार्यक्रम में ही होती है, पर उनकी वीर गाथा के बारे में बहुत बार सुन चुकी हूं। इसी नाते कहती हूं कि वह मेरे हीरो हैं। यह बड़े ही गर्व की बात है कि गोरक्ष पीठ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उनकी पुस्तक का विमोचन किया जा रहा है।
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जनरल सिंह गंभीरनाथ पुण्यतिथि शताब्दी समारोह में बतौर विशिष्ट अतिथि विचार व्यक्त कर रहे थे। देश के हालात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज वह समय आ गया है जब सेना और संत दोनों अपने-अपने मोर्चे की कमान संभालें। भारत मां की अपराजेय ध्वज पताका फहराने के लिए आगे बढ़ें।
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गोरक्ष पीठ इसी वैचारिक धारा का समर्थक रहा है। योगी राज गंभीरनाथ एक सिद्ध योगी थे। उनकी पुण्य स्मृति के सौ वर्ष पूरे होने पर शताब्दी वर्ष के रूप में मनाया जाने वाला यह समारोह भारत के लिए यशस्वी मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म समुद्र की तरह है। उसके अंदर अथक गहराई है। आप सिद्ध स्थान पर आए हैं। यहां यह निश्चय करें कि हमारा देश, समाज और धर्म सर्वोपरि है। उसे आगे बढ़ाने का मार्गदर्शन संतों द्वारा मिलता रहेगा। बाबा गंभीरनाथ का जिक्र करते हुए कहा कि उनके बारे में जो जानकारी मिली है उससे यह कहा जा सकता है उन्होंने अपनी तपस्या से अक्षय समृद्धि प्रदान की।
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समारोह में केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने कहा कि गोरक्षपीठ धर्म की डिफेंस एरिया है और महंत आदित्यनाथ उसके जनरल। यहां की धुनी में राष्ट्रविरोधी तत्वों को भस्म करने की ताकत है। मंदिर में जलने वाली अखंड ज्योति के प्रकाश से भारत की सनातन संस्कृति सदैव प्रकाशित होती रहती है। इस पीठ की तुलना न किसी राजा के राज्य से हो सकती है न ही किसी नेता के साम्राज्य से। यहां से भक्ति और प्रेरणा प्राप्त होती है। भारत नामक भूखंड पर बहुतों ने राज किया, पर यहां की जनता के दिलों पर कोई राज नहीं कर सका। सनातन धर्म को संतों और धर्माचार्यों ने ही संरक्षित किया हुआ है। उन्होंने सैनिक और संत की भूमिका एक समान बताते हुए कहा कि सैनिक सरहद की रक्षा करता है तो संत धर्म की।
उन्होंने कहा कि देश और समाज की लड़ाई दो मोर्चों पर लड़ी जाती है। एक पर सेना और उसका जनरल लड़ता है। दूसरे मोर्चे पर धर्म है जहां महंत आदित्यनाथ जैसे लोग कमान संभाले रहते हैं। कहा कि मां गंगा, गौ माता, नारी के सम्मान की रक्षा, गरीबों के प्रति स्नेह, असहायों के प्रति करुणा भारतीय संस्कृति की विशेषता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की ध्वजा तलवार के बल पर नहीं फहरती। हम बौद्धिक लड़ाई के बल पर धर्म ध्वजा फहराते हैं। हम धरती पर अधिकार नहीं करते बल्कि संस्कृति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
वीके सिंह की आत्मकथा, साहस और संकल्प का विमोचन
गोरखपुर। विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह की पुस्तक साहस और संकल्प का विमोचन गोरक्षनाथ मंदिर में आयोजित समारोह में हुआ। पुस्तक डा. सिंह की आत्मकथा के रूप में लिखी गई है। विमोचन के समय केंद्रीय कैबिनेट मंत्री उमा भारती ने उनकी जमकर तारीफ की और कहा कि वह उनकी फैन हैं। उनसे मुलाकात अक्सर किसी कार्यक्रम में ही होती है, पर उनकी वीर गाथा के बारे में बहुत बार सुन चुकी हूं। इसी नाते कहती हूं कि वह मेरे हीरो हैं। यह बड़े ही गर्व की बात है कि गोरक्ष पीठ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उनकी पुस्तक का विमोचन किया जा रहा है।