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इंतजाम नाकाम, हर तरफ जाम

Thu, 18 Aug 2016 02:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर। Updated Thu, 18 Aug 2016 02:14 AM IST
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Jaam again in gorakhpur
जाम में गा‌ड़‌ियाों के साथ फंसे यात्री। - फोटो : amar ujala
रक्षाबंधन पर जरूरी सामान की खरीदारी और सफर का सिलसिला शुरू होने से बढ़ने वाली अतिरिक्त भीड़ के लिहाज से ट्रैफिक प्रबंधन का अतिरिक्त बंदोबस्त न करना एक दफा फिर महंगा साबित हुआ। भीड़ बढ़ते ही बाजार से जुड़ी सड़कों से लेकर शहर से निकास के मुख्य मार्गों पर बुधवार दोपहर से जाम की समस्या गहराई तो रात तक कई जगह रेंग-रेंग कर गाड़ियां आगे बढ़ सकीं।
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गोलघर, टाउनहॉल, रीढ़साहब धर्मशाला, बेतियाहाता, कैंट चौराहा, यूनिवर्सिटी चौराहा, सिविल लाइंस, गोलघर काली मंदिर शहर के प्रमुख चौराहों पर शाम चार बजे जाम की स्थिति चरम पर पहुंच गई। कई प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिपाही थे लेकिन गाड़ियों की अधिकता और जल्द आगे बढ़ने की होड़ से निपटने का बंदोबस्त नहीं था। लिहाजा दो घंटे से ज्यादा समय तक अराजकता जैसी स्थिति रही।
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हालात शहर से बाहर के रास्तों पर भी अच्छे नहीं थे। रक्षाबंधन के सफर पर निकलने वालों की रफ्तार बढ़ी तो शाम से असुरन, गोरखनाथ, मोहद्दीपुर, रुस्तमपुर, टीपीनगर, नौसड़, कूड़ाघाट में वाहनों की रफ्तार थम गई। दोपहिया से लेकर दूसरे शहरों को जाने वाली बसें, कारें इंच-इंच खिसक कर आगे बढ़ सकीं। जाम की अवधि लंबी हो जाने से इन वाहनों में सवार तमाम लोग पानी के लिए भी तरस गए। पुलिस बढ़ाकर हालात सुधारने की कोशिश जरूर की गई लेकिन स्थिति तभी सामान्य हुई, जबकि रात गहराने के साथ नए वाहनों की आमद घटी और सड़कों पर उपलब्ध जगह और गाड़ियों के अनुपात का सही तालमेल हो सका। 
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भीड़ बढ़ी तो कम पड़ गईं बसें 

रक्षाबंधन के लिए रोडवेज के अतिरिक्त प्रबंध के दावे उस वक्त नाकाफी साबित हुए, जब भीड़ एकाएक बढ़ी और बसों में मारामारी के हालात हो गए। बस स्टैंड पर महिला, बच्चों व अन्य सवारियों को घंटों बसों के लिए इंतजार करना पड़ा। ज्यादा दिक्कत देवरिया, महराजगंज, सिद्धार्थनगर दिशा के यात्रियों के लिए आई। 

ट्रेनों में भी रही मारामारी की स्थिति 

शाम गहराने के साथ रेलवे स्टेशन पर भीड़ बढ़ने लगी। रात होने तक कई ट्रेनों की सामान्य बोगियों में पांव रखने की जगह भी मयस्सर नहीं हो रही थी। चौरीचौरा एक्सप्रेस और कृषक एक्सप्रेस के टॉयलेट के पास और गैलरी में खचाखच भीड़ जमा हो गई। आरक्षित बर्थ वाले मुसाफिरों को भी कोच में जबरन घुसे लोगों के कारण काफी सांसत झेलनी पड़ी। ऐसे में त्योहार पर मंजिल तक पहुंचने की कोशिश में तमाम लोगों ने जोखिम के बीच सफर पूरा किया।  
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