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पॉलिथीन बैग : आज का आराम कल बनेगा अभिशाप
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प्लास्टिक बैग फ्री वर्ल्ड डे के अवसर पर अमर उजाला के सिटी दफ्तर में आयोजित कार्यक्रम में शपथ दिला
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पॉलिथीन बैग : आज का आराम कल बनेगा अभिशाप
गोरखपुर। प्लास्टिक बैग पर्यावरण को दूषित कर मनुष्य और जीव-जंतुओं सभी को नुकसान पहुंचा रहा है ये बात सभी जानते हैं। लेकिन इसपर नियंत्रण के लिए जरूरी प्रयास नहीं हो रहे हैं। थोड़े से आराम के लिए लोग पॉलिथीन बैग का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए अभिशाप होगा। इसके प्रति हमें अभी जागरूक होने की जरूरत है। यह निष्कर्ष बुधवार को अमर उजाला के सिटी कार्यालय में आयोजित ‘ट्री ऑफ लाइफ’ कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित संवाद में निकल कर आया।
‘इंटरनेशनल प्लास्टिक बैग फ्री डे’ पर सिटी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में बेसिक शिक्षा विभाग की शिक्षिकाओं ने स्कूल में विद्यार्थियों और घर पर परिवार वालों को पॉलिथीन का इस्तेमाल नहीं करने देने का संकल्प लिया। इस अनूठे अभियान की नॉलेज पार्टनर गलगोटिया यूनिवर्सिटी है।
शिक्षिका डॉ. चंपा सिंह और सुधा मिश्रा ने कहा कि कोई भी इस बात से अनजान नहीं है कि प्लास्टिक बैग कितने हानिकारक हैं। मिट्टी में दबने के बाद भी इन्हें गलने में सदियां लग जाती हैं। ये मिट्टी, पानी आदि में पहुंचकर उसे दूषित कर रहे हैं। लोग इसके दुष्प्रभाव जानते हुए भी अपने आराम के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं और फेंक देते हैं। शिक्षिका मंजूषा सिंह ने कहा कि बैग के रूप में प्लास्टिक का इस्तेमाल काफी अधिक होता है और एक या दो बार के बाद ही उन बैग को फेंक दिया जाता है। शशिकला यादव, आलेख शरन और अंशिका सिंह ने कहा कि कई शहरों में प्लास्टिक बैग पर बैन है इसके बावजूद भी लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। इन्हीं सभी प्रभावों को कम करने के लिए प्रदेश सरकार ने पॉलिथीन पर बैन लगाया है। मगर उसके बाद भी लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। उम्मे सादिया, सरिता सिंह, सायमा एखलाख ने कहा कि प्लास्टिक बैग के बुरे प्रभावों और इसके समाधान के बारे में स्कूलों में बच्चों को जागरूक किया जाता है। संवाद में आभा श्रीवास्तव, संगीता सिंह, एकता अग्रवाल, अर्चना श्रीवास्तव, डॉ. शालिनी, गरिमा शाही, नम्रता श्रीवास्तव ने भी अपने बहुमूल्य विचार रखे।
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गोरखपुर। प्लास्टिक बैग पर्यावरण को दूषित कर मनुष्य और जीव-जंतुओं सभी को नुकसान पहुंचा रहा है ये बात सभी जानते हैं। लेकिन इसपर नियंत्रण के लिए जरूरी प्रयास नहीं हो रहे हैं। थोड़े से आराम के लिए लोग पॉलिथीन बैग का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए अभिशाप होगा। इसके प्रति हमें अभी जागरूक होने की जरूरत है। यह निष्कर्ष बुधवार को अमर उजाला के सिटी कार्यालय में आयोजित ‘ट्री ऑफ लाइफ’ कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित संवाद में निकल कर आया।
‘इंटरनेशनल प्लास्टिक बैग फ्री डे’ पर सिटी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में बेसिक शिक्षा विभाग की शिक्षिकाओं ने स्कूल में विद्यार्थियों और घर पर परिवार वालों को पॉलिथीन का इस्तेमाल नहीं करने देने का संकल्प लिया। इस अनूठे अभियान की नॉलेज पार्टनर गलगोटिया यूनिवर्सिटी है।
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शिक्षिका डॉ. चंपा सिंह और सुधा मिश्रा ने कहा कि कोई भी इस बात से अनजान नहीं है कि प्लास्टिक बैग कितने हानिकारक हैं। मिट्टी में दबने के बाद भी इन्हें गलने में सदियां लग जाती हैं। ये मिट्टी, पानी आदि में पहुंचकर उसे दूषित कर रहे हैं। लोग इसके दुष्प्रभाव जानते हुए भी अपने आराम के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं और फेंक देते हैं। शिक्षिका मंजूषा सिंह ने कहा कि बैग के रूप में प्लास्टिक का इस्तेमाल काफी अधिक होता है और एक या दो बार के बाद ही उन बैग को फेंक दिया जाता है। शशिकला यादव, आलेख शरन और अंशिका सिंह ने कहा कि कई शहरों में प्लास्टिक बैग पर बैन है इसके बावजूद भी लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। इन्हीं सभी प्रभावों को कम करने के लिए प्रदेश सरकार ने पॉलिथीन पर बैन लगाया है। मगर उसके बाद भी लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। उम्मे सादिया, सरिता सिंह, सायमा एखलाख ने कहा कि प्लास्टिक बैग के बुरे प्रभावों और इसके समाधान के बारे में स्कूलों में बच्चों को जागरूक किया जाता है। संवाद में आभा श्रीवास्तव, संगीता सिंह, एकता अग्रवाल, अर्चना श्रीवास्तव, डॉ. शालिनी, गरिमा शाही, नम्रता श्रीवास्तव ने भी अपने बहुमूल्य विचार रखे।
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