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कार्रवाई की जगह पैरवी में लगी सरकारी टीम
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 14 Feb 2016 02:18 AM IST
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पिपराइच इलाके के हरखापुर गांव में इंसेफेलाइटिस से बचाव के नाम पर सरकारी देखरेख के बिना टीके लगाने जैसे गंभीर मामले को लेकर सरकारी मशीनरी के रुख में गंभीरता देखने को नहीं मिली है। स्वास्थ्य महकमे ने न यह जानने में दिलचस्पी ली है कि टीके के नाम पर लोगों के शरीर में कौन सी वैक्सीन दाखिल की गई और न ही टीका लगाने वालों के प्रति सख्ती में दिलचस्पी ली है। कार्रवाई तो दूर शनिवार को गांव में हेल्थ वर्करों ने गांव में घूमकर अधिकांश लोगों को शिकायत न करने के लिए रजामंद करने की कोशिश की।
खुद को एनजीओ बताकर इंसेफेलाइटिस प्रतिरक्षण का टीका लगाने के दौरान प्रति शख्स 10 रुपये रजिस्ट्रेशन शुल्क और 50 रुपये टीके का दाम वसूलने के आरोप में घिरे श्री साईं सेवा समिति के सदस्यों ने खुद को विवाद में घिरता देख और टीके लगाने का काम रोक दिया है। टीके की गुणवत्ता और उसके नाम पर वसूली का मुद्दा उठा तो गांव में पुलिस तक पहुंच गई थी लेकिन वैक्सीन की असलियत जानने और सरकारी टीम की देखरेख के बिना टीके लगाने के मामले में पुलिस या स्वास्थ्य महकमे ने कार्रवाई की जरूरत नहीं समझी।
पिपराइच स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी से लेकर प्रभारी सीएमओ तक ने इस तरह के टीकाकरण को अवैध बताया लेकिन दोषियों को बेनकाब करने और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की पहल अभी तक नहीं हुई है। भारतीय किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष विशुनदेव तिवारी ने बताया कि गांव में आशा वर्कर ने घर-घर घूमकर लोगों को इस मामले में खामोशी बरतने का सुझाव दिया। इसके लिए किसी से खुद की नौकरी की दुहाई दी तो किसी पर भविष्य में बेहतर इलाज में मुश्किल आने का डर बैठाया। भाकियू नेता ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
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जिला पंचायत सदस्य सुभाष भारती ने भी यही मांग दोहराई है। इस बीच जब प्रभारी सीएमओ डॉ. नंद कुमार से वस्तुस्थिति जानने की कोशिश की गई तो उन्होंने खुद को अस्वस्थ बताते हुए बात करने में असमर्थता जताई।
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खुद को एनजीओ बताकर इंसेफेलाइटिस प्रतिरक्षण का टीका लगाने के दौरान प्रति शख्स 10 रुपये रजिस्ट्रेशन शुल्क और 50 रुपये टीके का दाम वसूलने के आरोप में घिरे श्री साईं सेवा समिति के सदस्यों ने खुद को विवाद में घिरता देख और टीके लगाने का काम रोक दिया है। टीके की गुणवत्ता और उसके नाम पर वसूली का मुद्दा उठा तो गांव में पुलिस तक पहुंच गई थी लेकिन वैक्सीन की असलियत जानने और सरकारी टीम की देखरेख के बिना टीके लगाने के मामले में पुलिस या स्वास्थ्य महकमे ने कार्रवाई की जरूरत नहीं समझी।
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पिपराइच स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी से लेकर प्रभारी सीएमओ तक ने इस तरह के टीकाकरण को अवैध बताया लेकिन दोषियों को बेनकाब करने और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की पहल अभी तक नहीं हुई है। भारतीय किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष विशुनदेव तिवारी ने बताया कि गांव में आशा वर्कर ने घर-घर घूमकर लोगों को इस मामले में खामोशी बरतने का सुझाव दिया। इसके लिए किसी से खुद की नौकरी की दुहाई दी तो किसी पर भविष्य में बेहतर इलाज में मुश्किल आने का डर बैठाया। भाकियू नेता ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
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जिला पंचायत सदस्य सुभाष भारती ने भी यही मांग दोहराई है। इस बीच जब प्रभारी सीएमओ डॉ. नंद कुमार से वस्तुस्थिति जानने की कोशिश की गई तो उन्होंने खुद को अस्वस्थ बताते हुए बात करने में असमर्थता जताई।