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जान से भी प्यारी जमीन
राजन राय, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Wed, 23 Aug 2017 01:47 AM IST
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बीमार बच्चों को कैंप ले जाते सेना के जवान।
- फोटो : Amar Ujala
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राप्ती नदी की चपेट में आए घुनघुन कोठा गांव में बोट लेकर पहुंचे सेना के जवानों ने जब फंसे लोगों को निकालने की कोशिश की तो उन्होंने साथ आने से मना कर दिया। बोले, सर आप कुछ खाने-पीने का सामान हो तो दे दें, घर छोड़कर हम कैसे जाएं। सब सामान पड़ा हुआ है। ऐसे में सेना के जवानों ने उन्हें लंच पैकेट मुहैया कराया। वहीं एक दिन पहले सेना के समझाने पर बाहर जाने को तैयार न होने वाले मंझरिया गांव के ओमप्रकाश ने खुद हाथ देकर बुलाया। बोले, साहब दोनों बेटों की तबीयत ज्यादा खराब हो गई है। दवा खिलाया पर बुखार नहीं उतरा। जवानों ने न सिर्फ उन्हें बाढ़ से बाहर निकाला बल्कि सेना के डॉक्टर से इलाज भी कराया।
डोमिनगढ़ इलाके में बारिश के चलते मंगलवार को सेना का बचाव एवं राहत कार्य करीब दो घंटे तक बाधित रहा। सुबह से ही प्रशासनिक अधिकारियों के पास लंच पैकेट के लिए कई गांवों से फोन आ चुके थे। 67 फील्ड रेजीमेंट बीर मराठा, इलाहाबाद के लेफ्टिनेंट कर्नल आशीष राव ने पहली बोट मंझरिया गांव में भेजी। राहत सामग्री लेकर बोट गांव के प्रधान के घर पहुंची। वहां पहले से ही काफी लोगों ने शरण ले रखी थी। यहां राहत सामग्री सभी को मुहैया कराई गई। जवानों ने पूछा किसी को साथ में चलना है। जब कोई नहीं बोला तो बोट आगे बढ़ गई। इसी बीच एक घर से आवाजें आने लगीं। मेजर विशाल सिंह ने बोट को उस घर की ओर घुमा दिया। गांव के ओमप्रकाश यादव ने कहा कि मेरे दोनों बेटों को तेज बुखार है। उनकी पत्नी ने सिसकते हुए कहा कि हमें डॉक्टर को दिखाना है तो जवानों ने दोनों बेटों सहित विशाल को बोट में बैठा लिया।
लाल कपड़ा लहराकर अर्चना ने बुलाया
मंझरिया गांव के बाद जब सेना की टीम उत्तरास्रोत पहुंची तो छत पर खड़ी अर्चना गुप्ता ने डंडे में लाल कपड़ा लपेटकर दिखाना शुरू कर दिया। बोट के नजदीक आने पर अर्चना के साथ ही उनके दो छोटे भाई राजन और सूरज भी चिल्लाने लगे। अंकल, हमें खाने को नहीं मिल रहा है, मामा के घर जाना है। सूबेदार विजय लहरे और नायब सूबेदार हरिश्चंद्र गायकवाड़ ने अर्चना के भाइयों, पिता और भाभी को बोट पर बैठा लिया। डोमिनगढ़ में सेना के बेस कैंप पर आई अर्चना ने बताया कि अभी तक घर में रखे राशन से काम चला, लेकिन सोमवार की रात से हम लोग भूखे हैं। मामा आए हैं उन्हीं के साथ जा रहे हैं।
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24 घंटे से सब भूखे हैं, लंच पैकेट भेजें
राहत एवं बचाव स्थल पर मंझरिया गांव के प्राथमिक स्कूल के पीछे रहने वाले विनय यादव बदहवाश हालत में पहुंचे। बताया कि गांव से छोटी नाव से रेलवे ट्रैक पर आया हूं और वहां से तीन किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचा। सेना के जवानों से कहा, साहब हमारे गांव में दो दिन आपकी बोट आई थी लेकिन हम लोगों के घर की ओर लंच पैकेट नहीं मिला। गांव के बाहरी छोर पर होने के चलते हमारे घर की ओर कोई नहीं आ रहा। परिवार के सभी लोग 24 घंटे से खाना नहीं खाएं हैं, पहले वहां चले। वहां मौजूद कानूनगो ने कहा कि यहां खड़े रहो, बोट आने पर भेजता हूं।
पांच नावें हैं पर मुकदमे में फंसी
डोमिनगढ़ बांध पर सुरक्षा में तैनात एक दरोगा के मोबाइल पर फोन आया। फोन करने वाले घुनघुनकोठा गांव के प्रधान थे। प्रधान ने नाव भेजवाने का अनुरोध किया। दरोगा ने बताया कि पांच नाव तो हैं पर सभी कच्ची शराब के साथ बरामद हुई हैं। कोर्ट में मुकदमा चल रहा है अब कोर्ट के आदेश पर ही नावें मिल पाएंगी।
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डोमिनगढ़ इलाके में बारिश के चलते मंगलवार को सेना का बचाव एवं राहत कार्य करीब दो घंटे तक बाधित रहा। सुबह से ही प्रशासनिक अधिकारियों के पास लंच पैकेट के लिए कई गांवों से फोन आ चुके थे। 67 फील्ड रेजीमेंट बीर मराठा, इलाहाबाद के लेफ्टिनेंट कर्नल आशीष राव ने पहली बोट मंझरिया गांव में भेजी। राहत सामग्री लेकर बोट गांव के प्रधान के घर पहुंची। वहां पहले से ही काफी लोगों ने शरण ले रखी थी। यहां राहत सामग्री सभी को मुहैया कराई गई। जवानों ने पूछा किसी को साथ में चलना है। जब कोई नहीं बोला तो बोट आगे बढ़ गई। इसी बीच एक घर से आवाजें आने लगीं। मेजर विशाल सिंह ने बोट को उस घर की ओर घुमा दिया। गांव के ओमप्रकाश यादव ने कहा कि मेरे दोनों बेटों को तेज बुखार है। उनकी पत्नी ने सिसकते हुए कहा कि हमें डॉक्टर को दिखाना है तो जवानों ने दोनों बेटों सहित विशाल को बोट में बैठा लिया।
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लाल कपड़ा लहराकर अर्चना ने बुलाया
मंझरिया गांव के बाद जब सेना की टीम उत्तरास्रोत पहुंची तो छत पर खड़ी अर्चना गुप्ता ने डंडे में लाल कपड़ा लपेटकर दिखाना शुरू कर दिया। बोट के नजदीक आने पर अर्चना के साथ ही उनके दो छोटे भाई राजन और सूरज भी चिल्लाने लगे। अंकल, हमें खाने को नहीं मिल रहा है, मामा के घर जाना है। सूबेदार विजय लहरे और नायब सूबेदार हरिश्चंद्र गायकवाड़ ने अर्चना के भाइयों, पिता और भाभी को बोट पर बैठा लिया। डोमिनगढ़ में सेना के बेस कैंप पर आई अर्चना ने बताया कि अभी तक घर में रखे राशन से काम चला, लेकिन सोमवार की रात से हम लोग भूखे हैं। मामा आए हैं उन्हीं के साथ जा रहे हैं।
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24 घंटे से सब भूखे हैं, लंच पैकेट भेजें
राहत एवं बचाव स्थल पर मंझरिया गांव के प्राथमिक स्कूल के पीछे रहने वाले विनय यादव बदहवाश हालत में पहुंचे। बताया कि गांव से छोटी नाव से रेलवे ट्रैक पर आया हूं और वहां से तीन किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचा। सेना के जवानों से कहा, साहब हमारे गांव में दो दिन आपकी बोट आई थी लेकिन हम लोगों के घर की ओर लंच पैकेट नहीं मिला। गांव के बाहरी छोर पर होने के चलते हमारे घर की ओर कोई नहीं आ रहा। परिवार के सभी लोग 24 घंटे से खाना नहीं खाएं हैं, पहले वहां चले। वहां मौजूद कानूनगो ने कहा कि यहां खड़े रहो, बोट आने पर भेजता हूं।
पांच नावें हैं पर मुकदमे में फंसी
डोमिनगढ़ बांध पर सुरक्षा में तैनात एक दरोगा के मोबाइल पर फोन आया। फोन करने वाले घुनघुनकोठा गांव के प्रधान थे। प्रधान ने नाव भेजवाने का अनुरोध किया। दरोगा ने बताया कि पांच नाव तो हैं पर सभी कच्ची शराब के साथ बरामद हुई हैं। कोर्ट में मुकदमा चल रहा है अब कोर्ट के आदेश पर ही नावें मिल पाएंगी।