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‘पं. दीनदयाल के विचार अपनाएं, आएंगे ‘और अच्छे दिन’

Mon, 26 Sep 2016 12:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Mon, 26 Sep 2016 12:48 AM IST
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Governer said to accept the ideas of Pt. Deendayal
कार्यक्रम में बोलते राज्यपाल। - फोटो : Rajesh Kumar
राज्यपाल राम नाईक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘अच्छे दिन’ के जुमले को पंडित दीनदयाल उपाध्याय से जोड़ते हुए कहा है कि यदि उनके विचारों को आत्मसात किया जाए तो ‘और अच्छे दिन’ आएंगे। इसके लिए उन्होंने पं. दीनदयाल के 1967 में दिए गए उस संदेश की याद दिलाई, जिसमें उन्होंने अंत्योदय और समय के साथ परिवर्तन को स्वीकारने की बात कही थी।
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पं. दीनदयाल के प्रतिमा स्थल की स्थापना करने रविवार को गोरखपुर यूनिवर्सिटी पहुंचे राज्यपाल ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को सलाह दी कि एक साल से परिसर में चल रहे जन्मशती आयोजनों का सिलसिला आगे भी चलाते रहें, जिससे पं. दीन दयाल के विचारों का लोगों तक प्रवाह बना रहे। अपने संबोधन में उन्होंने सत्तर के दशक के उन दिनों की याद दिलाई, जब समाज में पूंजीवाद और साम्यवाद जैसी दो विचारधारा प्रभावी थी।
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उन्होंने कहा कि साम्यवादी केवल भूख और गरीबी दूर करने की बात करते थे, जबकि पूंजीवादी विचारधारा के केंद्र में मुनाफा था। ऐसे समय में पं. दीनदयाल ने इन दोनोें के बीच समन्वय स्थापित करते हुए एकात्म मानववाद का सिद्धांत दिया, जिसकी प्रासंगिकता हर काल में बनी रहेगी। राज्यपाल ने पं. दीनदयाल से जुड़े उन संस्मरणों की भी चर्चा की, जिसमें पाकिस्तान के मुद्दे पर राममनोहर लोहिया और वो एक टेबल पर बैठे थे।
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राज्यपाल ने उन परिस्थितियों की भी चर्चा की, जिनके बीच यूनिवर्सिटी परिसर में पं. दीनदयाल की प्रतिमा बनने की राह निकली। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी का नाम चूंकि पंडित दीनदयाल के नाम पर है, ऐसे में परिसर में उनकी प्रतिमा की महती जरूरत थी। जिस तरह से मंदिर में रखी मूर्ति से उपासना आसान हो जाती है, उसी तरह से परिसर में प्रतिमा स्थापना से पंडित जी के विचारों का प्रसार आसान हो जाएगा। 

छात्रसंघ पदाधिकारियों को दी नसीहत

राज्यपाल राम नाईक ने बताया कि प्रदेश की 26 राज्य यूनिवर्सिटी में से गोरखपुर यूनिवर्सिटी वह पहली संस्था है, जिसने छात्रसंघ चुनाव कराने का साहस जुटाया है। उन्होंने इसके लिए कुलपति प्रो. अशोक कुमार को बधाई दी। आयोजन में मौजूद छात्रसंघ पदाधिकारियों को उन्होंने नसीहत दी कि वे अपनी नेतृत्व क्षमता का दायरा बढ़ाएं। इसके लिए उन्होंने अटल बिहारी बाजपेयी के उस संदेश का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने विरोध में मतदान करने वालों के प्रति भी वही निष्ठा दिखाने को कहा था, जो निष्ठा पक्ष में मतदान करने वाले के प्रति होती है। यही सच्चे जनप्रतिनिधि की खासियत होती है।
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