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परीक्षा कराने के बाद विद्यार्थियों को कर दिया अमान्य
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sun, 05 Feb 2017 12:51 AM IST
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी।
- फोटो : Amar Ujala
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी से पीजी कर रहे 26 विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। विभिन्न कोर्सेज में प्रवेश लेने वाले इन विद्यार्थियों ने एक सेमेस्टर की परीक्षा भी दी, मगर यूनिवर्सिटी अब इनके एडमिशन को अमान्य बता रहा है। ऐसे में अब इनके सामने संकट खड़ा हो गया है। पीड़ित छात्रों ने कुलपति, रजिस्ट्रार और परीक्षा नियंत्रक को ज्ञापन देकर उनके हित में फैसला लेने की मांग की है।
पीड़ित 26 विद्यार्थियों ने स्नातक करने के तीन साल बाद प्रवेश परीक्षा क्वालीफाई कर पीजी कोर्स में एडमिशन लिया था। विद्यार्थियों ने अपने सारे डॉक्यूमेंट भी यूनिवर्सिटी के समक्ष पेश किए। जांच के बाद प्रवेश समिति ने सभी को मान्य करते हुए एडमिशन दे दिया। इनमें संस्कृत विषय के 6, उर्दू के 3, इतिहास के 1, अर्थशास्त्र के 4, राजनीति शास्त्र के 1, प्राचीन इतिहास के 1 समेत कुल 26 विद्यार्थी हैं। एडमिशन के बाद इन विद्यार्थियों की प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा भी करा दी गई, लेकिन अब यूनिवर्सिटी की परीक्षा समिति यह कहकर एडमिशन खारिज कर रही कि इन विद्यार्थियों ने स्नातक पूरा करने के तीन साल बाद प्रवेश लिया, जो नियमों के विपरीत है।
पीड़ित विद्यार्थी यूनिवर्सिटी के ऐसे नियम पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं। उनका कहना है कि एडमिशन और एक सेमेस्टर की परीक्षा कराने के बाद एडमिशन को अमान्य किया जाना भविष्य के साथ खिलवाड़ करना है। सुनील कुमार सिंह, पवन कुमार समेत कई छात्रों ने कुलपति, रजिस्ट्रार और परीक्षा नियंत्रक को ज्ञापन देकर उनके हित में फैसला लेने की मांग की है।
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पीड़ित 26 विद्यार्थियों ने स्नातक करने के तीन साल बाद प्रवेश परीक्षा क्वालीफाई कर पीजी कोर्स में एडमिशन लिया था। विद्यार्थियों ने अपने सारे डॉक्यूमेंट भी यूनिवर्सिटी के समक्ष पेश किए। जांच के बाद प्रवेश समिति ने सभी को मान्य करते हुए एडमिशन दे दिया। इनमें संस्कृत विषय के 6, उर्दू के 3, इतिहास के 1, अर्थशास्त्र के 4, राजनीति शास्त्र के 1, प्राचीन इतिहास के 1 समेत कुल 26 विद्यार्थी हैं। एडमिशन के बाद इन विद्यार्थियों की प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा भी करा दी गई, लेकिन अब यूनिवर्सिटी की परीक्षा समिति यह कहकर एडमिशन खारिज कर रही कि इन विद्यार्थियों ने स्नातक पूरा करने के तीन साल बाद प्रवेश लिया, जो नियमों के विपरीत है।
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पीड़ित विद्यार्थी यूनिवर्सिटी के ऐसे नियम पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं। उनका कहना है कि एडमिशन और एक सेमेस्टर की परीक्षा कराने के बाद एडमिशन को अमान्य किया जाना भविष्य के साथ खिलवाड़ करना है। सुनील कुमार सिंह, पवन कुमार समेत कई छात्रों ने कुलपति, रजिस्ट्रार और परीक्षा नियंत्रक को ज्ञापन देकर उनके हित में फैसला लेने की मांग की है।
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