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नगर सहकारी बैंक की वार्षिक आमसभा में जमकर हंगामा, हाथापाई
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नगर सहकारी बैंक की वार्षिक सामान्य निकाय की बैठक के बाद हगांमा करते लोग।
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नगर सहकारी बैंक की वार्षिक आमसभा में जमकर हंगामा, हाथापाई
गोरखपुर। नगर सहकारी बैंक की वार्षिक सामान्य निकाय की बैठक में रविवार को जमकर हंगामा हुआ। अध्यक्ष, सचिव के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। शोरगुल के बीच ही 10 एजेंडे पास करा लिए गए। बाद में कहासुनी, हाथापाई और मारपीट की नौबत आई तो पुलिस को सूचना दी गई। इसी मामले में गोरखपुर विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व महामंत्री नीरज शाही ने यह आरोप लगाते हुए थाने में तहरीर दी है कि बैंक के पूर्व अध्यक्ष जितेंद्र बहादुर सिंह ने बैंक के शेयरधारक व मेरे पिता राकेश शाही को जान से मारने की धमकी दी। इसके उलट, सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि कुछ गैर सदस्य, अराजक तत्व आ गए थे। इन सबने झगड़ा किया, जिस कारण अध्यक्ष ने कार्यवाही स्थगित कर दी।
नगर निगम स्थित बैंक की शाखा पर रविवार को वार्षिक आमसभा हुई। अध्यक्ष पल्लवी सिंह और सचिव अजय कुमार सिंह एजेंडे के साथ सुबह 11 बजे बैठक में आए। वित्तीय वर्ष के लाभ, संतुलन पत्र के अवलोकन, ऑडिटर की रिपोर्ट के अवलोकन सहित 10 एजेंडों पर चर्चा शुरू हुई। सचिव ने इसे आमसभा के पटल पर रखा तो टोकाटाकी शुरू हो गई। बैंक के निदेशक शत्रुघ्न शाही और सत्येंद्र मल्ल ने आपत्ति दर्ज कराई। साथ ही एनपीए सहित कई मुद्दों पर स्पष्टीकरण की मांग की तो मामला बिगड़ गया। जबरदस्त हंगामा होने लगा और नारेबाजी शुरू हो गई। तू-तू, मैं-मैं के बीच ही एजेंडे पास कराए गए। इसी दौरान अंशधारक एवं निदेशक सत्यभामा शाही के पति राकेश शाही और बैंक के निदेशक राम सिंह के बीच बहस होने लगी। बात एक-दूसरे को देख लेने तक चली गई। यह देख अध्यक्ष, सचिव वहां से चले गए। किसी ने पुलिस को सूचना दे दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने एक युवक को दबोचा और थाने ले गई। आरोप लगा कि बाहरी युवक मारपीट के इरादे से बैंक की आमसभा में पहुंचा था।
... तो धरना देंगे, मुख्यमंत्री को भी बताएंगे
अभद्रता का आरोप लगाते हुए नीरज शाही ने धरना-प्रदर्शन की धमकी दी है। उन्होंने कहा कि पूर्व अध्यक्ष के ही भतीजे जय सिंह (शाखा प्रबंधक), निदेशक राम सिंह, समरपाल सिंह और अजय कुमार सिंह ने जान से मारने की नियम से पिता की तरफ लाइसेंसी रिवाल्वर तान दी, किसी तरह से पिता को बचाया जा सका। वह मुख्यमंत्री से मिलेंगे और पूरे मामले की शिकायत करेंगे। पुलिस को तहरीर दी गई है, फिर भी प्रभाव में आकर मुकदमा नहीं दर्ज किया जा रहा। सारे घटनाक्रम की पुष्टि सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से की जा सकती है, लेकिन ऐसा पुलिस नहीं कर रही है। किसी तरह का समझौता नहीं हुआ है।
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दो खेमे में बंटा बैंक प्रबंधन
नगर सहकारी बैंक का प्रबंधन दो खेमे में बंटा हुआ है। कुछ निदेशक अध्यक्ष पल्लवी सिंह के साथ हैं तो कुछ विरोध में। इसका नमूना रविवार को वार्षिक आमसभा की बैठक में भी देखने को मिला। दोनों पक्ष की तरफ से एक-दूसरे को देखने की धमकी दी गई।
कोट
बैठक से पहले सभी कोरम पूरा कराया गया था। आरबीआई की गाइडलाइंस का पूरा ख्याल रखा गया था। किसी प्रकार की कोई बात नहीं थी। कुछ लोग बैंक में अराजकता का माहौल पैदा करना चाह रहे हैं। जबसे पल्लवी सिंह बैंक की अध्यक्ष बनीं, तबसे कर्मचारियों को समय से वेतन मिल जाता है। बैंक फायदे में है। इसकी ऑडिट आरबीआई की तरफ से कराई जाती है। किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई है। तमाम निराधार आरोप लगाए जाते हैं।
- जितेंद्र बहादुर सिंह, पूर्व अध्यक्ष, नगर सहकारी बैंक
वार्षिक सामान्य निकाय की बैठक बिना किसी सूचना के बुलाई गई थी। निदेशक शत्रुघ्न शाही ने बैठक की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए कोरम पूरा न होने की बात कही। इस पर सचिव उग्र हो गए और कार्यवाही पुस्तिका के साथ उपस्थिति पंजिका लेकर चले गए। इसमें सदस्यों के विचार अंकित नहीं किए गए। अभद्रता अलग से की गई है।
- राकेश शाही, अंशधारक नगर सहकारी बैंक
तहरीर मिली थी लेकिन देरशाम दोनों पक्षों में समझौता हो गया। इस मामले में एक युवक को पकड़ा गया था। उसे भी छोड़ दिया गया है।
- जयदीप वर्मा, इंस्पेक्टर कोतवाली
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गोरखपुर। नगर सहकारी बैंक की वार्षिक सामान्य निकाय की बैठक में रविवार को जमकर हंगामा हुआ। अध्यक्ष, सचिव के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। शोरगुल के बीच ही 10 एजेंडे पास करा लिए गए। बाद में कहासुनी, हाथापाई और मारपीट की नौबत आई तो पुलिस को सूचना दी गई। इसी मामले में गोरखपुर विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व महामंत्री नीरज शाही ने यह आरोप लगाते हुए थाने में तहरीर दी है कि बैंक के पूर्व अध्यक्ष जितेंद्र बहादुर सिंह ने बैंक के शेयरधारक व मेरे पिता राकेश शाही को जान से मारने की धमकी दी। इसके उलट, सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि कुछ गैर सदस्य, अराजक तत्व आ गए थे। इन सबने झगड़ा किया, जिस कारण अध्यक्ष ने कार्यवाही स्थगित कर दी।
नगर निगम स्थित बैंक की शाखा पर रविवार को वार्षिक आमसभा हुई। अध्यक्ष पल्लवी सिंह और सचिव अजय कुमार सिंह एजेंडे के साथ सुबह 11 बजे बैठक में आए। वित्तीय वर्ष के लाभ, संतुलन पत्र के अवलोकन, ऑडिटर की रिपोर्ट के अवलोकन सहित 10 एजेंडों पर चर्चा शुरू हुई। सचिव ने इसे आमसभा के पटल पर रखा तो टोकाटाकी शुरू हो गई। बैंक के निदेशक शत्रुघ्न शाही और सत्येंद्र मल्ल ने आपत्ति दर्ज कराई। साथ ही एनपीए सहित कई मुद्दों पर स्पष्टीकरण की मांग की तो मामला बिगड़ गया। जबरदस्त हंगामा होने लगा और नारेबाजी शुरू हो गई। तू-तू, मैं-मैं के बीच ही एजेंडे पास कराए गए। इसी दौरान अंशधारक एवं निदेशक सत्यभामा शाही के पति राकेश शाही और बैंक के निदेशक राम सिंह के बीच बहस होने लगी। बात एक-दूसरे को देख लेने तक चली गई। यह देख अध्यक्ष, सचिव वहां से चले गए। किसी ने पुलिस को सूचना दे दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने एक युवक को दबोचा और थाने ले गई। आरोप लगा कि बाहरी युवक मारपीट के इरादे से बैंक की आमसभा में पहुंचा था।
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... तो धरना देंगे, मुख्यमंत्री को भी बताएंगे
अभद्रता का आरोप लगाते हुए नीरज शाही ने धरना-प्रदर्शन की धमकी दी है। उन्होंने कहा कि पूर्व अध्यक्ष के ही भतीजे जय सिंह (शाखा प्रबंधक), निदेशक राम सिंह, समरपाल सिंह और अजय कुमार सिंह ने जान से मारने की नियम से पिता की तरफ लाइसेंसी रिवाल्वर तान दी, किसी तरह से पिता को बचाया जा सका। वह मुख्यमंत्री से मिलेंगे और पूरे मामले की शिकायत करेंगे। पुलिस को तहरीर दी गई है, फिर भी प्रभाव में आकर मुकदमा नहीं दर्ज किया जा रहा। सारे घटनाक्रम की पुष्टि सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से की जा सकती है, लेकिन ऐसा पुलिस नहीं कर रही है। किसी तरह का समझौता नहीं हुआ है।
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दो खेमे में बंटा बैंक प्रबंधन
नगर सहकारी बैंक का प्रबंधन दो खेमे में बंटा हुआ है। कुछ निदेशक अध्यक्ष पल्लवी सिंह के साथ हैं तो कुछ विरोध में। इसका नमूना रविवार को वार्षिक आमसभा की बैठक में भी देखने को मिला। दोनों पक्ष की तरफ से एक-दूसरे को देखने की धमकी दी गई।
कोट
बैठक से पहले सभी कोरम पूरा कराया गया था। आरबीआई की गाइडलाइंस का पूरा ख्याल रखा गया था। किसी प्रकार की कोई बात नहीं थी। कुछ लोग बैंक में अराजकता का माहौल पैदा करना चाह रहे हैं। जबसे पल्लवी सिंह बैंक की अध्यक्ष बनीं, तबसे कर्मचारियों को समय से वेतन मिल जाता है। बैंक फायदे में है। इसकी ऑडिट आरबीआई की तरफ से कराई जाती है। किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई है। तमाम निराधार आरोप लगाए जाते हैं।
- जितेंद्र बहादुर सिंह, पूर्व अध्यक्ष, नगर सहकारी बैंक
वार्षिक सामान्य निकाय की बैठक बिना किसी सूचना के बुलाई गई थी। निदेशक शत्रुघ्न शाही ने बैठक की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए कोरम पूरा न होने की बात कही। इस पर सचिव उग्र हो गए और कार्यवाही पुस्तिका के साथ उपस्थिति पंजिका लेकर चले गए। इसमें सदस्यों के विचार अंकित नहीं किए गए। अभद्रता अलग से की गई है।
- राकेश शाही, अंशधारक नगर सहकारी बैंक
तहरीर मिली थी लेकिन देरशाम दोनों पक्षों में समझौता हो गया। इस मामले में एक युवक को पकड़ा गया था। उसे भी छोड़ दिया गया है।
- जयदीप वर्मा, इंस्पेक्टर कोतवाली