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62 लोगों ने लिया देहदान का संकल्प
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जटाशंकर गुरुद्वारा में लगा देहदान का बोर्ड
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‘गुरु नानक देव देहदान मिशन’
62 लोगों ने लिया देहदान का संकल्प
विवेक सिंह
गोरखपुर। ‘नर मरे किछु काम न आवे, पशु मरे दस काज संवारे’ सिखों के पहले गुरु गुरुनानक देव जी की ये पंक्तियां ज्यादातर लोगों ने पढ़ीं हैं, मगर इसे सही मायने में कुछ लोग ही आत्मसात कर पाते हैं, इनमें से एक जटाशंकर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी भी है। कमेटी ने देहदान की एक अनूठी पहल शुरू कर, सिख समाज के लोगों के साथ साथ करीब 62 लोगों को देहदान के प्रति प्रेरित किया है। इस संबंध में इन लोगों ने बाकायदा गुरुद्वारा में अपना रजिस्ट्रेशन भी कराया है।
जटाशंकर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष जसपाल सिंह ने बताया कि ‘गुरु नानक देव निशुल्क रक्तदान सेवा केंद्र’ का संचालन पिछले सात वर्षों से किया जा रहा है। हर महीने रक्तदान शिविर का आयोजन कर अब तक हजारों लोगों को निशुल्क रक्त मुहैया कराया गया है। दो साल पहले लखनऊ में घटित एक दुखद घटना में जान गंवाने वाली बेटी ने देहदान की आखिरी इच्छा अपने पिता से जाहिर की थी। मीडिया के माध्यम से जब इसकी जानकारी उन्हें मिली तो गुरुद्वारा कमेटी ने इस दिशा में काम करना शुरू किया। पंजाबी अकादमी के सदस्य जगनैन सिंह नीटू ने बताया कि जागरूकता के लिए गुरुद्वारा परिसर में ‘गुरु नानक देव देहदान मिशन’ का अभियान चलाना शुरू किया। बैनर और पोस्टर लगाए, वहीं धार्मिक आयोजनों के दौरान लोगों को इस मुहिम से जुड़ने की अपील की गई। शुरूआत में गुरुद्वारा प्रबंधन से जुड़े लोगों को छोड़ दे तो कोई सामने नहीं आए, मगर सिख समाज के इन लोगों ने हार नहीं मानी, सतत प्रयास जारी रखा। दो साल के अंदर अब तक 62 लोग इसके लिए अपनी सहमति दे चुके हैं।
सरकारी प्रक्रिया को जल्द किया जाएगा पूरा
इस मुहिम से 62 लोगों को जोड़ा जा चुका है। देहदान से जुड़ी सरकारी प्रक्रिया को पूरा करने की कवायद चल रही है। जल्द ही इसे भी पूरा किया जाएगा। कोशिश है कि नवंबर में गुरु नानक देव के 550वें प्रकाश पर्व तक इसे पूरा किया जाएगा। - जगनैन सिंह नीटू, सदस्य पंजाबी अकादमी
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मुहिम का हिस्सा बनना खुशनसीबी
मृत्यु के बाद हमारी शरीर की आंखें, गुर्दे, ब्रेन पार्ट सहित अन्य अंग जरूरतमंद, असहाय व गरीब लोगों की जान बचाने के काम आएं । इससे बढ़कर कोई समाज सेवा नहीं हो सकती है। खुशनसीब हूं कि इस मुहिम का हिस्सा हूं। - चरनप्रीत सिंह, समाजसेवी
इससे बढ़कर नहीं कोई सौभाग्य
शरीर की मृत्यु और दाह संस्कार के बाद केवल राख का ढेर मात्र रह जाता है। यदि मानव कल्याण में हमारे अंग या देह काम आए तो इससे बढ़कर सौभाग्य की बात क्या हो सकती है। इसका उपयोग प्रशिक्षु डॉक्टर भी कर सकेंगे। -जसपाल सिंह, अध्यक्ष जटांशकर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी
महादान है देहदान
देहदान से बड़ा कोई महादान नहीं होता है। इसे महादान की श्रेणी में इसलिए रखा गया है क्योंकि मृत देह मेडिकल कॉलेज के प्रशिक्षु डॉक्टरों के लिए एक साइलेंट टीचर की तरह काम आती है। इससे रिसर्च के क्षेत्र में विद्यार्थी और बेहतर काम कर सकेंगे। - रजिंदर सिंह, प्रबंधक जटाशंकर गुरुद्वारा
क्या है सरकारी प्रक्रिया
18 वर्ष की आयु पूरी कर चुका कोई भी व्यक्ति देहदान के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी में सीधे संपर्क कर सकता है।
संकल्प पत्र भरने के लिए स्वयं का संकल्प, संकल्पकर्त्ता की दो फोटो, स्वयं की फोटो पहचान पत्र की छायाप्रति, स्थायी निवास से संबंधित प्रमाण पत्र की छायाप्रति, दो गवाहों की सहमति (रक्त संबंधी) के हस्ताक्षर, गवाहों के फोटो, फोटो पहचान पत्र एवं स्थायी निवास संबंधित प्रमाण पत्र की छायाप्रति लगानी होती है।
मृत्यु के 10-12 घंटे के अंदर देहदान किया जाता है, देहदान के समय पंजीकृत चिकित्सक के द्वारा जारी किया गया मृत्यु प्रमाण पत्र दिखाना अनिवार्य होता है। वहीं निकटतम परिजनों का फोटो पहचान पत्र और निवास की जरूरत पड़ती है।
मृत्यु के बाद जरूरी नहीं की जहां आवेदन किया हो उसी मेडिकल कॉलेज को शरीर सौंपना पड़े। व्यक्ति जिस शहर में हो परिजन वहां के मेडिकल कॉलेज में शरीर दिया जा सकता है।
2011 से चल रही है प्रक्रिया
मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग में तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. योगेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में देहदान को लेकर जागरूकता का अभाव है। यही वजह है कि इसके लिए ज्यादा लोग आवेदन नहीं करते हैं। वर्ष 2011 से अब तक 70 लोगों ने ही इसके प्रति सरकारी प्रक्रिया को पूरा किया है। इसमें प्रधानाचार्य, बैंककर्मियों के साथ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर तक शामिल हैं। खुशी है कि देहदान को लेकर सिख समाज ने जागरूकता दिखाई है। इनसे संपर्क स्थापित कर प्रक्रिया को पूरा कराया जाएगा।
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62 लोगों ने लिया देहदान का संकल्प
विवेक सिंह
गोरखपुर। ‘नर मरे किछु काम न आवे, पशु मरे दस काज संवारे’ सिखों के पहले गुरु गुरुनानक देव जी की ये पंक्तियां ज्यादातर लोगों ने पढ़ीं हैं, मगर इसे सही मायने में कुछ लोग ही आत्मसात कर पाते हैं, इनमें से एक जटाशंकर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी भी है। कमेटी ने देहदान की एक अनूठी पहल शुरू कर, सिख समाज के लोगों के साथ साथ करीब 62 लोगों को देहदान के प्रति प्रेरित किया है। इस संबंध में इन लोगों ने बाकायदा गुरुद्वारा में अपना रजिस्ट्रेशन भी कराया है।
जटाशंकर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष जसपाल सिंह ने बताया कि ‘गुरु नानक देव निशुल्क रक्तदान सेवा केंद्र’ का संचालन पिछले सात वर्षों से किया जा रहा है। हर महीने रक्तदान शिविर का आयोजन कर अब तक हजारों लोगों को निशुल्क रक्त मुहैया कराया गया है। दो साल पहले लखनऊ में घटित एक दुखद घटना में जान गंवाने वाली बेटी ने देहदान की आखिरी इच्छा अपने पिता से जाहिर की थी। मीडिया के माध्यम से जब इसकी जानकारी उन्हें मिली तो गुरुद्वारा कमेटी ने इस दिशा में काम करना शुरू किया। पंजाबी अकादमी के सदस्य जगनैन सिंह नीटू ने बताया कि जागरूकता के लिए गुरुद्वारा परिसर में ‘गुरु नानक देव देहदान मिशन’ का अभियान चलाना शुरू किया। बैनर और पोस्टर लगाए, वहीं धार्मिक आयोजनों के दौरान लोगों को इस मुहिम से जुड़ने की अपील की गई। शुरूआत में गुरुद्वारा प्रबंधन से जुड़े लोगों को छोड़ दे तो कोई सामने नहीं आए, मगर सिख समाज के इन लोगों ने हार नहीं मानी, सतत प्रयास जारी रखा। दो साल के अंदर अब तक 62 लोग इसके लिए अपनी सहमति दे चुके हैं।
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सरकारी प्रक्रिया को जल्द किया जाएगा पूरा
इस मुहिम से 62 लोगों को जोड़ा जा चुका है। देहदान से जुड़ी सरकारी प्रक्रिया को पूरा करने की कवायद चल रही है। जल्द ही इसे भी पूरा किया जाएगा। कोशिश है कि नवंबर में गुरु नानक देव के 550वें प्रकाश पर्व तक इसे पूरा किया जाएगा। - जगनैन सिंह नीटू, सदस्य पंजाबी अकादमी
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मुहिम का हिस्सा बनना खुशनसीबी
मृत्यु के बाद हमारी शरीर की आंखें, गुर्दे, ब्रेन पार्ट सहित अन्य अंग जरूरतमंद, असहाय व गरीब लोगों की जान बचाने के काम आएं । इससे बढ़कर कोई समाज सेवा नहीं हो सकती है। खुशनसीब हूं कि इस मुहिम का हिस्सा हूं। - चरनप्रीत सिंह, समाजसेवी
इससे बढ़कर नहीं कोई सौभाग्य
शरीर की मृत्यु और दाह संस्कार के बाद केवल राख का ढेर मात्र रह जाता है। यदि मानव कल्याण में हमारे अंग या देह काम आए तो इससे बढ़कर सौभाग्य की बात क्या हो सकती है। इसका उपयोग प्रशिक्षु डॉक्टर भी कर सकेंगे। -जसपाल सिंह, अध्यक्ष जटांशकर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी
महादान है देहदान
देहदान से बड़ा कोई महादान नहीं होता है। इसे महादान की श्रेणी में इसलिए रखा गया है क्योंकि मृत देह मेडिकल कॉलेज के प्रशिक्षु डॉक्टरों के लिए एक साइलेंट टीचर की तरह काम आती है। इससे रिसर्च के क्षेत्र में विद्यार्थी और बेहतर काम कर सकेंगे। - रजिंदर सिंह, प्रबंधक जटाशंकर गुरुद्वारा
क्या है सरकारी प्रक्रिया
18 वर्ष की आयु पूरी कर चुका कोई भी व्यक्ति देहदान के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी में सीधे संपर्क कर सकता है।
संकल्प पत्र भरने के लिए स्वयं का संकल्प, संकल्पकर्त्ता की दो फोटो, स्वयं की फोटो पहचान पत्र की छायाप्रति, स्थायी निवास से संबंधित प्रमाण पत्र की छायाप्रति, दो गवाहों की सहमति (रक्त संबंधी) के हस्ताक्षर, गवाहों के फोटो, फोटो पहचान पत्र एवं स्थायी निवास संबंधित प्रमाण पत्र की छायाप्रति लगानी होती है।
मृत्यु के 10-12 घंटे के अंदर देहदान किया जाता है, देहदान के समय पंजीकृत चिकित्सक के द्वारा जारी किया गया मृत्यु प्रमाण पत्र दिखाना अनिवार्य होता है। वहीं निकटतम परिजनों का फोटो पहचान पत्र और निवास की जरूरत पड़ती है।
मृत्यु के बाद जरूरी नहीं की जहां आवेदन किया हो उसी मेडिकल कॉलेज को शरीर सौंपना पड़े। व्यक्ति जिस शहर में हो परिजन वहां के मेडिकल कॉलेज में शरीर दिया जा सकता है।
2011 से चल रही है प्रक्रिया
मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग में तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. योगेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में देहदान को लेकर जागरूकता का अभाव है। यही वजह है कि इसके लिए ज्यादा लोग आवेदन नहीं करते हैं। वर्ष 2011 से अब तक 70 लोगों ने ही इसके प्रति सरकारी प्रक्रिया को पूरा किया है। इसमें प्रधानाचार्य, बैंककर्मियों के साथ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर तक शामिल हैं। खुशी है कि देहदान को लेकर सिख समाज ने जागरूकता दिखाई है। इनसे संपर्क स्थापित कर प्रक्रिया को पूरा कराया जाएगा।