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‘कंगाल’ हो गया नगर निगम

Sun, 07 May 2017 12:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Sun, 07 May 2017 12:47 AM IST
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Gorakhpur nagar nigam has no budget for contractor
नगर ‌न‌िगम। - फोटो : Amar Ujala
आय के स्रोत विकसित न कर पाना अब नगर निगम पर भारी पड़ने लगा है। आमदनी अठन्नी खर्चा रुपय्या करते-करते नगर निगम की स्थिति अब ‘कंगाल’ जैसी हो गई है। अभी नगर निगम करीब 70 करोड़ रुपये का कर्जदार हो गया है। फिलहाल, निगम प्रशासन ठेकेदारों का बकाया भुगतान करने की स्थिति में नहीं है। दरअसल, नगर निगम में काफी काम फंड मिलने की प्रत्याशा में करा लिया जाता है। फंड आने के बाद ठेकेदारों को भुगतान किया जाता है। ऐसा करते-करते नगर निगम ने ठेकेदारों से करीब 70 करोड़ रुपये का काम करा लिया है और अब फंड न होने की बात कहते हुए उनका भुगतान करने से मना कर रहा है। इससे ठेकेदारों की स्थिति बिगड़ी हुई है। कुछ ठेकेदारों के 25-25 लाख रुपये एक-एक साल से अटके हुए हैं। 
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विरोध में ठेकेदारों ने किया टेंडर बहिष्कार
भुगतान न होने से नाराज ठेकेदारों ने टेंडर का विरोध करना शुरू कर दिया है। निगम ने तीन बार टेंडर निकाला लेकिन किसी भी ठेकेदार ने टेंडर फार्म नहीं खरीदा। ऐसे में शहर के विभिन्न निर्माण कार्यों पर असर पड़ने की आशंका है।
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घर चलाने में होने लगी है दिक्कत
कई महीने पहले काम कराया था लेकिन अब तक भुगतान नहीं किया गया है। इससे काफी दिक्कत बढ़ गई है। घर-परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
-क्रांतिवीर सिंह, ठेकेदार।

कर्ज लेने की नौबत आ गई है
काफी समय बीत जाने के बाद भी कराए गए काम का भुगतान नहीं होने की वजह से अब मुश्किल बढ़ गई है। कर्ज लेने की नौबत आने लगी है।
-डब्लू तिवारी, ठेकेेदार। 

हां, नगर निगम पर ठेकेदारों का काफी बकाया है लेकिन इनमें से काफी पहले की देनदारी है। भुगतान फंड की उपलब्धता पर निर्भर करता है। 
-बीएन सिंह, नगर आयुक्त।

आय के संसाधन नहीं बढ़ाने से हुई दिक्कत
दरअसल, अप्रैल 1998 में अवस्थापना निधि के संबंध में नीति बनाई गई। अप्रैल 1999 में ही शासनादेश जारी कर इस निधि से 60 प्रतिशत कार्य स्थायी प्रकृति के करने के अलावा 40 प्रतिशत राशि नगर निगम की आय के लिए नए स्रोत विकसित करने का प्रावधान कर दिया गया लेकिन नगर निगम ने इस दिशा में पिछले 10 वर्षों से कोई काम नहीं किया है जबकि नगर निगम को इस निधि के करीब 40 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। 40 प्रतिशत की राशि के हिसाब से नगर निगम को तकरीबन 16 करोड़ रुपये अपनी आय के संसाधन विकसित करने में खर्च करना था लेकिन निगम की ओर से इस दिशा में कुछ भी नहीं किया गया। 
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